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गोरे भी हैं पंजाब के साग के दीवाने...
नरिंदर वैद्य/अमर उजाला, जालंधर
Updated Sat, 13 Dec 2014 04:48 PM IST
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जब भी मक्की की रोटी और सरसों के साग की बात होती है तो हर पंजाबी के मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन अब पंजाब के साग ने विदेशों में भी धूम मचा दी है। यही कारण है कि पंजाब से सरसों का साग अब 90 फीसदी निर्यात होने लगा है।
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कनाडा, यूके, अमेरिका, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इटली के अलावा मिडिल ईस्ट के जितने भी देश हैं उनमें पंजाब के साग की बल्ले-बल्ले हो रही है। सरसों के साग की डिमांड बाहर के देशों में तेजी से बढ़ने लगी है। किसानों से उच्चतम क्वालिटी का साग खरीदकर पंजाब की सरकारी एजेंसी मार्कफेड इसको खुद पकाती है और आगे रेडी टू ईट की पैकिंग कर विदेशों में सप्लाई किया जा रहा है।
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मार्कफेड विदेशों में सोहना ब्रांड के नाम से भारी मात्रा में साग भेज रहा है। मार्कफेड ने पिछले साल साग के करीब 20 लाख के टिन पैक कर विदेशों में भेजे हैं। मार्कफेड का यह साग 450 ग्राम और 850 ग्राम की पैकिंग में उपलब्ध है। साग उच्चतम क्वालिटी का बने, इसलिए कुकिंग के लिए बाकायदा ऐसी महिलाओं को तैनात कर रखा है, जिनको साग बनाने का बहुत तजुर्बा है।
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18 माह तक रख सकते हैं पैक
साग की छंटाई से बनाने तक का काम तजुर्बेकार महिलाएं और पुरुष कर्मी करते हैं। इस समय मार्कफेड के इस विभाग में करीब 70 का स्टाफ काम कर रहा है।
इस साग को अगर पैक ही रखा जाए तो इसे 18 माह तक रखा जा सकता है और गर्म कर खाया जा सकता है। अगर इस पैक को एक बार खोल लिया जाए तो फिर इसे 10 घंटे के अंदर खत्म करना जरूरी हो जाता है।
30 लाख पैक का होगा निर्यात
मार्कफेड के जरनल मैनेजर सचिन गर्ग का कहना है कि विदेशों से साग की डिमांड बढ़ रही है। इस साल उम्मीद है कि साग के करीब 30 लाख टिन पैक विदेशों में भेजे जा सकते हैं। पंजाब में साग नवंबर से लेकर फरवरी तक ज्यादा मिलता है।
इन महीनों में साग को स्टाक करके इसको पकाया जाता है और पूरा साल मार्कफेड इसको निर्यात करती है। चूंकि यूरोप के कई देशों में बर्फ और ठंड का मौसम लगातार चलता रहा है, जिसमें साग की खपत होती ही रहती है।