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पंजाबः बारिश ने मचाई ऐसी तबाही, चार की मौत, सतलुज दरिया में समाई सड़कें, सैकड़ों गांवों में बाढ़

Mon, 19 Aug 2019 10:07 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 19 Aug 2019 10:07 AM IST
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Flood Disaster due to Heavy Rainfall in Punjab, Bhakra Dam, Sutlej River
गांवों में आई बाढ़ - फोटो : अमर उजाला
देश भर में भारी बारिश से तबाही मची हुई है। अकेले पंजाब में सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं चार लोगों की जान भी चल गई है। भाखड़ा डैम से छोड़े जा रहे पानी के कारण सतुलज दरिया उफान पर है। रोपड़, पठानकोट, लुधियाना और फिरोजपुर के गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। फिरोजपुर, जालंधर, नवांशहर और कपूरथला के 197 गांवों को खाली करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। यह आदेश भाखड़ा डैम से सतलुज दरिया में एक लाख 89 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के मद्देनजर दिया गया है।
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सतलुज दरिया में भाखड़ा डैम से छोड़े गए पानी और भारी वर्षा के कारण स्वां नदी ने श्री आनंदपुर साहिब के दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। गांव निक्कूवाल, महंदली कलां, बुर्ज, चंदपुर बेला, बल्लोवाल, गज्जपुर, हरीवाल आदि का संपर्क दुनिया से टूट गया। यहां बचाव में एनडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं। वहीं हिमाचल में भारी बरसात के बाद पठानकोट में चक्की दरिया पूरे उफान पर है। रविवार सुबह तड़के चक्की दरिया किनारे वाली भदरोया रोड का 300 मीटर हिस्सा दरिया में समा गया। सड़क किनारे लगे बिजली के 2 टावर भी धराशायी हो गए।
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1988 के बाद पहली बार इतना ज्यादा पानी
बीबीएमबी के चेयरमैन अभियंता दविंदर शर्मा ने कहा है कि भाखड़ा डैम के पीछे बनी विशाल गोबिंद सागर झील में पिछले 24 घंटों के दौरान हमारे अनुमान से दो गुना पानी आया है। शर्मा ने कहा कि बीते 24 घंटों के दौरान झील में 3 लाख 11 हजार 134 क्यूसेक पानी आया जिसके चलते भाखड़ा डैम का जलस्तर 1679 फुट के पार चला गया है। उन्होंने कहा कि 1988 के बाद यह पहली बार हुआ है कि इतनी भारी मात्रा में पानी आया है। पंजाब में बारिश रुकने पर भाखड़ा डैम से छोड़े जाने वाले पानी की रफ्तार गको और बढ़ाया जा सकता है।  
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पाकिस्तान को नहीं छोड़ा पानी
रणजीत सागर बांध (आरएसडी) की झील से माधोपुर हेड वर्क्स के जरिये पाकिस्तान की ओर पानी नहीं छोड़ा गया। नतीजतन झील का जलस्तर खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। रविवार शाम 5 बजे तक झील का जलस्तर 521.80 मीटर पहुंच गया था। अगर ऐसे ही हालात रहे तो सोमवार को फ्लड गेट खोलने पड़ेंगे। आरएसडी के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर नरेश महाजन ने बताया कि चमेरा बांध प्रशासन ने 3 फ्लड गेट खोल रखे हैं। जिसके चलते हर घंटे आरएसडी झील में 80 हजार क्यूसेक पानी जमा हो रहा है।

दरिया में समाई सड़क, बिजली के टावर भी धराशायी

हिमाचल में भारी बरसात के बाद चक्की दरिया पूरे उफान पर है। रविवार सुबह तड़के पठानकोट में चक्की दरिया किनारे वाली भदरोया रोड का 300 मीटर हिस्सा दरिया में समा गया, वहीं सड़क के किनारे लगे बिजली के बड़े-बड़े 2 टावर भी तिनकों के समान धराशायी हो गए। टावरों के तार पठानकोट-जम्मू नेशनल हाइवे पर बिखर गए। तड़के 4 बजे के करीब ट्रैफिक कम होने के चलते कोई इनकी चपेट में नहीं आया। पठानकोट-जालंधर हाइवे भी अवरुद्ध हो गया। हाइवे पर हाई वोल्टेज तार के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी लंबी कतारें लग गईं।

सूचना पाकर पहुंचे बिजली विभाग के कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद हाइवे से तार हटाए मार्ग बहाल किया। पठानकोट में शनिवार पूरी रात बारिश के बाद रविवार को धूप खिली। वहीं हिमाचल में बरसात का कहर बदस्तूर जारी है। चक्की दरिया के बढ़े जलस्तर के कारण लोग सहमे हैं। ढांगू पीर, मामून, भदरोया, बेदी बजरी कंपनी सहित हिमाचल और पंजाब में पड़ते 20 मोहल्लों के लोग बढ़ते जलस्तर से डरे हैं और पलायन की सोच रहे हैं। वहीं डीसी रामबीर का कहना है कि शनिवार को ही संभावित गांवों के डेरों को खाली करवा दिया गया था, अब स्थिति सामान्य होने को है। चक्की दरिया के बढ़े जलस्तर की रिपोर्ट भिजवा दी गई है, जल्द ही सड़क की समस्या का हल करवाया जाएगा।

सतुलज दरिया खतरे के निशान से पार
रोपड़ से आ रहे लगातार पानी के कारण सतलुज दरिया रविवार को खतरे के निशान को पार कर गया। हालात यह हैं कि कई जगह पर पानी दरिया के किनारों को छूने लगा है। शनिवार को भाखड़ा से सतलुज में पानी छोड़ा गया था। शाम तक दरिया में 81 हजार क्यूसेक पानी बह रहा था। हालांकि ड्रेनेज विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि लगभग 20 दिन पहले इस दरिया में 58 हजार क्यूसेक पानी बह चुका है इसलिए खतरे की कोई बात नहीं है। रविवार को दरिया का रौद्र रूप बढ़ता जा रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण बताया जा रहा है कि भाखड़ा से 55 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था लेकिन रोपड़ हेड के ऊपर सिरसा और स्वां नदियां पड़ती है। जिस एरिया से यह नदियां गुजरती हैं वहां पर मूसलाधार बारिश हो रही है। नदियों से पानी सीधे रोपड़ हेड पर पहुंच रहा है। इन दोनों नदियों से लगभग 1.50 लाख क्यूसेक पानी पहुंचा है इसलिए रोपड़ हेड से और पानी सतलुज में छोड़ा जा रहा है। 

रोपड़ हैडवर्कस से छोड़ा जा रहा है 2,40,930 क्यूसिक पानी

रोपड़ हैडवर्कस से 2,40,930 क्यूसिक पानी छोड़े जाने के कारण डीसी चंद्र गैंद ने फिरोजपुर और जीरा तहसील से संबंधित एसडीएम को निर्देश जारी किए हैं कि वह इन तहसीलों से संबंधित निचले और संवेदनशील गांव में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं। एसडीएम को जिन गांव को खाली करवाने का निर्देश मिला है, उनमें 38 गांव फिरोजपुर तहसील और 20 गांव जीरा तहसील से संबंधित हैं। अतिसंवेदनशील गांवों का डीसी और एसएसपी फिरोजपुर विवेक एस. सोनी ने पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के साथ दौरा किया। अधिकारियों को इन क्षेत्रों पर खास फोकस रखने के लिए कहा गया है।

इन गांवों में मन्नो माछी, गट्टा दलेल, जमाली वाला, चक मन्नो माछी, गट्टा बादशाह, गत्ती हरिके,फेटेवाला, घुरम, वर काली रौन, अरेजा साबरा, कमलवाला, फतेहगढ़ सबरां, अशीए के, तन्ना बग्गा, हमदवाला, कमला मिद्दू, दूला सिंहवाला, मस्तेके, गुरदिती वाला, कालेके हिथार, रुकनेवाला, गत्ती चक जदीद, कमलवाला, तल्ली गुलाम, पल्ला मेघा, जम्मा मेघा गट्टी मटर, डोना मटर, कुतबद्दीनवाला, डोना राजा दीनानाथ, मेहमूद के मल हिथार, ठेठ घारा, बंडाला, अक्कूवाला, बाला मेघा, कालूवाला, गट्टी रहिमके, लंगियाना, डोना तेलु मल, गंदू किल्चा, दोना रहमत वाला, निहाले वाला, लमोचर, भांबा सिंह वाला, वीरां, निहाले वाला, हबीब के, अली औलख और गंदू किलचा शामिल हैं।

डीसी ने कहा कि सतलुज दरिया में पानी का जलस्तर बढ़ने के कारण रविवार-सोमवार रात 3 बज कर 40 मिनट पर पानी पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि हरीके में मौजूदा डाउनस्ट्रीम में मौजूदा जलस्तर 70,000 क्यूसिक है, जो देर रात तक डेढ़ लाख तक पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने सभी एसडीएम, नहरी व सिंचाई विभाग के अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं।

डीसी ने कहा कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जल्द से जल्द राहत केंद्रों तक पहुंचाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। अधिकारियों की एक बैठक में बताया कि जानवरों के राशन के लिए सूखे चारे का इंतजाम कर लिया गया है और अगर जरूरत पड़ी तो मंडियों को राहत केंद्रों में तबदील किया जाएगा। उन्होंने सेहत विभाग के अधिकारियों को अपनी टीमें तैयार रखने और पावरकॉम को राहत केंद्रों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए।

डीसी ने बताया कि जिला प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है और फौज, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की तरफ से सतलुज के जलस्तर और बाढ़ से संबंधित स्थिति पर निगरानी के लिए 24 घंटे काम करने वाला एक फ्लड कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इस कंट्रोल रूम में 24 घंटे मुलाजिम अलग-अलग शिफ्टों में ड्यूटी कर रहे हैं और सतलुज के जलस्तर को लेकर लगातार रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

श्री आनंदपुर साहिब के पास के गांवों में भरा पानी, एनडीआरएफ ने कमान संभाली

सतलुज दरिया में भाखड़ा डैम से छोड़े गए पानी और भारी वर्षा के कारण स्वां नदी ने श्री आनंदपुर साहिब के दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। गांव निक्कूवाल, महन्दली कलां, बुर्ज, चन्दपुर बेला, बल्लोवाल, गज्जपुर, हरीवाल आदि का संपर्क बाहरी दुनिया से टूट गया। बचाव में एनडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं। ब्लाक नूरपुरबेदी के गांव बस्सी गज्जपुर में सुरजीत सिंह, अजमेर सिंह और बचिंत सिंह के घर पानी में घिर गए हैं। प्रशासन की तरफ से इन परिवारों को बाहर निकालने के लिए कोशिशें की जा रही हैं।

जानकारी के अनुसार पानी में घिरे गांव गज्जपुर में एक महिला को एक सांप ने काट लिया, जिसे एनडीआरएफ ने भाई भैता जी सिविल अस्पताल पहुंचाया। वहीं गांव लोदीपुर में एक व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ गया। दोनों की हालत अब ठीक है। गांव दसगराईं की धोलां बस्ती में भी कई घरों में पानी घुस गया है। गांव घराट में पानी भरने के बाद शनिवार देर रात से ही लोग अपने घरों में फंस गए। पानी बढ़ता देख लोगों ने सारी रात छतों पर गुजारी। सुबह आठ बजे के बाद एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया जिसके बाद गांव से 150 लोगों को बाहर निकाला गया।

पानी में घिरे गांव बुर्ज के निवासी सरबजीत सिंह, गुरमेल सिंह, पूर्व सरपंच जसविन्दर कौर, शेर सिंह, हरीवाल से जनरल सिंह, निर्मल सिंह, रघुबीर सिंह, निक्कूवाल से भुपिन्दर सिंह, जनरल सिंह सरपंच, भजन सिंह ने कहा कि पानी ने 1988 में आई बाढ़ याद करवा दी। लोगों ने मांग की कि दरिया और स्वां नदी का जल्द से जल्द नहरीकरण किया जाए और उन्हें फसलों व घरेलू सामान का मुआवजा दिया जाए।

नाराज लोगों ने लगाया मुख्य सड़क पर जाम
बाढ़ का पानी घुस जाने से दुखी कई गांवों के लोगों ने सुबह श्री आनंदपुर साहिब-श्री कीरतपुर साहिब मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। गांव घट्टीवाल के पास जाम लगाए बैठे लोगों ने बताया कि घरों में 4-4 फुट तक पानी आ गया है। खाने को कुछ भी नहीं, अगर हम जाम ना लगाएं तो ओर क्या करें। सूचना मिलते ही लिया। सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज समरजीत सिंह मौके पर आए और प्रशासन के साथ बात करवाने का वादा करके ग्रामीणों को समझाकर जाम खुलवाया।
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