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Chandigarh News: प्रवासी पक्षियों से देशी मछलियों तक, सुखना वेटलैंड संरक्षण पर बड़ा मंथन

Fri, 03 Jul 2026 02:03 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 02:03 AM IST
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From migratory birds to native fish: Major deliberations on the conservation of Sukhna Wetland.
चंडीगढ़। राष्ट्रीय महत्व की सुखना वेटलैंड के संरक्षण और उसके प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने वीरवार को लोक भवन में वेटलैंड अथॉरिटी की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। बैठक में सुखना वेटलैंड और उसके कैचमेंट एरिया में चल रहे संरक्षण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। चौथी बैठक में लिए गए निर्णयों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा के साथ ही वेटलैंड अथॉरिटी के आधिकारिक लोगो को भी अंतिम रूप दिया गया।
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सभी विभाग मिलकर करेंगे संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर
बैठक में विभिन्न विभागों ने सुखना वेटलैंड के वैज्ञानिक प्रबंधन, पारिस्थितिकी संरक्षण और कैचमेंट क्षेत्र में चल रहे कार्यों की प्रस्तुति दी। प्रशासक ने कहा कि सुखना वेटलैंड का संरक्षण किसी एक विभाग का नहीं, बल्कि सभी संबंधित विभागों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए दीर्घकालिक संरक्षण योजना पर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए, ताकि जैव विविधता को बढ़ावा मिले और वेटलैंड का प्राकृतिक संतुलन बना रहे।
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बैठक में सुखना वेटलैंड में बढ़ रही खरपतवार की समस्या पर भी चर्चा हुई। प्रशासक ने स्पष्ट किया कि खरपतवार हटाने का कार्य पूरी तरह वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से किया जाए, ताकि जलजीवों और अन्य जलीय प्रजातियों पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। उन्होंने कैनाल डायवर्जन चैनल के रखरखाव, मिट्टी के कटाव को रोकने और मृदा एवं नमी संरक्षण के उपायों पर व्यापक अध्ययन कराने के निर्देश भी दिए।
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प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के साथ जागरूकता बढ़ाने पर भी फोकस
प्रवासी पक्षियों को लेकर भी प्रशासक ने विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने अधिकारियों से वेटलैंड में आने वाले प्रवासी पक्षियों की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली और उनके लिए बेहतर प्राकृतिक आवास विकसित करने के उपाय करने को कहा। साथ ही पर्यटकों और विद्यार्थियों में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए वेटलैंड के आसपास विभिन्न प्रवासी पक्षियों की जानकारी वाले डिस्प्ले बोर्ड लगाने के निर्देश दिए।
देशी मछलियों को बढ़ावा, डी-सिल्टेशन से बढ़ेगी जल भंडारण क्षमता
बैठक में बताया गया कि पंजाब विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के मत्स्य विविधता सर्वेक्षण में सुखना वेटलैंड में 20 से अधिक मछलियों की प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इनमें मृगल कार्प सबसे अधिक पाई गई, जबकि 80 प्रतिशत से अधिक मछलियां स्वदेशी प्रजातियों की हैं। मत्स्य विभाग ने वैज्ञानिक सलाह के आधार पर हाल ही में कैटला, रोहू और मृगल की 10 हजार फिंगरलिंग्स वेटलैंड में छोड़ी हैं, जिससे देशी प्रजातियों का संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन मजबूत हो सके।

मुख्य वन संरक्षक ने बैठक में बताया कि आईआईटी रुड़की और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया की सिफारिशों के अनुरूप सुखना वेटलैंड के रेगुलेटरी एंड पर वैज्ञानिक तरीके से डी-सिल्टेशन का कार्य जारी है। इस परियोजना से वेटलैंड की जल भंडारण क्षमता में लगभग 5.4 हेक्टेयर-मीटर की वृद्धि होने की संभावना है। इससे भविष्य में जल संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ वेटलैंड के पारिस्थितिक तंत्र को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
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