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चंडीगढ़ में कोरोना का एक साल : थम सी गई थी जिंदगी, कोरोना योद्धा न थके न हारे

Thu, 18 Mar 2021 03:51 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 18 Mar 2021 03:51 PM IST
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First corona patient was found Last year on 18 march in Chandigarh
कोरोना के फैलाव के बावजूद लोग बिना मास्क के घूम रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ में कोरोना महामारी को फैले पूरा एक साल हो गया है। पिछले वर्ष 18 मार्च के ही दिन ही चंडीगढ़ में पहले मरीज में वायरस की पुष्टि हुई थी। इस वायरस ने ऐसी दहशत फैलाई कि लोगों को न चाहते हुए भी अपनों तक से अलग होना पड़ा। वहीं, इस नाजुक वक्त में कुछ ऐसे योद्धा भी थे, जो अपने और परिवार की चिंता किए बिना दिन-रात शहरवासियों और मरीजों की सेवा में जुटे रहे।
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जान की बाजी लगाकर लोगों तक मदद पहुंचाई और संक्रमित मरीजों की देखभाल की। इनमें डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी से लेकर पुलिसकर्मी तक शामिल रहे। इन्हें कोरोना योद्धा की उपाधि दी गई। इन कोरोना योद्धाओं की ही बदौलत हमने महामारी से डटकर मुकाबला किया और बड़ी संख्या में संक्रमित लोगों को नई जिंदगी मिली। और आज जब एक बार फिर कोरोना ने पांव पसारना शुरू कर दिया है तो एकबार फिर इन्हीं कोरोना योद्धाओं से शहर को आस है।  
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First corona patient was found Last year on 18 march in Chandigarh
जश्नदीप कौर और डॉ. गुरु। - फोटो : फाइल फोटो
रेडक्रॉस के कर्मचारियों ने हाथ खड़े किए तो युवाओं ने किया अंतिम संस्कार
कोरोना महामारी के दौरान रेडक्रॉस के कर्मचारियों ने जब कोरोना मृतकों के शव को उठाने से मना कर दिया था, तब स्वरमनी फाउंडेशन की युवा टीम आगे आई और जरूरी सुरक्षा प्रबंधों को अपनाकर कोरोना मृतकों को कंधा दिया। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार हो सका। जांबाज युवाओं की इस टीम में मुल्लापुर के मस्तगांव की युवती जशनदीप कौर भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने टीम के लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर महामारी के दौर में काम किया। स्वरमनी फाउंडेशन की टीम एक फोन कॉल पर मौके पर पहुंचती थी और कोरोना मृतकों के अंतिम संस्कार में जुट जाती थी। इस टीम ने 25 से ज्यादा कोरोना मृतकों का अंतिम संस्कार किया। 

14 माह से बिना छुट्टी ड्यूटी कर रहे पीजीआई के डॉक्टर गुरु, महानायक ने किया सम्मानित 
पीजीआई के डॉक्टर गुरु पिछले साल जनवरी में छुट्टी पर गए थे। उसके बाद से वह 14 माह से बिना छुट्टी लिए कोविड वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं। ओडिशा निवासी डॉ. गुरु ने बताया कि जुलाई 2019 में उन्हें पीजीआई में नियुक्ति मिली थी। घर से कोई आया नहीं था। घर पर अकेले होने के कारण उन्होंने साप्ताहिक छुट्टी नहीं ली। वहीं, जब कोरोना फैला तो उनकी ड्यूटी कोविड वार्ड में लगाई गई। इसके बाद से वह लगातार मरीजों के बीच काम करते रहे। हालांकि महामारी के बीच थोड़ी तबीयत खराब हुई लेकिन आराम करने की जगह वह दवा खाकर शाम के समय पीजीआई आ जाते थे। उनके इस समर्पण के लिए महानायक अमिताभ बच्चन ने भी उन्हें सम्मानित किया।
 

First corona patient was found Last year on 18 march in Chandigarh
रामबीर और विकास - फोटो : फाइल फोटो
बिना किसी प्रशिक्षण, महामारी में घरों से उठाया कूड़ा
नगर निगम के एमओएच विभाग में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत विकास कुमार का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान क्वारंटीन किए गए लोगों के घरों से कूड़ा उठाने की बड़ी चुनौती सफाईकर्मियों के ऊपर थी। यह ऐसा काम था, जिसके लिए हमें कभी प्रशिक्षण नहीं मिला था और खतरा भी ज्यादा था। हमारी 20 लोगों की टीम थी, हम लोगों के घरों से कूड़ा उठाते थे। उसके बाद उन घरों में रहने वाले लोगों से फोन के माध्यम से फीडबैक लेते थे ताकि हमारे काम में अगर कोई कमी हो तो उसे सुधारा जा सके। हमारे काम से खुश होकर लोग ठीक होने के बाद हमें फोन कर धन्यवाद भी देते थे। इससे काफी सुकून मिलता था।

दोस्तों संग मिलकर सिपाही रामबीर सिंह ने भूखों के लिए जुटाया खाना 
आईटी पार्क में कार्यरत सिपाही रामबीर सिंह कोरोना महामारी के दौरान सेक्टर-22 पुलिस चौकी में तैनात थे। रामबीर ने ड्यूटी के दौरान देखा कि काफी लोग ऐसे हैं जो लॉकडाउन के कारण भूखे रह जाते हैं। रामबीर ने अपने पांच दोस्तों के साथ मिलकर योजना बनाई कि प्रतिदिन घरों से 20 रोटियां बनवाएंगे और 100 रोटी जरूरतमंद लोगों में बांटेंगे। लगभग 33 दिनों तक यह क्रम चला। रामबीर ने कहा कि इस दौरान कई ऐसे लोग भी थे जो किसी कारण से यहां फंस गए थे और सड़कों पर गुजर बसर कर रहे थे। हमारा उद्देश्य था कि इस महामारी में कोई भूखा न रहे। इसमें हम सफल भी रहे।
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