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Chandigarh News: प्रदेश के 10 जिलों में कम हुआ वन क्षेत्र
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-हरियाणा सरकार ने विधानसभा में रखे 2015 से 2021 तक के आंकड़े
-एनसीआर के आठ जिलों में कम हुआ क्षेत्र, हिसार और यमुनानगर भी शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में वन क्षेत्र बढ़ाने की प्रदेश सरकार की मुहिम को झटका लगा है। प्रदेश के दस जिलों में वन क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है। खास बात ये है कि इनमें अधिकतर एनसीआर के जिले हैं और यहां पर पहले ही प्रदूषण अधिक है। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद जिलों में 2.47 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कमी रिकार्ड की गई है। शेष जिलों में या तो स्थिति पहले जैसी या फिर मामूली बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़े हरियाणा सरकार ने विधानसभा के पटल पर रखे हैं।
गोहाना से कांग्रेस के विधायक जगबीर सिंह मलिक ने सरकार से 2015 से अब तक प्रदेश में वन क्षेत्र की स्थिति पूछी थी। औसतन 2019 के मुकाबले में अब ओवरऑल प्रदेश में 1.04 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ा है। वर्ष 2019 में कुल क्षेत्र 1602.44 था, जो 2021 में 1.04 वर्ग किलोमीटर बढ़ोतरी के साथ 1603.48 क्षेत्र हुआ है। खास बात ये है कि एनसीआर के आठ जिलों में गुरुग्राम, फरीदाबाद, भिवानी, झज्जर, करनाल, मेवात, पलवल व रोहतक शामिल हैं। इनके अलावा, हिसार और यमुनानगर जिले में भी वन क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है।
बाक्स
जिला 2019 2021 कम क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर)
भिवानी 113.81 111.42 -2.39
फरीदाबाद 79.94 79.23 -0.71
गुरुग्राम 116.18 113.71 -2.47
हिसार 57.64 57.36 -0.28
झज्जर 25.93 25.41 -0.52
करनाल 32.24 31.64 -.06
मेवात 111.18 110.41 -0.77
पलवल 13.97 13.56 -041
रोहतक 21.13 20.39 -0.74
यमुनानगर 193.36 192.99 -0.37
बाक्स
जिला 2019 2021 बढ़ा क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर)
अंबाला 51.35 52.27 0.92
फतेहाबाद 18 18.49 0.49
जींद 21 22.34 1.34
कैथल 57.07 58.82 1.75
कुरुक्षेत्र 39.75 40.12 0.37
महेंद्रगढ़ 103.29 103.38 0.09
पंचकूला 390.7 392.1 1.4
पानीपत 15.88 16.45 0.57
रेवाड़ी 62.45 63.1 0.65
सिरसा 56.6 58.25 1.65
सोनीपत 20.97 22.04 1.07
बाक्स
पंचकूला में सबसे अधिक वन क्षेत्र
हरियाणा के 44,212 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से केवल 1,602.44 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। इनमें से 28 वर्ग किमी ''बहुत घने जंगल'' के अंतर्गत आता है। 451 वर्ग किमी ''मध्यम घने जंगल'' के अंतर्गत आता है, जबकि 1,124 वर्ग किमी ''खुले जंगल'' श्रेणी के अंतर्गत आता है। पंचकूला में सबसे अधिक 43.51 प्रतिशत वन क्षेत्र है। इसके बाद यमुनानगर 10.94, फरीदाबाद 10.79 और गुरुग्राम 9.24 प्रतिशत है।
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कोट
ओवरऑल प्रदेश में वन क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है, जिन दस जिलों में वन क्षेत्र कम हुआ है, वहां पर और अधिक पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। जो भी खामियां रही होंगी, उनको दूर किया जाएगा और वन क्षेत्र को बढ़ाया जाएगा।
-कंवर पाल गुर्जर, वन मंत्री
मानसून व अधिकारियों की अनदेखी से सूख रहे पौधे
एक तरफ जहां प्रदेश के दस जिलों में वन क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ इस साल वन विभाग की ओर से पौधारोपण अभियान के तहत जिलों में लगाए गए पौधे भी मानसून की बेरुखी और अधिकारियों की अनदेखी के चलते सूख रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में हालत ज्यादा खराब है। पानीपत में आठ लाख के करीब पौधे लगाए गए थे, यहां पर 60 प्रतिशत पौधे सूख गए हैं। वहीं सिरसा में 40, भिवानी और कैथल में 30-30 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं। अभी कई जिलों में पौधारोपण का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है।
जिला पौधारोपण सूखे पौधे (प्रतिशत में)
पानीपत 8,00,000 60
सिरसा 13,00,000 40
भिवानी 5,00,000 30
कैथल 5,00,000 30
चरखी दादरी 3,10,000 24
अंबाला 3,00,000 20
रोहतक 4,50,000 15
फतेहाबाद 6,17,000 13
कुरुक्षेत्र 65,000 10
नारनौल 80,000 10
रेवाड़ी 1,50,000 7
झज्जर 80,000 5
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-एनसीआर के आठ जिलों में कम हुआ क्षेत्र, हिसार और यमुनानगर भी शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में वन क्षेत्र बढ़ाने की प्रदेश सरकार की मुहिम को झटका लगा है। प्रदेश के दस जिलों में वन क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है। खास बात ये है कि इनमें अधिकतर एनसीआर के जिले हैं और यहां पर पहले ही प्रदूषण अधिक है। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद जिलों में 2.47 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कमी रिकार्ड की गई है। शेष जिलों में या तो स्थिति पहले जैसी या फिर मामूली बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़े हरियाणा सरकार ने विधानसभा के पटल पर रखे हैं।
गोहाना से कांग्रेस के विधायक जगबीर सिंह मलिक ने सरकार से 2015 से अब तक प्रदेश में वन क्षेत्र की स्थिति पूछी थी। औसतन 2019 के मुकाबले में अब ओवरऑल प्रदेश में 1.04 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ा है। वर्ष 2019 में कुल क्षेत्र 1602.44 था, जो 2021 में 1.04 वर्ग किलोमीटर बढ़ोतरी के साथ 1603.48 क्षेत्र हुआ है। खास बात ये है कि एनसीआर के आठ जिलों में गुरुग्राम, फरीदाबाद, भिवानी, झज्जर, करनाल, मेवात, पलवल व रोहतक शामिल हैं। इनके अलावा, हिसार और यमुनानगर जिले में भी वन क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है।
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जिला 2019 2021 कम क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर)
भिवानी 113.81 111.42 -2.39
फरीदाबाद 79.94 79.23 -0.71
गुरुग्राम 116.18 113.71 -2.47
हिसार 57.64 57.36 -0.28
झज्जर 25.93 25.41 -0.52
करनाल 32.24 31.64 -.06
मेवात 111.18 110.41 -0.77
पलवल 13.97 13.56 -041
रोहतक 21.13 20.39 -0.74
यमुनानगर 193.36 192.99 -0.37
बाक्स
जिला 2019 2021 बढ़ा क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर)
अंबाला 51.35 52.27 0.92
फतेहाबाद 18 18.49 0.49
जींद 21 22.34 1.34
कैथल 57.07 58.82 1.75
कुरुक्षेत्र 39.75 40.12 0.37
महेंद्रगढ़ 103.29 103.38 0.09
पंचकूला 390.7 392.1 1.4
पानीपत 15.88 16.45 0.57
रेवाड़ी 62.45 63.1 0.65
सिरसा 56.6 58.25 1.65
सोनीपत 20.97 22.04 1.07
बाक्स
पंचकूला में सबसे अधिक वन क्षेत्र
हरियाणा के 44,212 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से केवल 1,602.44 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। इनमें से 28 वर्ग किमी ''बहुत घने जंगल'' के अंतर्गत आता है। 451 वर्ग किमी ''मध्यम घने जंगल'' के अंतर्गत आता है, जबकि 1,124 वर्ग किमी ''खुले जंगल'' श्रेणी के अंतर्गत आता है। पंचकूला में सबसे अधिक 43.51 प्रतिशत वन क्षेत्र है। इसके बाद यमुनानगर 10.94, फरीदाबाद 10.79 और गुरुग्राम 9.24 प्रतिशत है।
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कोट
ओवरऑल प्रदेश में वन क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है, जिन दस जिलों में वन क्षेत्र कम हुआ है, वहां पर और अधिक पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। जो भी खामियां रही होंगी, उनको दूर किया जाएगा और वन क्षेत्र को बढ़ाया जाएगा।
-कंवर पाल गुर्जर, वन मंत्री
मानसून व अधिकारियों की अनदेखी से सूख रहे पौधे
एक तरफ जहां प्रदेश के दस जिलों में वन क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ इस साल वन विभाग की ओर से पौधारोपण अभियान के तहत जिलों में लगाए गए पौधे भी मानसून की बेरुखी और अधिकारियों की अनदेखी के चलते सूख रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में हालत ज्यादा खराब है। पानीपत में आठ लाख के करीब पौधे लगाए गए थे, यहां पर 60 प्रतिशत पौधे सूख गए हैं। वहीं सिरसा में 40, भिवानी और कैथल में 30-30 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं। अभी कई जिलों में पौधारोपण का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है।
जिला पौधारोपण सूखे पौधे (प्रतिशत में)
पानीपत 8,00,000 60
सिरसा 13,00,000 40
भिवानी 5,00,000 30
कैथल 5,00,000 30
चरखी दादरी 3,10,000 24
अंबाला 3,00,000 20
रोहतक 4,50,000 15
फतेहाबाद 6,17,000 13
कुरुक्षेत्र 65,000 10
नारनौल 80,000 10
रेवाड़ी 1,50,000 7
झज्जर 80,000 5