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किसान-सियासतदान अड़े, बढ़ रहा आंदोलन, साथ में बढ़ रही झुंझलाहट और परेशानियां

Thu, 24 Dec 2020 10:41 AM IST
निवेदिता वर्मा मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 24 Dec 2020 10:41 AM IST
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Farmers agitation against farm laws is increasing
धरने पर बैठे किसान। - फोटो : फाइल फोटो

कृषि कानूनों को निरस्त करवाने के मुद्दे पर किसानों का आंदोलन और विरोध बढ़ता ही जा रहा है। किसान भी अड़कर खड़े हैं और सियासतदान भी। भाजपा नेता जहां इन कृषि कानूनों के लिए समर्थन जुटाने में लगे हैं, तो वहीं विपक्षी पार्टियों के नेता भी इन कानूनों का विरोध करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। नतीजतन सरकार और किसानों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। 

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हालात यह हैं कि अब तो पंजाब और हरियाणा में भाजपा व आरएसएस नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों, बैठकों व दौरों का खुलकर विरोध होना शुरू हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार इस आंदोलन व टकराव को ज्यादा लंबा खींचना नहीं चाहती। मगर किसानों और सरकार की जिद के चलते आंदोलन का गतिरोध अभी तक बना हुआ है। ऐसे में आंदोलन के लंबा चलने की संभावनाएं भी तेज होती जा रही हैं जिसका विपरीत असर उद्योगों, आमजन के जीवन समेत अन्य वर्ग पर पड़ रहा है। 
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यह भी पढ़ें - किसान आंदोलन : नहीं मिल रहे किसान संगठनों के दिल, साथ दिखने की मजबूरी, अंदरखाने क्रेडिट वार 
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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी बार-बार किसान संगठनों को बातचीत की पेशकश कर रहे हैं। मगर किसान इस पेशकश को ठुकरा रहे हैं। हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उनके मंत्रियों ने किसानों को समझाने की कमान संभाल रखी है। 

साथियों में बढ़ रही झुंझलाहट से किसान नेता चिंतित
जिस तरह से किसान आंदोलन लंबा होता जा रहा है, दिल्ली सीमाओं पर धरने पर बैठे किसानों की झुंझलाहट भी बढ़ती जा रही है। एक संत बाबा आत्महत्या कर चुके हैं और एक अन्य किसान ने भी जहर खाकर जान देने की कोशिश की थी। सर्दी का सितम भी आंदोलनरत बुजुर्ग और बीमार किसानों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। कुछ किसान सड़क हादसों का शिकार हो गए हैं। इसके बावजूद किसान विभिन्न तरीकों से अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। 

किसान संगठनों के नेता आंदोलनरत अपने साथी किसानों की इसी झुंझलाहट से परेशान हैं। किसान संगठनों को इसी बात का डर है कि किसानों की यह झुंझलाहट कहीं हिंसक रूप न ले ले। इसीलिए किसान नेता बार-बार अपने साथियों को संयम बरतने की सलाह दे रहे हैं। किसानों में बढ़ती इसी झुंझलाहट का नतीजा यह है कि पंजाब-हरियाणा में किसान भाजपा और आरएसएस नेताओं का खुलकर विरोध कर रहे हैं। 


भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि सरकार बार-बार चर्चा से ही इस समस्या का हल निकालने की बात कर रही है। बातचीत के लिए हम भी पीछे नहीं हैं, मगर किसान नेताओं ने यह फैसला लिया है कि कृषि कानूनों को रद्द करने से कम किसी मुद्दे पर बातचीत नहीं होगी। सरकार ने जो प्रस्ताव दिया है, उन्हीं बिंदुओं पर जवाब सरकार को भेजा जाएगा।

अब हरियाणा के आढ़ती भी खुलकर मैदान में आएंगे 
हरियाणा में किसानों के समर्थन में आढ़ती पहले ही उतर चुके हैं। मगर अब हरियाणा के आढ़ती पंजाब के आढ़तियों पर चल रही आयकर विभाग की छापामारी के विरोध में भी खुलकर मैदान में आएंगे। आढ़ती एसोसिएशन हरियाणा ने इस संदर्भ में अपने आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है। प्रदेशाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि इस बाबत सभी जिलों के पदाधिकारियों को रणनीति की सूचना दे दी गई है। इसके चलते 25 दिसंबर को हरियाणा के आढ़ती भी मंडियां बंद रख हड़ताल पर जाएंगे। प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि 25 दिसंबर को हरियाणा की मंडियां बंद रहेंगी और सभी जिलों में प्रदर्शन होंगे। 

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