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पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे किसान, मोगा में 450 पर केस दर्ज, 310 के कटे चालान

Tue, 12 Nov 2019 09:05 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोगा (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोगा (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 12 Nov 2019 09:05 PM IST
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Farmers continue burn stubble in Moga of Punjab
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

मोगा में अभी तक प्रशासन के आदेशों पर पुलिस ने पराली जलाने के आरोप में 450 किसानों के खिलाफ धारा 188 के अधीन केस दर्ज किए किए हैं। कृषि विभाग की ओर से 310 किसानों के चालान काटे जा चुके हैं। इसके बाद भी पराली का जलाना जारी है।

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डीसी के आदेश पर पुलिस पराली जलाने वाले 450 किसानों के खिलाफ धारा 188 के अधीन केस तो दर्ज कर चुकी है, लेकिन अभी तक एक भी किसान की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। 
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वहीं धारा 188 जमानत योग्य होने के कारण किसानों पर इस कार्रवाई का थोड़ा सा भी असर होता दिखाई नहीं दे रहा है। पराली जलाने के आरोप में थाना समालसर पुलिस ने मंगलवार को 19 और थाना मेहना पुलिस ने 23 किसानों के खिलाफ धारा 188 के तहत केस दर्ज किया।
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इनमें से एक भी किसान की गिरफ्तारी नहीं की गई। इसके बावजूद मंगलवार को ही कस्बा धर्मकोट में नेशनल हाईवे के साथ लगते खेतों में किसानों ने सरेआम पराली को आग लगाई। प्रशासन अब किसानों की इन हरकतों पर नजर रखने में विफल साबित हो रहा है। 

वहीं सुप्रीमकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश तो जारी कर दिए कि पराली न जलाने वाले किसान को प्रति क्विंटल 100 रुपये दिए जाएं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश भी किसानों को गवारा नहीं है। बेशक किसी तरह से दबाव बनाकर कृषि विभाग की ओर से उक्त आदेशों के तहत किसानों के फार्म भरे जा रहे है, लेकिन इसके बावजूद जिले भर में अब तक 60 फीसदी से अधिक पराली को आग लगाई जा चुकी है और पराली जलाने का सिलसिला अभी भी जारी है। 

अधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले में इस साल 1.75 लाख हेक्टेयर में फसल की बिजाई की गई थी और प्रशासन की लाख कोशिश के बावजूद अभी तक एक लाख हेक्टेयर से अधिक धान की पराली को आग लगाई जा चुकी है। 

प्रदूषण एक्ट के आर्टिकल 15 से होगा हल: डॉ. बराड़

जिला मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. जसविंदर सिंह बराड़ का कहना है कि किसानों पर धारा 188 के तहत किए जा रहे केसों का किसानों पर कोई फर्क नही पड़ रहा है। उनका कहा कि सरकार अपने स्तर पर आदेश जारी करे, जिसके तहत पराली जलाने वाले किसान के खिलाफ प्रदूषण एक्ट के आर्टिकल 15 के तहत केस दर्ज किया जाए जो कि गैर जमानती अपराध है। इसके साथ ही आरोपी किसान का बिजली कनेक्श्न काटने समेत उसे मिलने वाली हर प्रकार की सब्सिडी बंद की जानी चाहिए।

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