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सलामः प्रो कबड्डी लीग में एकरिंग करने वाली पहली लड़की बनीं आंचल, लगाया ग्लैमर का तड़का
Mon, 24 Dec 2018 03:33 PM IST
खुशबू गोयल
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 24 Dec 2018 03:33 PM IST
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एंकर आंचल
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चंडीगढ़ की आंचल बाजवा इन दिनों प्रो- कबड्डी लीग में एंकरिंग करने वाली पहली लड़की बन गई हैं। इनकी वजह से लीग में ग्लैमर कर तड़का लगा है। क्योंकि उनकी एंकरिंग का स्टाइल भी सबसे अलग है। मैचों के दौरान वह न केवल स्कोरिंग समय समय पर बताती हैं, बल्कि टाइम आउट के दौरान खिलाड़ियों के बारे में विस्तार से ऑडियंस को बताने की कला में भी माहिर हैं।
नेशनल चाइल्ड और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के पुरस्कार के साथ-साथ पंजाब सरकार से पुरस्कार जीतने वाली आंचल का सफर प्रो कबड्डी लीग तक पहुंचने का सफर काफी कठिन रहा। आंचल ने हार नहीं मानी और आज इस मुकाम तक पहुंच कर दिखा दिया। उनकी कामयाबी के पीछे आंचल की मां डॉ. निक्की बाजवा का काफी बड़ा हाथ है। जिन्होंने अपने पति को खोने के बाद अपनी बेटी का आगे बढ़ने के लिए हमेशा से प्रेरित किया।
इसी हफ्ते पंचकूला में प्री कबड्डी लीग का आयोजन किया गया। अभिषेक बच्चन की जयपुर पिंक पैंथर्स ने पंचकूला को होम ग्राउंड बनाया था। यहां पर लीग के कई मुकाबले हुए। इनमें आंचल बाजवा ने एकरिंग का जिम्मा बखूबी संभाला। अपने अंदाज में बेहतरीन परफॉर्मेंस देते हुए वह वहां उपस्थित दर्शकों की चहेती भी बनीं। एक्सपर्टस का मानना है कि उनकी एंकरिंग करने का स्टाइल औरों से जुदा है। इसकी वजह से ही आंचल आज इतने बड़े प्लेटफॉर्म तक पहुंची हैं।
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नेशनल चाइल्ड और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के पुरस्कार के साथ-साथ पंजाब सरकार से पुरस्कार जीतने वाली आंचल का सफर प्रो कबड्डी लीग तक पहुंचने का सफर काफी कठिन रहा। आंचल ने हार नहीं मानी और आज इस मुकाम तक पहुंच कर दिखा दिया। उनकी कामयाबी के पीछे आंचल की मां डॉ. निक्की बाजवा का काफी बड़ा हाथ है। जिन्होंने अपने पति को खोने के बाद अपनी बेटी का आगे बढ़ने के लिए हमेशा से प्रेरित किया।
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इसी हफ्ते पंचकूला में प्री कबड्डी लीग का आयोजन किया गया। अभिषेक बच्चन की जयपुर पिंक पैंथर्स ने पंचकूला को होम ग्राउंड बनाया था। यहां पर लीग के कई मुकाबले हुए। इनमें आंचल बाजवा ने एकरिंग का जिम्मा बखूबी संभाला। अपने अंदाज में बेहतरीन परफॉर्मेंस देते हुए वह वहां उपस्थित दर्शकों की चहेती भी बनीं। एक्सपर्टस का मानना है कि उनकी एंकरिंग करने का स्टाइल औरों से जुदा है। इसकी वजह से ही आंचल आज इतने बड़े प्लेटफॉर्म तक पहुंची हैं।
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6 वर्ष की आयु में पिता का साथ छूटा
आंचल के पिता इंडियन नेवी में थे और जब वह 6 वर्ष की थी तो उनका निधन हो गया था। उनकी माता ने ही उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के प्रेरित किया। आंचल ने इंजीनियरिंग की हैं। 12वीं में पूरे ट्राइसिटी में टॉप रही थीं। आंचल को 2007-08 में नेशनल चाइल्ड और स्टूडेंट ऑफ द ईयर का पुरस्कार भी मिल चुका है। आंचल की काबिलियत यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि उन्हें दो बार पंजाब सरकार से गणतंत्र दिवस पर सम्मान भी मिल चुका है।
300 से ज्यादा है मेडल
आंचल स्कूल में स्पोर्ट्स में भी आगे रही हैं। एथलेक्टिस से लेकर स्वीमिंग हर खेल में आंचल ने मेडल जीते हैं। इस समय आंचल के मेडलों की संख्या 300 से ज्यादा है और 100 के करीब ट्राफियां तथा 1000 सर्टिफिकेट भी हैं।
300 से ज्यादा है मेडल
आंचल स्कूल में स्पोर्ट्स में भी आगे रही हैं। एथलेक्टिस से लेकर स्वीमिंग हर खेल में आंचल ने मेडल जीते हैं। इस समय आंचल के मेडलों की संख्या 300 से ज्यादा है और 100 के करीब ट्राफियां तथा 1000 सर्टिफिकेट भी हैं।