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फादर्स डे: पिता ने दिखाया तरक्की का रास्ता, हमेशा बढ़ाया मनोबल, इन तीन बच्चों ने छू लिया आसमान

Sun, 20 Jun 2021 12:59 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 20 Jun 2021 12:59 PM IST
सार

हर किसी के पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे आसमान छूएं। आसमान तक पहुंचाने वाला रास्ता पिता ही दिखाते हैं। वह ऐसी सीख देते हैं कि मंजिल पाई जा सके। उन्हीं में से कुछ युवाओं से अमर उजाला ने बात की। उनका कहना है कि असफल होने पर कभी पिता ने डाटा नहीं बल्कि मनोबल बढ़ाया कि कैसे आगे बढ़ा जा सकता है।

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These people share memories related to their father on Fathers Day
गुर सिमरनजीत कौर, सौरभ कंसल, विक्रांत सत्या। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरे पिता विमल कुमार पेशे से इंजीनियर हैं। वह चाहते थे कि मैं डीआरडीओ में वैज्ञानिक बनूं। उसी तरह उन्होंने मुझे शिक्षा दी। वर्ष 2003 में पेक से मैं पासआउट हुआ और डीआरडीओ में इंजीनियर बन गया। पिता खुश थे और मैं भी। मेरी एक बार इच्छा खेल में भविष्य बनाने की थी लेकिन पिता ने मुझे रास्ता दिखाया कि डीआरडीओ में कैसे नौकरी करके देश सेवा की जा सकती है।

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चाचा इसरो में वैज्ञानिक रहे। पढ़ाई के दौरान कई गलतियां हुईं लेकिन पिता ने हमें सुधार का मौका दिया। पिता ही है जो बार-बार गलतियों पर माफ करते रहे। पिता ने 12वीं पास करने के बाद डांटा था। उस समय थोड़ा बुरा जरूर लगा लेकिन जब आंख खुली तो समझ में आया कि भविष्य बनाने के लिए मुझे डांट पड़ी। पिता ही हैं जो आपको आसमान तक पहुंचा सकते हैं। - विक्रांत सत्या, वरिष्ठ वैज्ञानिक, डीआरडीओ

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पिता कैंसर से पीड़ित थे, पर मेरी पढ़ाई बंद नहीं होने दी

मेरे पिता को कैंसर था। महंगी-महंगी दवाएं चलती रहीं। घर की आर्थिक स्थिति अधिक अच्छी नहीं थी। लगता था कि मैं पढ़ाई कर पाऊंगा या नहीं। पीयू के कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग से बीटेक किया। बीच में लगा था कि फीस के पैसे नहीं हो पाएंगे लेकिन पिता पवन कंसल ने यह महसूस नहीं होने दिया। पैसे की कमी होने के बाद भी मैं पिता के चलते पढ़ता रहा।

पहली नौकरी एक कंपनी में लगी लेकिन पिता चाहते थे कि मैं व्यवसाय करूं। वह खुद भी फोटोग्राफी की दुकान चलाते थे। नौकरी के कुछ दिन दिन बात ही पिता की मौत हो गई। मैं घर का अकेला बेटा हूं। पिता का सपना पूरा करने के लिए आर्गेनिक सामान की बिक्री शुरू की और दोस्त विभूषित सिंह के साथ मिलकर फीको फ्रैश नामक कंपनी खड़ी कर ली। आज कंपनी देशभर में ड्राईफ्रूट की बिक्री करती है। कंपनी लगातार उन्हें बुलंदियों की ओर ले जा रही है। - सौरभ कंसल, संचालक, फीको फ्रैश

असफल होने पर पिता ने बढ़ाया मनोबल, मिल गई मंजिल
मैंने पंजाब यूनिवर्सिटी के पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग से परास्नातक की पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान ही रिश्तेदारों व अन्य लोगों ने कहा कि शिक्षक आदि की तैयारी कर लो, सफलता हासिल हो जाएगी। लेकिन पिता चाहते थे कि मैं सिविल सर्विस में जाऊं।

यूपीएससी का पेपर दिया था। एक पेपर पास हुई तो दूसरा पास नहीं हो पाया। असफल हुई लेकिन पिता ने मनोबल बढ़ाया। आगे बढ़ने को कहा। उसके बाद वर्ष 2019 से पंजाब सिविल सर्विस की तैयारी में जुट गई और आज परिणाम सामने आया तो उसमें छठी रैंक मिली। यह पिता की ही बदौलत हुआ, क्योंकि असफल होने पर मैं निराश हो जाती थी लेकिन पिता भरपूर सिंह सकारात्मक विचारों से आगे बढ़ाते रहे। - गुर सिमरनजीत कौर, पीसीएस, पंजाब।

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