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फसल भुगतान को लेकर किसान और आढ़ती आमने-सामने, ऑनलाइन भुगतान को लेकर चल रहा विवाद

Tue, 15 Jan 2019 09:26 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 15 Jan 2019 09:26 PM IST
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farmer angry for online payments in haryana
सांकेतिक तस्वीर

हरियाणा की मंडियों में बिकने वाली फसल की पेमेंट का सीधे खाते में भुगतान होने को लेकर किसान व आढ़ती आमने-सामने आ गए हैं। किसान फसल का भुगतान सीधा अपने खाते में चाहते हैं, जबकि सरकार की इस योजना का आढ़ती विरोध कर रहे हैं। आढ़तियों ने हरियाणा और मंडियां बंद करने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद सरकार ने अपने फैसले को वापस ले लिया। 

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उधर, भारतीय किसान यूनियन ने पूरे मामले में कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। भाकियू हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी और प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि फसल का भुगतान सीधा किसान के खाते में होना चाहिए। किसान  पिछले कई वर्षों से इसकी मांग कर रहे हैं। सरकार ने पिछले वर्ष यह कदम उठाया था तब हरियाणा के किसानों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया था, लेकिन फिर सरकार ने फैसला वापस ले लिया। 
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अब खरीद एजेंसी किसान की फसल का भुगतान आढ़ती के माध्यम से कर रही है। जिसका किसान के साथ साथ सरकार को भी भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। चढ़ूनी ने कहा, हरियाणा की मंडियों में यह आम देखा गया है कि चावल मिल मालिक, आढ़तियों व अधिकारियों से मिलकर किसानों के नाम पर जाली जे-फार्म कटवाते हैं।  

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उसके बाद बड़ी मात्रा में ट्रेडिंग के नाम पर चावल दूसरे प्रदेशों से मंगवा लिया जाता है। यह धान खरीद के बदले बाद में सीधा सरकार को देते हैं। चालू सीजन में इस प्रकार के कई ट्रक किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने पकड़े थे। इसका सीधा नुकसान सरकार व किसान को होता है। शैलर मिल मालिक धान खरीद का अपना कोटा पूरा दिखाता है व किसान का धान मंडियों में पड़ा रहता है। जिससे किसान को धान फसल पर कट के रूप में 250-300 रुपये प्रति क्विंटल कम एमएसपी मिलता है।

राइस मिल शेलर्स लगा रहे सरकार को चूना
राकेश बैंस ने कहा कि शैलर्स सरकार को भी चूना लगाते हैं। न धान मंडी में आया न धान की कोई मिलिंग हुई न अन्य कोई खर्च हुआ, दूसरे प्रदेशों से मंगवाकर चावल सीधा सरकार को दे दिया और पूरे खर्चे वसूल कर लिए।

बाहर का गेहूं खरीदा, राज्य के किसान हुए परेशान
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने बताया कि पिछले साल पड़ोसी प्रदेशों के किसानों के नाम पर भारी मात्रा में गेहूं भी हरियाणा की मंडियों में बेची गई, जबकि मूल किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। भाकियू ने सीएम मनोहर लाल, कृषि मंत्री ओपी धनखड़ व खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री कर्ण देव कांबोज से फसल का भुगतान सीधा खाते में कराने की मांग की है।  

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