किसानों की दो टूक, केंद्र पहले हमारी शर्तें माने, तभी होगी अगली बात
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कृषि कानूनों के विरोध में धरने पर बैठे किसान संगठनों ने अब केंद्र के सामने वार्ता के लिए शर्तें रखनी शुरू कर दी हैं। टीकरी बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह ने एलान किया कि कृषि कानूनों पर केंद्रीय स्तर पर तब तक बात नहीं होगी, जब तक जेलों में बंद किसानों को रिहा नहीं किया जाएगा।
जोगिंदर सिंह ने कहा कि सरकार लगातार किसानों पर झूठे मुकदमें दर्ज कर जेल भेज रही है, जिसको यूनियन कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। जब तक सरकार झूठे मामलों के बहाने गिरफ्तार किए किसानों को बिना शर्त रिहा नहीं करती और माहौल को शांत नहीं करती, तब तक सरकार के साथ बातचीत करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
जोगिंदर सिंह उगराहां ने मांग की कि दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे किसानों की पुलिस की तरफ से घेराबंदी खत्म की जाए। 26 जनवरी वाली घटना के दौरान आंदोलन कर रहे किसानों का सामान भी पुलिस ने जब्त कर लिया था, उसको वापस किया जाए। सरकार अब भी किसानों का उत्पीड़न कर रही है।
आंदोलन को समाप्त करने के लिए धरना स्थल पर मूलभूत सुविधाओं के साथ ही इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं, जो मानव अधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन है, जबकि किसान अपना आंदोलन शांतिपूर्वक कर रहे हैं। ऐसे में किसानों के साथ सरकारों का यह व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने किसानों को एकजुट होकर आंदोलन को और मजबूत करने का आह्वाहन किया।
सूचना के लिए जारी किया नंबर
जेलों में बंद किसानों के बारे में संगठन की टीमों की तरफ से पड़ताल की जा रही है। 100 से अधिक किसानों के बारे में पता लग चुका है, जबकि बाकियों की पड़ताल जारी है। उगराहां ने गुमशुदा किसानों के बारे में पीड़ित परिवारों को 9417539714 पर सूचना देने की अपील की। उन्होंने घोषणा की कि किसानों की रिहाई के लिए होने वाला सारा कानूनी खर्च संगठन की तरफ से किया जाएगा।