भूपेंद्र हुड्डा के करीबी पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने बनाई नई पार्टी, 43 साल बाद कांग्रेस से जुदा
- टिकट ना मिलने से पिता और बेटी ने लड़ा था आजाद चुनाव, सैलजा को लिया था निशाने पर।
- युवा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव हिम्मत सिंह भी निर्मल के साथ आए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विधानसभा में टिकट कटने से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने आखिरकार अपनी नई राजनीतिक पार्टी का गठन कर दिया है। कांग्रेस से बागी हुए निर्मल ने 43 साल बाद खुद को कांग्रेस से पूरी तरह जुदा कर लिया है। चंडीगढ़ में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने अपनी नई राजनीति पार्टी ‘हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट’ के गठन का एलान किया। नई पार्टी बनाने की वजह उन्होंने कांग्रेस हाईकमान की अनदेखी और टिकट वितरण में सैलजा की मनमर्जी को बताया।
उधर, युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रहे हिम्मत सिंह ने भी निर्मल सिंह की पार्टी ज्वाइन कर ली है। उनके साथ-साथ प्रेसवार्ता में कांग्रेसी नेता दुर्गा सिंह अत्रेय, वीरेंद्र गांधी, ब्रह्मपाल राणा समेत अन्य कई कांग्रेसी नेताओं ने भी फ्रंट से जुड़ने की घोषणा की। निर्मल पार्टी के कन्वीनर होंगे। जबकि पार्टी की जिम्मेदारी उनकी बेटी चित्रा सरवारा संभालेंगी।
बताते चलें कि निर्मल सिंह चार बार के विधायक और दो बार पूर्व मंत्री रह चुके हैं। उत्तर हरियाणा के कई मुद्दों को लेकर निर्मल लंबे समय से संघर्षरत रहे हैं। हुड्डा के करीबी होने का बड़ा फायदा उन्हें तब मिला जब लोकसभा चुनाव 2019 में हुड्डा उन्हें कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से टिकट दिलवाने में कामयाब रहे। मगर मोदी लहर के चलते निर्मल लोकसभा चुनाव हार गए।
उसके बाद निर्मल सिंह ने अंबाला कैंट सीट से गृहमंत्री अनिल विज के खिलाफ अपनी पार्षद बेटी चित्रा सरवारा के लिए कांग्रेस हाईकमान से टिकट मांगा। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी चित्रा की टिकट के लिए हाईकमान पर काफी दबाव बनाया। मगर अंबाला लोकसभा की सभी नौ विधानसभा सीटों के टिकट वितरण में अंबाला की ही पूर्व लोकसभा सांसद एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा की ही चली और चित्रा को टिकट नहीं मिल पाया।
बस, इसी बात से नाराज होकर खुद चुनाव न लड़ने का एलान करने वाले पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने खुद को अंबाला शहर और बेटी चित्रा को अंबाला कैंट सीट पर आजाद उम्मीदवार के रूप में उतार दिया। दोनों बाप-बेटी की इस बगावत का नतीजा यह रहा कि दोनों ही सीटों पर कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। अब अंतत: निर्मल सिंह ने अपनी नई पार्टी का गठन कर दिया है।
प्रेसवार्ता के दौरान निर्मल सिंह ने कहा कि 15 मार्च को अंबाला शहर अनाज मंडी में पहला कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। अंबाला, कुरुक्षेत्र व यमुनानगर में उनकी पार्टी अगामी जिला परिषद और निकाय चुनाव भी लड़ेगी। निर्मल ने कहा कि जल्द ही प्रदेश और फिर जिला स्तर पर पार्टी की कार्यकारिणी घोषित की जाएगी। उनके अनुसार पार्टी प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दों, दादुपुर नलवी नहर, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेंशन इत्यादि समेत विभिन्न जनहित के मुद्दों पर जनता की लड़ाई जनता के बीच रहकर लड़ेगी। पूर्व युकां महासचिव हिम्मत सिंह ने अनुसार जल्द ही पार्टी अपना सदस्यता अभियान भी शुरू करेगी।