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चंडीगढ़ में कचरे के पहाड़ में सुलगती रही आग
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चंडीगढ़। डंपिंग ग्राउंड स्थित कचरे के पहाड़ पर लगी आग सोमवार को भी सुलगती रही। इस कारण शहर से निकलने वाले कचरे को उठाकर गाड़ियां सीधे कचरा निस्तारण प्लांट पहुंचीं। यहां एक-एक कर गाड़ियां कचरा निस्तारण प्लांट के अंदर जाती गईं और कचरा फेंक कर वापस निकलती रहीं। धुएं के कारण लोगों को सड़क पर कम दिखाई दे रहा है। धुएं की वजह से आसपास के लोग काफी परेशान हैं।
डंपिंग ग्राउंड में रविवार दोपहर आग लग गई थी। इसके बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौकेपर पहुंचीं और आग बुझाने में लग गई। लगभग 24 घंटे तक गाड़ियां लगातार चक्कर लगाती रहीं। इस दौरान 2 फायर टेंडर और 2 वाटर बाउजर से लगभग 80 से ज्यादा चक्कर डंपिंग ग्राउंड के लगाए जा चुके हैं। आग धधकने के कारण शहर से कचरा लेकर गाड़ियों को कचरा निस्तारण प्लांट में कचरा डालने को कहा गया। इस दौरान डंपिंग ग्राउंड पर कचरा बीनने वाले भी प्लांट के अंदर पहुंच गए।
एक और पहाड़ प्लांट में हो जाएगा तैयार
प्लांट में इस समय कचरे का निस्तारण लगभग न के बराबर हो रहा है। इसके अलावा वहां पहले से 25 हजार टन कचरे का ढेर लगा हुआ है। एक दिन में शहर से लगभग 500 टन कचरा निकलता है। सुबह जब गाड़ियां प्लांट में कचरा डालने पहुंचीं तो देखा कि पहले से कचरे का एक पहाड़ बना है। गाड़ियों ने उसके बगल से ही कचरा डालना शुरू कर दिया। ऐसे ही डंपिंग ग्राउंड में आग लगती रही तो एक और कचरे का पहाड़ प्लांट में तैयार हो जाएगा।
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सवाल बरकरार.. आग लगी या लगाई गई
डंपिंग ग्राउंड में लगी आग के बाद एक और सवाल लोगों के मन में उठने लगा है। कहीं कचरे के पहाड़ को छोटा करने के लिए आग तो नहीं लगाई गई, क्योंकि जितनी भी बार डंपिंग ग्राउंड में आग लगी है कारणों का पता नहीं चल पाया है। आग भी इस तरह से लगी थी कि कचरे के पहाड़ की ऊंचाई को कम करने का प्रयास किया जा रहा हो। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि आग जानबूझकर लगाई गई है।
गाड़ियों की लग गई लंबी कतार
अचानक से बदली व्यवस्था से प्लांट के बाहर कचरा उठाने वाली गाड़ियों की लंबी कतार लग गई। एक ओर धुएं के कारण लोगों को सड़क पर कम दिख रहा था, वहीं दूसरी ओर गाड़ियों की लंबी कतार देखकर लोग और घबरा जा रहे थे। इस दौरान लगभग एक किमी तक गाड़ियों की लंबी कतार लगी रही।
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डंपिंग ग्राउंड में रविवार दोपहर आग लग गई थी। इसके बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौकेपर पहुंचीं और आग बुझाने में लग गई। लगभग 24 घंटे तक गाड़ियां लगातार चक्कर लगाती रहीं। इस दौरान 2 फायर टेंडर और 2 वाटर बाउजर से लगभग 80 से ज्यादा चक्कर डंपिंग ग्राउंड के लगाए जा चुके हैं। आग धधकने के कारण शहर से कचरा लेकर गाड़ियों को कचरा निस्तारण प्लांट में कचरा डालने को कहा गया। इस दौरान डंपिंग ग्राउंड पर कचरा बीनने वाले भी प्लांट के अंदर पहुंच गए।
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एक और पहाड़ प्लांट में हो जाएगा तैयार
प्लांट में इस समय कचरे का निस्तारण लगभग न के बराबर हो रहा है। इसके अलावा वहां पहले से 25 हजार टन कचरे का ढेर लगा हुआ है। एक दिन में शहर से लगभग 500 टन कचरा निकलता है। सुबह जब गाड़ियां प्लांट में कचरा डालने पहुंचीं तो देखा कि पहले से कचरे का एक पहाड़ बना है। गाड़ियों ने उसके बगल से ही कचरा डालना शुरू कर दिया। ऐसे ही डंपिंग ग्राउंड में आग लगती रही तो एक और कचरे का पहाड़ प्लांट में तैयार हो जाएगा।
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सवाल बरकरार.. आग लगी या लगाई गई
डंपिंग ग्राउंड में लगी आग के बाद एक और सवाल लोगों के मन में उठने लगा है। कहीं कचरे के पहाड़ को छोटा करने के लिए आग तो नहीं लगाई गई, क्योंकि जितनी भी बार डंपिंग ग्राउंड में आग लगी है कारणों का पता नहीं चल पाया है। आग भी इस तरह से लगी थी कि कचरे के पहाड़ की ऊंचाई को कम करने का प्रयास किया जा रहा हो। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि आग जानबूझकर लगाई गई है।
गाड़ियों की लग गई लंबी कतार
अचानक से बदली व्यवस्था से प्लांट के बाहर कचरा उठाने वाली गाड़ियों की लंबी कतार लग गई। एक ओर धुएं के कारण लोगों को सड़क पर कम दिख रहा था, वहीं दूसरी ओर गाड़ियों की लंबी कतार देखकर लोग और घबरा जा रहे थे। इस दौरान लगभग एक किमी तक गाड़ियों की लंबी कतार लगी रही।