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मुख्यमंत्री बनते ही कैप्टन को करना होगा सबसे पहले ये काम, नहीं तो दिक्कत आएगी
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 17 Mar 2017 09:18 AM IST
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Captain Amarinder Singh
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री तो बन गए हैं कैप्टन अमरिंदर सिंह, लेकिन उनकी राह आसान नहीं है। कई चुनौतियां सामने खड़ी हैं और सबसे पहले उन्हें एक बड़ा काम करना होगा। कैप्टन अमरिंदर सिंह वीरवार को राजभवन में सादे समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। सादा और कम खर्चीला समारोह कराने का फैसला खुद कैप्टन ने ही लिया, जिसके लिए उनका कहना है कि पंजाब की बदहाल वित्तीय हालत को देखते हुए मात्र दिखावे पर बेतहाशा खर्च करना सही नहीं होगा।
कैप्टन ने अपनी पार्टी के सभी विधायकों से भी महंगे जश्न नहीं आयोजित करने को कहा है। दरअसल कैप्टन प्रदेश की वित्तीय हालत से पूरी तरह वाकिफ हैं और सत्ता संभालते ही उनके सामने करीब सवा लाख करोड़ का कर्ज खड़ा है, जिसे चुकाना तो दूर, ब्याज देने में ही भारी भरकम राशि हर साल जा रही है। ऐसे हालात में कैप्टन ने आरंभ से ही हाथ खींचकर चलने का फैसला ले लिया है।
कुर्सी संभालने के बाद कैप्टन के सामने जहां बेरोजगारी, नशा कारोबार, किसानों के कर्ज, बिजली सब्सिडी, कर्मचारियों को वेतन आयोग के अनुसार अदायगी, वैट, एक्साइज व स्टांप ड्यूटी में घटती वसूली के गंभीर मुद्दे हैं, वहीं उन्हें अपनी सरकार को लोकप्रिय बनाने के लिए लोगों को करों में राहत भी देनी होगी। प्रदेश के पिछले बजट में करीब 1.25 लाख करोड़ का कर्ज दिखाया गया था, जो बीते कई सालों से लगातार बढ़ता आ रहा है। इसके परिणामस्वरूप सरकार के खजाने से हर साल एक बड़ी रकम कर्ज का ब्याज चुकाने में जा रही है।
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कैप्टन ने अपनी पार्टी के सभी विधायकों से भी महंगे जश्न नहीं आयोजित करने को कहा है। दरअसल कैप्टन प्रदेश की वित्तीय हालत से पूरी तरह वाकिफ हैं और सत्ता संभालते ही उनके सामने करीब सवा लाख करोड़ का कर्ज खड़ा है, जिसे चुकाना तो दूर, ब्याज देने में ही भारी भरकम राशि हर साल जा रही है। ऐसे हालात में कैप्टन ने आरंभ से ही हाथ खींचकर चलने का फैसला ले लिया है।
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कुर्सी संभालने के बाद कैप्टन के सामने जहां बेरोजगारी, नशा कारोबार, किसानों के कर्ज, बिजली सब्सिडी, कर्मचारियों को वेतन आयोग के अनुसार अदायगी, वैट, एक्साइज व स्टांप ड्यूटी में घटती वसूली के गंभीर मुद्दे हैं, वहीं उन्हें अपनी सरकार को लोकप्रिय बनाने के लिए लोगों को करों में राहत भी देनी होगी। प्रदेश के पिछले बजट में करीब 1.25 लाख करोड़ का कर्ज दिखाया गया था, जो बीते कई सालों से लगातार बढ़ता आ रहा है। इसके परिणामस्वरूप सरकार के खजाने से हर साल एक बड़ी रकम कर्ज का ब्याज चुकाने में जा रही है।
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शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार कर्ज लेती रही
Captain Amarinder Singh
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, बीते दस साल में शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार के दौरान लगातार कर्ज लिया जाता रहा है। वर्ष 2008-09 में राज्य का कर्ज करीब 12500 करोड़ था और उसके बाद से यह साल दर साल बढ़ता गया। यही कारण है कि पंजाब का सकल घरेलू राज्य उत्पाद (जीएसडीपी) भी 31.4 फीसदी के ऊंचे स्तर पर राज्य के बुरी तरह कर्ज में डूबे होने के संकेत दे रहा है।
हालांकि, गठबंधन सरकार राज्य में प्रति व्यक्ति आय में इजाफे का दावा करती रही है, जिसके अनुसार वर्ष 2014-15 में पंजाब की प्रति व्यक्ति आय 96638 रुपये थी, लेकिन इसमें इजाफे की दर 5 फीसदी ही आंकी गई है और 2015-16 में यह दर 101498 रुपये है। इसके बावजूद सूबे में आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयां लगातार बनी हुई हैं।
कृषि : पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बीते नौ सालों में पंजाब में कृषि विकास में गिरावट दर्ज की जा रही है। वर्ष 2005-06 में 0.95 फीसदी की कृषि विकास दर 2014-15 में -3.4 फीसदी पर पहुंच गई है। इससे खेतीबाड़ी से जुड़ी सूबे की बड़ी आबादी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कृषि जोत का एरिया भी 3.9 हैक्टेयर से घटकर 3.7 हैक्टेयर रह गया है। युवा वर्ग अब खेती से मुंह मोड़ रहा है। किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में भी लगातार इजाफा हुआ है।
बेरोजगारी : आंकड़ों के अनुसार पंजाब देश में ऐसा आठवां राज्य है, जहां ग्रामीण युवा बेरोजगारों की तादाद सबसे ज्यादा है। हालात यह हैं कि सूबे में 18-29 वर्ष उम्र वर्ग के औसतन 16.6 फीसदी बेरोजगार हैं, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह आंकड़ा 10.2 फीसदी है।
उद्योग : मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2007 से 2014 के बीच राज्य में 18770 उद्योग बंद हो गए। पंजाब प्रदेश कांग्रेस की कमेटी की ओर से जारी आंकड़ों में भी कहा गया है कि अमृतसर में 8053 उद्योग बंद हुए और कोई नया उद्योग स्थापित नहीं हो सका।
हालांकि, गठबंधन सरकार राज्य में प्रति व्यक्ति आय में इजाफे का दावा करती रही है, जिसके अनुसार वर्ष 2014-15 में पंजाब की प्रति व्यक्ति आय 96638 रुपये थी, लेकिन इसमें इजाफे की दर 5 फीसदी ही आंकी गई है और 2015-16 में यह दर 101498 रुपये है। इसके बावजूद सूबे में आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयां लगातार बनी हुई हैं।
कृषि : पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बीते नौ सालों में पंजाब में कृषि विकास में गिरावट दर्ज की जा रही है। वर्ष 2005-06 में 0.95 फीसदी की कृषि विकास दर 2014-15 में -3.4 फीसदी पर पहुंच गई है। इससे खेतीबाड़ी से जुड़ी सूबे की बड़ी आबादी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कृषि जोत का एरिया भी 3.9 हैक्टेयर से घटकर 3.7 हैक्टेयर रह गया है। युवा वर्ग अब खेती से मुंह मोड़ रहा है। किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में भी लगातार इजाफा हुआ है।
बेरोजगारी : आंकड़ों के अनुसार पंजाब देश में ऐसा आठवां राज्य है, जहां ग्रामीण युवा बेरोजगारों की तादाद सबसे ज्यादा है। हालात यह हैं कि सूबे में 18-29 वर्ष उम्र वर्ग के औसतन 16.6 फीसदी बेरोजगार हैं, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह आंकड़ा 10.2 फीसदी है।
उद्योग : मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2007 से 2014 के बीच राज्य में 18770 उद्योग बंद हो गए। पंजाब प्रदेश कांग्रेस की कमेटी की ओर से जारी आंकड़ों में भी कहा गया है कि अमृतसर में 8053 उद्योग बंद हुए और कोई नया उद्योग स्थापित नहीं हो सका।