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अकाली दल के दिग्गज नेता का निधन, अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचा बादल परिवार
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट(पंजाब)
Updated Wed, 29 Mar 2017 09:20 AM IST
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शिअद के पूर्व मंत्री गुरदेव सिंह बादल का निधन
- फोटो : अमर उजाला
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शिअद के सीनियर उपाध्यक्ष व पूर्व खेतीबाड़ी मंत्री गुरदेव सिंह बादल (84) का मंगलवार सुबह 6 बजे निधन हो गया। उनका करीब 20 दिनों से लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में इलाज चल रहा था। शाम चार बजे स्थानीय शमशानघाट में उनका राजकीय सम्मान के साथ संस्कार किया गया।
इससे पहले डिप्टी कमिश्नर राजीव पराशर ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद एसएसपी डॉ. नानक सिंह समेत शिअद जिलाध्यक्ष व पूर्व विधायक मनतार सिंह बराड़, पूर्व सांसद परमजीत कौर गुलशन, पूर्व विधायक निर्मल सिंह, पूर्व मंत्री शीतल सिंह, परमबंस सिंह बंटी रोमाना, विधायक कुलतार सिंह बराड़, तीर्थ सिंह माहला, नवदीप सिंह बब्बू बराड़, लखवीर सिंह अराईयांवाला, गुरचेत सिंह ढिल्लों, गुरतेज सिंह गिल, बलजिंदर सिंह धालीवाल, गिंदरजीत सिंह सेखों, गुरदित्त सिंह सेखों, हरजीत सिंह भोलूवाला, कुलबीर सिंह मत्ता समेत विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने उनको श्रद्धांजलि दी। पंजाब पुलिस की एक टुकड़ी ने उन्हें सलामी दी। उनके बेटों केवल सिंह बादल व सूबा सिंह बादल ने देह को मुखाग्नि दिखाने की रस्म निभाई।
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इससे पहले डिप्टी कमिश्नर राजीव पराशर ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद एसएसपी डॉ. नानक सिंह समेत शिअद जिलाध्यक्ष व पूर्व विधायक मनतार सिंह बराड़, पूर्व सांसद परमजीत कौर गुलशन, पूर्व विधायक निर्मल सिंह, पूर्व मंत्री शीतल सिंह, परमबंस सिंह बंटी रोमाना, विधायक कुलतार सिंह बराड़, तीर्थ सिंह माहला, नवदीप सिंह बब्बू बराड़, लखवीर सिंह अराईयांवाला, गुरचेत सिंह ढिल्लों, गुरतेज सिंह गिल, बलजिंदर सिंह धालीवाल, गिंदरजीत सिंह सेखों, गुरदित्त सिंह सेखों, हरजीत सिंह भोलूवाला, कुलबीर सिंह मत्ता समेत विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने उनको श्रद्धांजलि दी। पंजाब पुलिस की एक टुकड़ी ने उन्हें सलामी दी। उनके बेटों केवल सिंह बादल व सूबा सिंह बादल ने देह को मुखाग्नि दिखाने की रस्म निभाई।
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वफादार के संस्कार में नहीं पहुंचा बादल परिवार
वफादार के संस्कार में नहीं पहुंचा बादल परिवार
- फोटो : अमर उजाला
जीवन भर पूर्व सीएम के परिवार के वफादार रहे गुरदेव सिंह बादल के अंतिम संस्कार में बादल परिवार का कोई भी सदस्य शामिल नहीं हुआ। प्रकाश सिंह बादल के करीबी साथी होने की वजह से ही गुरदेव सिंह अपने नाम के साथ बादल लगाते थे। हालांकि उनका गांव बादल से कोई नाता नहीं रहा।
उनका जन्म 13 अप्रैल 1933 को मुक्तसर के गांव हराज में हुआ। जवानी के समय ढाढ़ी जत्थे की बदौलत शिअद नेता प्रकाश सिंह बादल के संपर्क में आए और उनकी प्रेरणा से राजनीति में कूदे। साल 1963 से साल 1979 तक अबोहर से एसजीपीसी के सदस्य रहे और 1979 से 1986 तक धर्म प्रचार कमेटी के सदस्य रहे। उन्हें 8 बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और दो बार मुक्तसर, एक बार फरीदकोट व 5 बार पंजगराईं सीट से विधायक चुने गए।
साल 1997-2002 की बादल सरकार में उन्हें खेतीबाड़ी मंत्री बनाया गया था। साल 2007 में पहली बार उन्हें पंजगराईं सीट से कांग्रेस प्रत्याशी जोगिंदर सिंह के मुकाबले हार का सामना करना पड़ा। 2012 में लगातार दूसरी बार जैतो सीट से जोगिंदर सिंह से ही हार गए थे। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में शिअद ने जैतो सीट से उनकी जगह उनके बेटे सूबा सिंह बादल को मैदान में उतारा था और वह तीसरे स्थान पर रहे।
उनका जन्म 13 अप्रैल 1933 को मुक्तसर के गांव हराज में हुआ। जवानी के समय ढाढ़ी जत्थे की बदौलत शिअद नेता प्रकाश सिंह बादल के संपर्क में आए और उनकी प्रेरणा से राजनीति में कूदे। साल 1963 से साल 1979 तक अबोहर से एसजीपीसी के सदस्य रहे और 1979 से 1986 तक धर्म प्रचार कमेटी के सदस्य रहे। उन्हें 8 बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और दो बार मुक्तसर, एक बार फरीदकोट व 5 बार पंजगराईं सीट से विधायक चुने गए।
साल 1997-2002 की बादल सरकार में उन्हें खेतीबाड़ी मंत्री बनाया गया था। साल 2007 में पहली बार उन्हें पंजगराईं सीट से कांग्रेस प्रत्याशी जोगिंदर सिंह के मुकाबले हार का सामना करना पड़ा। 2012 में लगातार दूसरी बार जैतो सीट से जोगिंदर सिंह से ही हार गए थे। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में शिअद ने जैतो सीट से उनकी जगह उनके बेटे सूबा सिंह बादल को मैदान में उतारा था और वह तीसरे स्थान पर रहे।