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पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज करा रहे हैं तो सचेत हो जाएं, फीस के नाम पर चल रहा ठगी का 'खेल'
Thu, 13 Feb 2020 12:16 PM IST
खुशबू गोयल
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 13 Feb 2020 12:16 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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अगर आप पीजीआई में इलाज कराने जा रहे हैं तो जरा सचेत हो जाइए, क्योंकि वहां दी जा रही मुफ्त सुविधा के लिए भी आपसे पैसे ऐंठे जा सकते हैं। पीजीआई गैस्ट्रो की ओपीडी में मरीज से उस जांच को कराने के लिए पैसे मांगे जाने का प्रकरण सामने आया है, जो वहां मुफ्त में होती है। चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत में पीजीआई के डॉक्टरों द्वारा जांच के नाम पर ठगी किए जाने की बात सामने आई है। मामले की शिकायत पीजीआई डायरेक्टर तक पहुंच गई है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
जम्मू निवासी रोहित आनंद दो साल से पीजीआई गैस्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंट में इलाज करा रहे हैं। उनके पैनक्रियाज में कुछ परेशानी है। रोहित ने बताया कि उन्हें हर तीन महीने पर फॉलोअप के लिए पीजीआई आना पड़ता है। इस बार 31 जनवरी को न्यू ओपीडी बिल्डिंग की गैस्ट्रो ओपीडी के कमरा नंबर 3005 में गए थे। वहां डॉक्टर ने फॉलोअप चेक करने के बाद पर्चे पर ‘फेकल इलास्टर’ टेस्ट लिखकर कमरा नंबर 3003 में भेज दिया। वहां कहा गया कि जो टेस्ट करवाना है, वह पीजीआई में नहीं होता। निजी लैब में टेस्ट कराने पर पांच हजार रुपये का खर्च आएगा।
अगर वे डॉक्टर के जरिए जांच कराएंगे तो महज 1500 रुपये का खर्च आएगा। रोहित आनंद ने कहा कि उन्हें कमरा नंबर 3003 में बैठे डॉक्टर के पास पैसे जमा करने और सैंपल देने को कहा। इसी बीच मेरे रिश्तेदार की कॉल आ गई। वे पीजीआई में ही नौकरी करते हैं। मैंने उन्हें सारी बात बताई। वे वहां आए और मुझे लेकर कमरा नंबर 8 ए में गए। जहां वह जांच मुफ्त हो गई। रोहित का कहना है कि इलाज के नाम पर हम डॉक्टर की हर बात पर बिना कोई शक किए भरोसा कर पैसा पानी की तरह खर्च करते हैं, लेकिन यहां तो मरीजों को ठगने का काम हो रहा है।
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जम्मू निवासी रोहित आनंद दो साल से पीजीआई गैस्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंट में इलाज करा रहे हैं। उनके पैनक्रियाज में कुछ परेशानी है। रोहित ने बताया कि उन्हें हर तीन महीने पर फॉलोअप के लिए पीजीआई आना पड़ता है। इस बार 31 जनवरी को न्यू ओपीडी बिल्डिंग की गैस्ट्रो ओपीडी के कमरा नंबर 3005 में गए थे। वहां डॉक्टर ने फॉलोअप चेक करने के बाद पर्चे पर ‘फेकल इलास्टर’ टेस्ट लिखकर कमरा नंबर 3003 में भेज दिया। वहां कहा गया कि जो टेस्ट करवाना है, वह पीजीआई में नहीं होता। निजी लैब में टेस्ट कराने पर पांच हजार रुपये का खर्च आएगा।
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अगर वे डॉक्टर के जरिए जांच कराएंगे तो महज 1500 रुपये का खर्च आएगा। रोहित आनंद ने कहा कि उन्हें कमरा नंबर 3003 में बैठे डॉक्टर के पास पैसे जमा करने और सैंपल देने को कहा। इसी बीच मेरे रिश्तेदार की कॉल आ गई। वे पीजीआई में ही नौकरी करते हैं। मैंने उन्हें सारी बात बताई। वे वहां आए और मुझे लेकर कमरा नंबर 8 ए में गए। जहां वह जांच मुफ्त हो गई। रोहित का कहना है कि इलाज के नाम पर हम डॉक्टर की हर बात पर बिना कोई शक किए भरोसा कर पैसा पानी की तरह खर्च करते हैं, लेकिन यहां तो मरीजों को ठगने का काम हो रहा है।
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जो जांच हो रही उसे बता दिया बंद
पीजीआई इंप्लाइज यूनियन नॉन फैकल्टी के अध्यक्ष अश्वनी मुंजाल ने बताया कि शिकायत करने वाला मरीज पीजीआई के एक स्टाफ का परिचित था, इसलिए यह मामला सामने आ गया। जो जांच यहां मुफ्त हो रही है उसे बंद बताकर बाहर से जांच कराने के नाम पर मरीज से 1500 रुपये जमा कराए जा रहे थे। स्टाफ ने मरीजों के हित में इसकी सूचना पीजीआई इंप्लाइज यूनियन ऑफिस में दी। इसके बाद इसकी जानकारी डायरेक्टर समेत पीजीआई के 60 से ज्यादा फैकल्टी और एचओडी को दी जा चुकी है।
जांच के नाम पर पैसे मांगे जाने से संबंधित एक शिकायत हमारे पास आई है। उसकी जांच कराई जाएगी। जब तक मामले की जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती इस संबंध में कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा।
- डॉ. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई
जांच के नाम पर पैसे मांगे जाने से संबंधित एक शिकायत हमारे पास आई है। उसकी जांच कराई जाएगी। जब तक मामले की जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती इस संबंध में कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा।
- डॉ. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई