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Hindi News ›   Chandigarh ›   Former cricketer Venkatesh Prasad narrated interesting story of 1996 World Cup

Samvad: आमिर सोहेल ने बल्ला दिखाया, अगले ही गेंद पर क्लीन बोल्ड किया, अमर उजाला संवाद में बोले वेंकटेश प्रसाद

Mon, 07 Aug 2023 09:59 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 07 Aug 2023 09:59 PM IST
सार

वेंकटेश प्रसाद ने कहा कि चाहे वह खेल का मैदान हो या फिर किसी भी अन्य फील्ड में हर एक को अनुशासन में रहना चाहिए। ऐसा करने से हर क्षेत्र मे सफलता मिलती है।

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Former cricketer Venkatesh Prasad narrated interesting story of 1996 World Cup
पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने चंडीगढ़ में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने क्रिकेट से जुड़े कई किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि 1983 वर्ल्ड कप के हीरो कपिल देव देश के हर क्रिकेट प्रशंसक के हीरो है। वह मेरे भी रोल मॉडल रहे हैं। वर्ल्ड कप टीवी पर तो नहीं देख सका क्योंकि मेरे घर पर टीवी नहीं था लेकिन न्यूज के जरिए जब पता लगा कि भारत ने कपिल देव की अगुवाई में वर्ल्ड कप जीत लिया तो वह उस समय पूरी पीढ़ी के लिए रोल मॉडल बन गए थे लेकिन मेरा सपना उस समय पूरा हुआ जब 1994 में श्रीलंका में कपिल देव के साथ मुझे खेलना का मौका मिला। उनके साथ खेलना मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था। 

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आज कपिल देव के शहर चंडीगढ़ में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम का हिस्सा बनने का मौका मिला तो इस शहर को लेकर मेरी यादें ताजा हो गई। मैं अक्सर टेस्ट से लेकर वनडे खेलने चंडीगढ़ आता रहता था। यह शहर मेरे बेंगलुरू के मुकाबले बहुत बेहतरीन शहर है। यहां का खाना बेहतरीन हैं, मैं वेजिटेरियन हूं और यहां लजीज पकवान खाकर टेस्ट मैचों के दिन याद आ जाते हैं।

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आमिर सोहेल ने बल्ला दिखाया तो अगले ही गेंद पर क्लीन बोल्ड कर दिया

भारत पाकिस्तान के मुकाबले में सभी की दिलचस्पी होती है चाहे फिर वो क्रिकेट प्रेमी हो या नहीं। दोनों देशों के लोगों की इस मुकाबले पर नजर रहती है। इस मुकाबले का प्रेशर खिलाड़ियों पर किसी और मैच से कहीं ज्यादा होता है। ऐसा ही कुछ 1996 के वर्ल्ड कप में वेंकटेश प्रसाद और आमिर सोहेल के बीच भी देखने को मिला था। 

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इसका जिक्र पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने किया। उन्होंने बताया कि 1996 वर्ल्ड कप का जब दूसरे क्वार्टर फाइनल में दोनों चिर प्रतिद्वंदी भारत और पाकिस्तान आमने-सामने थे। पाकिस्तान की पारी के दौरान आमिर सोहेल ने मेरे बॉल पर चौका मारा और बल्ला मुझे दिखाते हुए बॉउंड्री की तरफ इशारा किया। वेंकटेश ने बताया कि उन्हें गुस्सा आ गया और अगली ही गेंद पर आमिर सोहेल को क्लीन बोल्ड कर दिया और सोहेल की तरफ आगे बढ़ते हुए उन्हें पवेलियन का रास्ता दिखाते हुए वापस जाने का इशारा किया।

अनुशासन अनिवार्य है  

वेंकटेश प्रसाद ने कहा कि चाहे वह खेल का मैदान हो या फिर किसी भी अन्य फील्ड में हर एक को अनुशासन में रहना चाहिए। ऐसा करने से हर क्षेत्र मे सफलता मिलती है।

मैं मन की बात लिखता हूं, किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं

ट्विटर पर टीम इंडिया के मैनजमेंट पर तंज कसने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं किसी को नीचा दिखाना नहीं चाहता। हम भी मैच हारे हैं। हम हमेशा मैच नहीं जीते थे। मौजूदा टीम काफी टैलेंटेड है। जब भी कोई भारत के लिए खेल रहा होता है तो उसके एटीट्यूड पर सबकी नजर होती है। आपको हमेशा जीत के लिए खेलना होता है। जब मैं ट्वीट करता हूं तो अपने मन की बात लिखता हूं। किसी को नीचा नहीं दिखाना चाहता।

जितना प्रयोग करेंगे, उतना कंफ्यूज रहेंगे

टीम में एक स्थिरता होनी चाहिए। आप लगातार बदलाव नहीं कर सकते हैं। आपके पास अलग-अलग सलाह आएंगी। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को देखिए। उनके पास अलग-अलग टीमें हैं लेकिन वह ज्यादा बदलाव नहीं करते। अपनी योजनाओं पर टिके रहते हैं। आप जितना प्रयोग करेंगे उतना कंफ्यूज होंगे। आप लगातार बदलाव करेंगे तो आने वाले खिलाड़ी यही सोचेंगे कि अगर मैंने दो मैच में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो मुझे भी निकाल देंगे। खिलाड़ियों को मानसिक रूप से तैयार करना होता है। क्षमता होती है लेकिन मानसिक रूप से मजबूती ज्यादा जरूरी है।

क्रिकेटर चोटिल हो रहा है तो इसका मतलब है कि वह अनुशासित नहीं है

वेंकटेश ने कहा कि आजकल खिलाड़ी बहुत ज्यादा चोटिल हो रहे हैं। इसके लिए अनुशासन की आवश्यकता है। अगर आप चोटिल हो रहे हैं तो अनुशासित नहीं हैं। भारत में ज्यादा क्रिकेट के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं लगता। अभी बस एक आईपीएल बढ़ गया है। जब हम खेलते थे तब औसतन 15 टेस्ट खेलते थे। उस समय 35 वनडे खेल लेते थे। आज भी ऐसा ही चल रहा है। आईपीएल ने आपको दो महीनों के लिए ज्यादा व्यस्त किया है। पहले टेस्ट और वनडे होते थे। अब टेस्ट और वनडे के अलावा टी-20 होते हैं। इसलिए हमें लग रहा है कि बहुत ज्यादा मैच हो रहे हैं।

धोनी जैसा कोई विनम्र नहीं

वेंकटेश ने कहा कि इतनी उपलब्धियों के बाद भी उनके जितना विनम्र कोई नहीं है। उनके जितनी उपलब्धियां किसी भारतीय क्रिकेटर के पास नहीं हैं। वे जमीन से जुड़े इंसान हैं। 2001 में वे बिहार से खेल रहे थे, मैं कर्नाटक से खेल रहा था। तब से अब तक धोनी वैसे ही हैं। उनके पास गाड़ियों का काफी विशाल कलेक्शन है। मुझे लगता है कि उसे म्यूजियम कहना चाहिए। धोनी बाइक्स को लेकर बहुत क्रेजी हैं।

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