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पंजाब में रेल ट्रैक पर बैठे किसान, रेल यातायात ठप, जानें क्या है मामला

Thu, 18 Oct 2018 05:33 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बटाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बटाला (पंजाब) Updated Thu, 18 Oct 2018 05:33 PM IST
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farmers protest on railway track in Batala
रेलवे ट्रैक पर किसानों का प्रदर्शन

पंजाब के बटाला में किसानों ने रेलवे ट्रैक जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। किसान मजूदर संघर्ष कमेटी के बैनर तले हो रहे इस प्रदर्शन की वजह से रेलवे ट्रैक जाम रहा। सुबह से रात तक कोई भी ट्रेन बटाला की ओर नहीं आई। जो ट्रेनें बटाला आनी थी, उन्हें अमृतसर और पठानकोट की ओर आने वाली ट्रेनों को गुरदासपुर में रोक दिया गया। एसडीएम रोहित गुप्ता ने किसानों से बातचीत की और मांगों को हल करने के लिए अधिकारियों से बात करने का आश्वासन दिया है। 

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किसान भी लंबे धरने के लिए लंगर पानी का प्रबंध करके ही पहुंचे हैं। समाचार लिखे जाने तक किसानों का प्रदर्शन जारी था। गुरुवार दोपहर करीब एक बजे किसान बटाला रेलवे स्टेशन ट्रैक पर बैठ गए। वहीं, तरनतारन, अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर से भी किसान जत्थेबंदियों के सदस्यों ने हिस्सा लिया। किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए रेलवे की एसपी अमनदीप कौर, डीएसपी सिटी प्रह्लाद सिंह के अलावा एसएचओ रेलवे स्टेशन पर पुलिस पार्टी समेत तैनात हो गए।      
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 प्रदर्शन के दौरान राज्य नेता हरप्रीत सिंह, समना सिंह, सुखविंदर सिंह, राज्य जनरल सचिव सरवण सिंह, सूबा सिंह सीनियर उपप्रधान, सविंदर सिंह, राज्य नेता, जसबीर सिंह और रण सिंह ने बताया कि गन्ने का बकाया एक साल से लटका हुआ है। पंजाब सरकार 30 सितंबर का वादा करके भी गन्ना किसानों को बकाया नहीं दे सकी। किसान नेताओं ने बताया कि 90 लाख टन गन्ने का उत्पादन हो रहा है, जबकि मिलों की पीड़ाई क्षमता साढ़े 12 लाख टन है। 

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farmers protest on railway track in Batala
बटाला में किसानों का प्रदर्शन

उन्होंने कहा कि चीनी मिलों द्वारा किसानों से बगैर पूछे उनके नाम पर लिया गया कर्ज वापस करके गन्ना उत्पादकों को एनओसी सर्टिफिकेट बैंकों से दिलाया जाए। किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाए, नहीं तो वह समझेंगे कि सरकार खुद किसानों को पराली जलाने के लिए मजबूर कर रही है। किसानों पर दर्ज केस और जुर्माने रद्द किए जाएं। 

नेताओं ने कहा कि खेती मंडी कारपोरेट घरानों के हवाले करने की मोदी सरकार द्वारा तैयारी की जा रही है। धान की खरीद में नमी 25 प्रतिशत, बदरंगा व टोटे की छूट दी जाए। कंप्यूटराइजड तौल की जाए। अधिक तोलने वाले आढ़तियों का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए। वादे के मुताबिक किसानों-मजदूरों का समूह कर्ज माफ करके फसलों के भाव स्वामीनाथन की रिपोर्ट के मुताबिक किए जाएं। इस मौके पर किसानों ने मत्ता पास किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी, बहिबल कलां गोलीकांड के आरोपियों को सजा दी जाए। डीएपी खाद, पेट्रोल-डीजल के रेट कम किए जाएं। पंजाब सरकार द्वारा बिजली के रेटों में 11 प्रतिशत का बढ़ावा वापस लिया जाए।  

किसान नेता गुरलाल सिंह ने बताया कि किसान रात में भी रेलवे ट्रैक पर धरना लगाकर बैठे रहेंगे। जब तक उनकी मांगें नहीं हल हो जाती वह झुकेंगे नहीं। गुरलाल सिंह ने बताया कि सुबह के बाद अगली रणनीति तैयार करेंगे। बटाला रेलवे स्टेशन के सुपरिंटेंडेंट अंग्रेज सिंह ने बताया कि किसानों के धरने के कारण रेलवे को लाखों का नुकसान हुआ है क्योंकि कोई भी ट्रेन बटाला नहीं आ सकी। वहीं, यहां आने वाली लंबी दूरी की ट्रेन टाटा मूरी का रुट चेंज कर दिया गया है। करीब 10 ट्रेनें बटाला रेलवे स्टेशन आने वाली रद्द हो चुकी हैं।                        

 किसानों ने सरेआम जलाई पराली, की नारेबाजी

farmers protest on railway track in Batala
रेल ट्रैक पर बैठे किसान

 नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल व पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने प्रदेश सरकार को धान की पराली जलाने के मामले में चेतावनी दी है। इसके अलावा खेतीबाड़ी विभाग पंजाब के चीफ सेक्रेटरी पन्नू शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर किसान ने बिना सूचना व मंजूरी के खेत में कंबाइन उतारी तो छह साल की सजा होगी। किसानों को पराली जलाने से रोकने व पराली प्रबंधन के लिए सैकड़ों वाहन भी मुहैया कराए जा रहे हैं, लेकिन किसान पराली जलाने से रुक नहीं रहे हैं। 

प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार प्रशासन ने धारा 144 के तहत पराली न जलाने के लिए किसानों को चेतावनी दी है, लेकिन बरनाला में किसान पराली जला कर प्रशासन व प्रदेश सरकार का विरोध कर रहे हैं। बेशक जिला प्रशासन किसानों के जबरन चालान काट रहा है, लेकिन किसान है कि मान नहीं रहे। गौरतलब है कि प्रशासन ने कड़े तेवर दिखाते हुए पराली जलाने के मामले में एक किसान को 10 हजार का जुर्माना लगाया है।

 वहीं भारतीय किसान यूनियन ने भी प्रशासन को चेतावनी देते हुए गांव सहौर में पराली जलाई। इस अवसर पर लक्खोवाल यूनियन के जिला प्रधान जसवीर सिंह छीनीवाल से जिला प्रशासन की ओर से पराली न जलाने के आदेश को लेकर पूछा तो उन्होंने कहा कि किसान यूनियन कानून नहीं तोड़ सकती। यूनियन का काम है सरकार के नियमों का उल्लंघन करना, इसलिए वह नियमों के विरोध में पराली जला रहे हैं।

पराली की ट्रालियां सड़कों पर पलटेंगे

farmers protest on railway track in Batala
पराली जलाकर प्रदर्शन करते किसान

यूनियन के जिला प्रधान जसवीर सिंह ने प्रदेश में लगाए 8 हजार नोडल अफसरों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी को गांव में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा। अगर कोई अधिकारी गांव में दाखिल होकर किसान पर मुकदमा दर्ज करने की कोशिश करेगा तो उसे पक्के तौर पर बंदी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों ने पराली को आग लगाने की मुहिम शुरू कर दी है। यूनियन उनके साथ है। 

अगर प्रदेश सरकार ने धक्केशाही की तो हाईवे जाम कर पराली की ट्रालियां सड़कों पर पलटकर रास्ते बंद कर दिए जाएंगे व अधिकारियों के दफ्तरों के आगे ढेर लगाएंगे। बेशक प्रदेश सरकार ने खेतीबाड़ी विभाग के जरिये पराली के प्रबंधन के लिए 20 एकड़ के हिसाब से एक यंत्र मुहैया कराया जा रहा है। बरनाला में अब तक 180 हैप्पी सीडर, 180 पैडीचोबर, 65 जीरो ड्रिल, 14 आरएमबी रिवर्सिबल ब्लैक मुहैया कराने के साथ 275 कंबाइन एमएसएम मुहैया कराए गए हैं। परंतु इन सबके बाद भी किसान पराली जलाने की मजबूरी दिखा रहे हैं। डीसी धर्मपाल गुप्ता ने कहा कि नियमों के उल्लंघन करने वाले किसानों पर कार्रवाई की जाएगी व पराली जलाने के लिए उनको रोका जाएगा। 

जुर्माना करके सख्त कार्रवाई की जाएगी
खेतीबाड़ी विभाग पंजाब के सेक्रेटरी ने बयान देते हुए बताया कि बुधवार को खेतीबाड़ी विभाग पंजाब की वीडियो कॉन्फ्रेंस से समूह पंजाब में खेतीबाड़ी विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की गई। खेतीबाड़ी विभाग पंजाब के सेक्रेटरी पन्नू ने कहा कि अगर कोई भी किसान बिना मैसेज या बिना बताए कंबाइन चलाया तो उसको 6 साल की सजा का प्रावधान है। वहीं अगर कोई भी किसान पराली को जलाएगा तो उसको जुर्माना करके सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

पराली जलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाए
लुधियाना में डीसी प्रदीप कुमार अग्रवाल ने पराली को आग लगने से रोकने के लिए बनाई गई जिला स्तरीय कोआर्डिनेटर और मानीटरिंग कमेटी की बचत भवन में मीटिंग ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिले के किसी भी हिस्से में पराली को आग लगाने की खबर पता चलती है तो तुरंत जिला प्रशासन तथा अन्य संबंधित अथॉरिटी को सूचना दें ताकि तुरंत कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा एसडीएम को निचले कलस्टर अफसरों और अन्य कर्मचारियों के साथ वाट्सऐप ग्रुप बनाने के लिए कहा गया। 

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