Punjab: 312 मेडिकल अफसरों की भर्ती में धांधली, PPSC के पूर्व अध्यक्ष व 5 सदस्यों पर केस, पूर्व विधायक गिरफ्तार
मंगलवार को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि यह मुकदमा विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया है।
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मेरिट को नजरअंदाज कर रसूखदारों को बतौर मेडिकल अफसर भर्ती करने के आरोप में पंजाब लोक सेवा आयोग(पीपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष और तत्कालीन पांच सदस्यों पर विजिलेंस ने केस दर्ज किया है। इस मामले में पीसीएससी के तत्कालीन सदस्य एवं पूर्व विधायक डॉ. सतवंत सिंह मोही को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आरोपियों में से दो की मौत हो चुकी है जबकि अन्य की गिरफ्तारी के लिए विजिलेंस जगह-जगह छापे मार रही है। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित की गई एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस ने केस दर्ज किया है। एसआईटी की जांच में आरोपियों के खिलाफ पैसे लेकर भर्ती करने के भी सबूत मिले हैं।
साल 2008-09 में अकाली-भाजपा सरकार के दौरान हुई 312 मेडिकल अफसरों की भर्ती में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। पीसीएससी ने इस दौरान 100 और 212 मेडिकल अफसरों की दो चरणों में भर्ती की गई। आरोप है कि पात्र उम्मीदवारों को नजर अंदाज कर कई लोगों को उनकी योग्यता से ज्यादा अंकर देकर नियमों के विपरीत बतौर मेडिकल अफसर भर्ती कर लिया गया। चेहेतों को लाभ देने के लिए भर्ती प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया।
विजिलेंस ने अब पीसीएससी के तत्कालीन चेयरमैन एसके सिन्हा, सदस्य रहे ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डीएस ग्रेवाल, डॉ. सतवंत सिंह मोही, डीएस माहल, पूर्व मंत्री लाल सिंह की बहू रविंदर कौर और भाजपा नेता रहे अनिल सरीन के खिलाफ केस दर्ज कर दिया है। इनमें एसके सिन्हा एवं डीएस ग्रेवाल की मृत्यु हो चुकी है। पीसीसी के तत्कालीन सदस्य एवं पूर्व विधायक सतवंत सिंह मोही को विजिलेंस ने मंगलवार को पटियाला जिले के शुतराणा हलके से गिरफ्तार कर लिया। अन्य की तलाश जारी है।
हाईकोर्ट ने 2013 में दिया था एसआईटी बनाने का आदेश
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 22 नवंबर 2013 को 312 मेडिकल अफसरों की भर्ती में अनियमितताओं के आरोप की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। सीबीआई के तत्कालीन संयुक्त कमिश्नर एमएस बाली और तत्कालीन डीजीपी विजिलेंस सुरेश अरोड़ा की दो सदस्यीय एसआईटी ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में इस भर्ती में बड़े स्तर पर अनियमितताओं और धांधली का खुलासा हुआ। इसी रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस ने अब पटियाला में पीपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन व पांच सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
रसूखदारों के बच्चों को बना दिया मेडिकल अफसर
सूत्रों के अनुसार जांच में सामने आया है कि मेरिट को दरकिनार कर रसूखदारों के बच्चों को मेडिकल अफसर भर्ती किया गया। मिलीभगत से नियमों को बदलकर 27 अभ्यर्थियों को 80-98 प्रतिशत तक अंक दे दिए गए। पीपीएससी के कुछ सदस्य इंटरव्यू से पहले तक अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से फोन पर बात करते रहे। फोन रिकॉर्ड से भी इसकी पुष्टि हुई है। इसमें पीपीएससी के तत्कालीन सदस्य एवं पूर्व विधायक मोही की भूमिका सामने आई है।