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जिस फसल से जोखिम में जान, उसी को बोने में फिर जुटे किसान
भूपेंदर सिंह भाटिया/अमर उजाला, बठिंडा से लौटकर
Updated Thu, 12 May 2016 10:17 AM IST
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खेतों में किसान
- फोटो : amar ujala
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40 वर्षीय किसान जोगिंदर सिंह पहले की तरह अपने खेतों में नरमे की खेती की बिजाई कर रहे हैं। पिछले सीजन में फसल खराब होने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि, नुकसान उठाने वाले अन्य किसानों की तरह गलत कदम उठाने की बजाय जोगिंदर फिर नरमे की खेती में जुट गए हैं। जोगिंदर कहते हैं कि पिछले सीजन में कई किसानों ने कर्ज के कारण आत्महत्या कर ली, उससे गांव के किसानों में दहशत तो है, लेकिन उनके पास कोई चारा नहीं है।
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कोई अन्य पेशा न होने के कारण जोखिम तो उठाना ही होगा। जोगिंदर की तरह पंजाब के कई हिस्सों में किसान नरमे की बिजाई तो कर रहे हैं, लेकिन दहशत के बीच। किसानों का कहना है कि कुछ कृषि अधिकारी बीटी काटन को छोड़ अन्य किस्मों की खेती करने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि दूसरे बीजों पर सफेद मक्खी नहीं लगेगी। इसलिए वह पुराने तर्ज पर ही बिजाई कर रहे हैं, उनकी कोशिश होगी कि बेहतर पेस्टीसाइड डालें।
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जोगिंदर खुद जमींदार है। खेती के लिए उसके पास काफी जमीन है, इसलिए वह जोखिम तो उठे रहे हैं, लेकिन ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान पसोपेश में हैं। गांव झुनरी के किसान वरिंदर सिंह का कहना है कि पिछले सीजन में उसे काफी नुकसान हुआ। कर्ज भी चढ़ा हुआ है, लेकिन परिवार पालने के लिए उसे फिर ठेके पर जमीन लेकर काम करना ही होगा, क्योंकि उसकी अपनी जमीन नहीं है। पिछले जमींदार ने फिलहाल उसे बकाया बाद में अदा करने की मोहलत दी है। इसलिए अब वह एक बार फिर जोखिम उठाकर काम कर रहा है।
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65 हजार करोड़ का ऋण
भाजपा किसान सेल के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं किसान नेता सतवंत सिंह पुनिया कहते हैं कि पंजाब के किसानों पर कुल 65 हजार करोड़ का कर्ज है। पिछले कुछ माह से जिस तरह आत्महत्या का सिलसिला शुरू हुआ है, उसके बाद सरकार को कर्ज की निशानदेही करवा कर जरूरतमंद किसानों को मदद करनी चाहिए। तभी आत्महत्याओं का सिलसिला रुकेगा। क्योंकि संपन्न किसान तो किसी तरह कर्ज की अदायगी कर देगा, लेकिन गरीब और ठेके पर जमीन लेकर खेतीबाड़ी करने वालों के पास कोई और रास्ता नहीं होता। उन्होंने इस संबंध में सरकार को सुझाव दिया है।
सरकार पर टिकीं हैं नजरें
किसानों का कहना है कि सरकार और कृषि विभाग को इस मामले में गंभीरता से सोचना और हस्तक्षेप करना चाहिए। किसानों को क्वालिटी बीज और पेस्टीसाइड उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी संभालनी होगी। यदि फसल खराब होती है तो ऐसे में सरकार सर्वे करवाकर किसानों को मदद करे, ताकि वह कोई गलत कदम न उठाएं।