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जालसाज बिहार से चला रहे सस्ते सिलिंडर के नाम पर ठगने का धंधा
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चंडीगढ़। ऑक्सीजन सिलिंडर की डिलीवरी का झांसा देकर पीजीआई के डॉक्टर समेत दो लोगों से हजारों की चपत लगाने वाले जालसाजों की जड़ें बिहार में हैं। इसका खुलासा साइबर पुलिस की जांच में हुआ। पुलिस ने जब इनके मोबाइल नंबर की लोकेशन खंगाली तो, वह बिहार एक जिले की मिली। जालसाज बिहार में बैठकर चंडीगढ़ में ऑक्सीजन सिलिंडर की डिलीवरी का धंधा कर रहे हैं।
पीजीआई के डॉक्टर से साढ़े 18 हजार और सेक्टर 51 निवासी व्यक्ति से साढ़े सात हजार की ठगी करने का तरीका लगभग एक जैसा था। ऐसे में साइबर पुलिस को शक है कि दोनों ही मामलों में एक ही गैंग हो सकता है।
इंटरनेट पर ऑक्सीजन सिलिंडर की डिलीवरी देने के नाम पर कई सारे लिंक खुल जाते हैं, ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल है कि किस वेबसाइट पर ठगी का खेल खेला जा रहा है। इसके अलावा व्हाट्सएप, फेसबुक समेत अन्य सोशल नेटवर्क पर ऐसे कई सारे मैसेज वायरल हो रहे हैं। इन मैसेज में कोरोना मरीज को या तो फ्री में या फिर काफी कम पैसों पर ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया करवाने का दावा किया जाता है। साइबर सेल अब ऐसे संदेशों पर नजर रखकर इनके लिंक खंगाल रही है।
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जालसाजों के होते हैं फर्जी आईडी
ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि साइबर पुलिस सर्विलांस के आधार पर जब जालसाजों तक पहुंचती है, तो उनका मोबाइल नंबर फर्जी नाम और पते पर पंजीकृत होता है। बैंक खाता भी किसी जरूरतमंद शख्स से खरीदा हुआ होता है, जोकि पांच से दस हजार रुपये देकर खुलवाया जाता है और जब इन खातों में ठगी के पैसे आते हैं तो इन्हें कमीशन दिया जाता है।
डिलीवरी के नाम पर ऐसे हुई ठगी
पीजीआई के डॉक्टर और सेक्टर 51 निवासी शख्स को ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत थी। दोनों केस में मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम था। ऐसे में ऑक्सीजन सिलिंडर की डिलीवरी के लिए गूगल पर सर्च किया गया। इसके बाद जालसाजों ने इनसे संपर्क किया और दोनों ही केसों में सस्ते दामों पर सिलिंडर की डिलीवरी का झांसा दिया गया। जालसाजों ने डॉक्टर से साढ़े 18 हजार और सेक्टर 51 निवासी व्यक्ति से साढ़े सात हजार की ठगी कर ली।
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पीजीआई के डॉक्टर से साढ़े 18 हजार और सेक्टर 51 निवासी व्यक्ति से साढ़े सात हजार की ठगी करने का तरीका लगभग एक जैसा था। ऐसे में साइबर पुलिस को शक है कि दोनों ही मामलों में एक ही गैंग हो सकता है।
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इंटरनेट पर ऑक्सीजन सिलिंडर की डिलीवरी देने के नाम पर कई सारे लिंक खुल जाते हैं, ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल है कि किस वेबसाइट पर ठगी का खेल खेला जा रहा है। इसके अलावा व्हाट्सएप, फेसबुक समेत अन्य सोशल नेटवर्क पर ऐसे कई सारे मैसेज वायरल हो रहे हैं। इन मैसेज में कोरोना मरीज को या तो फ्री में या फिर काफी कम पैसों पर ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया करवाने का दावा किया जाता है। साइबर सेल अब ऐसे संदेशों पर नजर रखकर इनके लिंक खंगाल रही है।
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जालसाजों के होते हैं फर्जी आईडी
ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि साइबर पुलिस सर्विलांस के आधार पर जब जालसाजों तक पहुंचती है, तो उनका मोबाइल नंबर फर्जी नाम और पते पर पंजीकृत होता है। बैंक खाता भी किसी जरूरतमंद शख्स से खरीदा हुआ होता है, जोकि पांच से दस हजार रुपये देकर खुलवाया जाता है और जब इन खातों में ठगी के पैसे आते हैं तो इन्हें कमीशन दिया जाता है।
डिलीवरी के नाम पर ऐसे हुई ठगी
पीजीआई के डॉक्टर और सेक्टर 51 निवासी शख्स को ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत थी। दोनों केस में मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम था। ऐसे में ऑक्सीजन सिलिंडर की डिलीवरी के लिए गूगल पर सर्च किया गया। इसके बाद जालसाजों ने इनसे संपर्क किया और दोनों ही केसों में सस्ते दामों पर सिलिंडर की डिलीवरी का झांसा दिया गया। जालसाजों ने डॉक्टर से साढ़े 18 हजार और सेक्टर 51 निवासी व्यक्ति से साढ़े सात हजार की ठगी कर ली।