थम नहीं रहा पराली जलाने का सिलसिला, 1368 किसानों पर एफआईआर, केंद्र ने मांगा एक्शन प्लान
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हरियाणा में आज भी बहुत से किसान ऐसे हैं, जो पराली जलाने से हट नहीं रहे हैं। सरकार इन किसानों को लगातार जागरूक बनाने में जुटी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी बार-बार जिलों के उपायुक्तों को पराली जलाने वालों से सख्ती से निपटने के निर्देश दे रहा है। उधर, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद हरियाणा सरकार पर भी बिना पराली जलाए उसके निस्तारण का दबाव है।
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा के मुख्य सचिवों को तलब भी किया हुआ था। इसी के चलते खेत में पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ जिला स्तर पर सख्ती से निपटा जा रहा है। अभी तक प्रदेश में 1368 किसानों पर स्थानीय प्रशासन द्वारा मुकदमे दर्ज करवाए जा चुके हैं।
कृषि विभाग के अफसरों के पास एप के जरिए जिलावार हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसक) द्वारा जारी पराली जलाने की तस्वीरें और लोकेशन पहुंच रही है। जिसके बाद कृषि अफसर अपनी टीम के साथ लोकेशन पर तुरंत पहुंचकर पटवारी की मदद से खेत मालिक की पहचान कर उनके खिलाफ केस दर्ज करवा रहे हैं। किसानों के खिलाफ इस तरह कार्रवाई लगातार जारी है और मुकदमों की संख्या और बढ़ सकती है।
कुछ जिलों में हालात बने चिंताजनक
हालांकि अभी तक पिछले साल की अपेक्षाकृत प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में थोड़ी कमी आई है। फिर भी जितनी पराली आज भी जल रही है, प्रदूषण को काफी नुकसान पहुंचा रही है। 2018 में 11 नवंबर तक प्रदेश में पराली जलाने के 7273 मामले सामने आए थे, लेकिन इस वर्ष पराली जलाने के केसों 18.6 प्रतिशत की कमी आई है और इस बार संख्या 5920 है।
मगर कुछ जिलों में किसान मानने को तैयार ही नहीं हो रहे हैं। जिसके चलते इन जिलों के उपायुक्तों को हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने गंभीरता से इन केसों को कम करने के निर्देश दिए हैं। इन जिलों में अंबाला में अभी तक 361 मामले, फतेहाबाद में 1122 मामले, हिसार में 102, जींद में 492, कैथल में 1163 मामले, करनाल में 1069 मामले, कुरुक्षेत्र में 717 मामले, पलवल में 203 मामले, सिरसा में 339 मामले व यमुनानगर में 255 मामले सामने आ चुके है। जबकि अभी भी धान कटाई को करीब बीस दिन शेष हैं।
केंद्रीय मंत्री ने मांगा एक्शन प्लान
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने पांच राज्यों के अफसरों से प्रदूषण नियंत्रण को लेकर एक्शन प्लान मांगा है। विगत दिनों केंद्रीय मंत्री ने हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान व यूपी के पर्यावरण विभाग के आला अफसरों से बैठक कर उनसे पूछा था कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर वे अपने राज्य में क्या प्रयास कर रहे हैं और भविष्य के लिए उनका एक्शन प्लान क्या है।
हरियाणा ने भी अभी तक इस दिशा में की गई कार्रवाई से उन्हें अवगत करवा दिया है और भविष्य के लिए एक्शन प्लान बनाने में जुट गया है। इसी के चलते सोमवार को सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्य के छोटे और सीमांत किसानों को पराली न जलाने के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने व गैर-बासमती धान के फसल अवशेषों के एक्स-सीटू वा इन-सीटू प्रबंधन के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) और स्ट्रॉ बेलर यूनिट संचालकों को परिचालन लागत के रूप में 1000 रुपये प्रति एकड़ का खर्च देने की घोषणा की है।
जिन जिलों में अभी भी पराली जलाने की शिकायतें आ रही हैं, उन जिलों के डीसी को पत्र लिखा गया है। ऐसे किसानों के खिलाफ केस दर्ज करवाए जा रहे हैं। इसके अलावा पर्यावरण संबंधी अन्य गाइड लाइन पहले की तरह जारी है। किसानों के साथ वे उद्योग मालिक भी प्रशासन का सहयोग करें, जिससे प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिल सके। - एस. नारायणन, सदस्य सचिव, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड