एयरोपॉनिक्स तकनीक से हवा में आलू उगा सकेंगे किसान, सात गुना बढ़ जाएगी पैदावार
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हरियाणा सहित देश के अन्य आलू उत्पादक राज्यों के किसान एयरोपॉनिक्स तकनीक से जल्द ही हवा में भी आलू उगा सकेंगे। इस तकनीक से किसानों की आलू की पैदावार सात गुना तक बढ़ जाएगी। हाल ही में रोहतक में हुई तीन दिवसीय थर्ड एग्री लीडरशिप समिट में इस तकनीक के लिए करनाल के श्यामगढ़ स्थित बागवानी विभाग के अंतर्गत आने वाले आलू अनुसंधान केंद्र और पेरू की राजधानी लीमा स्थित अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत लीमा स्थित केंद्र हरियाणा सरकार से एयरोपॉनिक्स तकनीक साझा करेगी। हरियाणा सरकार द्वारा अप्रैल, 2019 से इस तकनीक को धरातल पर उतारा जाएगा।
पौधे के बिना उगाया जाएगा आलू
एयरोपॉनिक्स तकनीक में पौधे के बिना मिट्टी के जरिए आलू उगाया जाता है। इसके बाद बड़े-बड़े बॉक्स में आलू के पौधे लटका दिए जाते हैं। हर बॉक्स में पोषक तत्व और पानी डाला जाता है। इस तरह की तकनीक के इस्तेमाल से पौधों की जड़ों में नमी बनी रहती है और थोड़े समय बाद आलू की पैदावार होने लगती है। आमतौर पर आलू के जिस एक पौधे से सिर्फ पांच या 10 आलू पैदा होते हैं, इस तकनीक की मदद से उसी आलू के एक पौधे से 70 आलू तक पैदा होने लगेंगे।
केंद्र सरकार ने भी दी मंजूरी
आलू अनुसंधान केंद्र श्यामगढ़ के उपनिदेशक डॉ. सत्येंद्र यादव ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के बजट में भी इस तकनीक को लागू करने का प्रावधान है। विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत केंद्र सरकार ने भी एयरोपॉनिक्स तकनीक को अपनाने का प्रोजेक्ट मंजूर कर दिया है। शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान से भी इस तकनीक को लेकर एमओयू किया जाएगा।
राज्य सरकार को भेजी गई फाइल
बागवानी विभाग के महानिदेशक डॉ. अर्जुन सिंह सैणी ने बताया कि एयरोपॉनिक्स तकनीक को लागू करने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी गई है। प्रोजेक्ट की फाइल सरकार को भेजी जा चुकी है। जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।