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निष्पक्ष रिपोर्टिंग सुनिश्चित करती है कि न्यायाधीश सीमाओं के भीतर रहें: हाईकोर्ट

Sat, 21 Sep 2024 08:34 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Sep 2024 08:34 PM IST
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Fair reporting ensures judges stay within bounds: High Court
-न्यायालय के निर्णयों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग न्याय प्रशासन का अभिन्न अंग: हाईकोर्ट
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-जज पर नियमों के खिलाफ जाकर जमानत देने को लेकर प्रकाशित की गई थी खबर
-खंडपीठ ने याचिका रद्द करते हुए माना कि लेख जज पर व्यक्तिगत हमला नहीं था
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अखबार के एडिटर व लीगल रिपोर्टर के खिलाफ अवमानना याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायालय की निष्पक्ष रिपोर्टिंग न्याय प्रशासन का अभिन्न अंग है।
लीगल रिपोर्टर ने खबर लिखी थी कि हाईकोर्ट के सिंगल जज ने नियमों का उल्लंघन करते हुए भगोड़े उद्योगपति और उसके पिता को एनडीपीएस के मामले में जमानत दे दी और राज्य को जमानत का विरोध करने का कोई अवसर नहीं दिया गया। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने 2014 में अखबार व लीगल रिपोर्टर के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि महाधिवक्ता की पूर्व सहमति के बिना आपराधिक अवमानना याचिका दायर नहीं की जा सकती है और इस मामले में ऐसा नहीं किया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष रिपोर्टिंग प्रेस की स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है, चाहे वह प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। प्रेस की स्वतंत्रता न केवल राज्य की बेशर्मी और मनमानी कार्रवाई के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि न्यायालय के निर्णयों के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान करते हैं, जो कानून के स्थापित सिद्धांतों और सुस्थापित प्रक्रिया से अलग हटकर है, जिससे न्याय प्रशासन अपवित्र हो सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि लेख में निर्णय की रिपोर्टिंग के माध्यम से न्यायाधीश पर व्यक्तिगत रूप से हमला नहीं किया गया है, तो पत्रकार अवमानना के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
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हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतें आम जनता के गहरे भरोसे का भंडार हैं, जो माननीय न्यायाधीश की पवित्र कलम से निकलने वाले अदूषित और बेदाग न्याय की अपेक्षा करते हैं। माननीय न्यायाधीशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे न्याय के प्रशासन को बनाए रखें। उनसे यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे अपने निर्णयों के माध्यम से बेदाग न्याय प्रदान करके कानून की महिमा को बनाए रखें, जो स्थापित मानदंडों और प्रक्रियाओं की सीमाओं के भीतर होने चाहिए। यह निष्पक्ष रिपोर्टिंग ही है जो सुनिश्चित करती है कि माननीय न्यायाधीश उक्त सीमाओं के भीतर रहें।
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निष्पक्ष न्यायालय रिपोर्टिंग का प्रसार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है, इसे दबाया नहीं जा सकता
खंडपीठ ने कहा कि न्यायालयों के निर्णयों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग से संबंधित समाचारों का प्रिंट मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की ओर से जनता के बीच प्रसार न्यायाधीशों द्वारा न्याय के प्रशासन में निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है, जिसे दबाया नहीं जा सकता। यदि ऐसा हुआ तो न्याय की धारा प्रदूषित हो जाएगी, जिससे न्याय प्रशासन में आम जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जिससे समाज में अराजकता और अराजकता फैल जाएगी।
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