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जस्टिस काटजू का खुलासा, बहबल कलां में बिना इजाजत चली गोली

Sun, 27 Mar 2016 06:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 27 Mar 2016 06:37 PM IST
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former justice markandey katju, behbal kalan firing issue, granth ahib insult issue, punjab
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत जस्टिस मार्कंडेय काटजू - फोटो : फाइल फोटो
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से गुस्साए सिखों के प्रदर्शन के दौरान पंजाब के बहबल कलां में पुलिस ने मजिस्ट्रेट से इजाजत लिए बिना गोली चलाई थी। ऐसे हालात भी नहीं थे कि लोगों पर गोली चलानी पड़े फिर भी निहत्थे लोगों पर फायरिंग की गई। पुलिस फायरिंग की जांच के लिए गठित पीपुल्स कमिशन ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है। बहबल कलां में पुलिस की गोली से दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग जख्मी हुए थे।
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लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल, सिख फॉर ह्यूमन राइट्स और पंजाब ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन के आग्रह पर सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस मार्कंडेय काटजू और पूर्व डीजीपी शशिकांत की ओर से बनाए गए दो सदस्यीय कमिशन ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी। कमिशन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जांच के दौरान कुछ लोगों ने कहा है कि बड़े अधिकारियों के फोन आने पर बहबल कलां में निहत्थे और शांत ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोली चलाई गई।
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इसके लिए कोई इजाजत नहीं ली गई थी। ऐसे हालात भी नहीं थे कि पुलिस को अचानक गोली चलानी पड़े। कमिशन ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि जिन लोगों ने फोन आने की बात कही, उन्होंने यह भी बताया कि जिस पुलिस टीम ने गोली चलाई, उनका नेतृत्व कर रहे पुलिस अधिकारियों के फोन की कॉल डिटेल खंगाली जानी चाहिए। कमिशन ने कहा कि बहबल कलां गोली कांड की जांच के दौरान 37 लोगों ने शपथ पत्र दिए। इन्हें पूरी तरह परखने के बाद ही रिपोर्ट तैयार की गई है ताकि गवाहों की विश्वसनीयता जांची जा सके।
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जांच के दौरान 14 अक्तूबर को गोलीकांड में मारे गए कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह के रिश्तेदारों, गोलियों से जख्मी हुए पीड़ितों और लाठीचार्ज में घायल प्रदर्शनकारियों के बयान भी लिए गए। प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों से पूछताछ में सामने आया है कि गोली अचानक चली, जबकि गोली चलाने के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी है, लेकिन ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई। यह भी रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार से पत्र मिलने के बाद जो एफआईआर भी हुई, वह अज्ञात लोगों के खिलाफ की गई।

अपने स्तर पर जांच करे पुलिस विभाग
कमिशन का मानना है कि पुलिस विभाग को गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों की शिनाख्त अपने स्तर पर कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। अपनी रिपोर्ट में कमिशन ने सुप्रीम कोर्ट की एक जजमेंट का हवाला भी दिया है, जिसमें फर्जी मुठभेड़ के दोषी पुलिसवालों पर कत्ल का मामला बनने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा है कि जिस पुलिस बल ने गोली चलाई, उस टीम का नेतृत्व एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह और थाना बाजाखाना के एसएचओ के हाथ में था। हालांकि, लोगों ने ऊपर से फोन आने के बाद गोली चलने की बात कमिशन के समक्ष कही, लेकिन जस्टिस काटजू ने यह कहते हुए इस बात की पुष्टि नहीं की कि भले ही कोई कुछ भी कहे, लेकिन बिना तस्दीक के ऐसा दोष साबित नहीं हो सकता।

दुश्मन समझ की गई कार्रवाई
कमिशन ने रिपोर्ट में कहा है कि बहबलकलां में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने ऐसी कार्रवाई की, जैसे किसी दुश्मन पर छिपकर गोली चलाई जाती है। यहां बसों, खंडहरों और ट्रालियों को बंकर की तरह इस्तेमाल कर गोली चलाई गई।

सरकारी तंत्र नहीं हुआ शामिल
कमिशन ने सरकारी तंत्र और पुलिस अधिकारियों को नोटिस भेजकर जांच में शामिल होने का न्योता दिया, लेकिन कोई पेश नहीं हुआ और न ही कोई प्रतिनिधि भेजा। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों के बयानों और शपथ पत्रों को सबूत मानकर रिपोर्ट तैयार की गई।


रिपोर्ट मानने को बाध्य नहीं सरकार
प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर जस्टिस जोरा सिंह कमिशन गठित किया है, लेकिन पीपुल्स कमीशन का कहना है कि सरकारी कमीशन ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पीपुल्स कमिशन की इस रिपोर्ट पर सरकार कोई कार्रवाई करे, यह जरूरी नहीं है। यह कमीशन और रिपोर्ट केवल आम लोगों का है। ऐसे में सरकार इसे मानने को बाध्य नहीं है। रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जा चुका है और जल्द ही इसे वेबसाइट पर डाल दिया जाएगा। इसके बाद कोई व्यक्ति रिपोर्ट के आधार पर सरकार तक पहुंच कर सकता है या फिर जनहित के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
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