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आयोग गुपचुप कर रहा चुनाव में पार्दशिता लाने का प्रयोग

Fri, 11 Apr 2014 10:32 PM IST
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, पंचकूला
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, पंचकूला Updated Fri, 11 Apr 2014 10:32 PM IST
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experiment of election commission for Transparency in election

मतदाता ने किस प्रत्याशी को वोट किया है। इसके अलावा चुनाव चिह्न और प्रत्याशी के नाम की पर्ची भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जेनरेट होगी। लोकसभा चुनाव के अगले चरण में गांधीनगर, लखनऊ और पटना में वोटर वेरिफिकेशन पेपर ट्रेल (वीवीपीटी) का इस्तेमाल किया जाएगा। अगर देश के कुछ प्रदेशों में लोकसभा चुनाव में न्यू जेनरेशन ईवीएम का प्रयोग पूर्णत: सफल होता है, तो हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी इस मशीन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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ताकि चुनाव को और पारदर्शी बनाया जा सके

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अगर वोटर की ओर से दायर शिकायत गलत हुई तो उन पर भी कार्रवाई का प्रावधान होगा। चुनाव आयोग के निर्देश पर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बेल) ने ईवीएम का नया वर्जन तैयार किया है। ताकि चुनाव को और पारदर्शी बनाया जा सके। पंचकूला में भी बेल में ईवीएम का मेंटीनेंस किया जाता रहा है। वीवीपीटी के इस्तेमाल से वोटर के बटन दबाने के बाद बीप की आवाज के साथ ही पर्ची भी निकलेगी, जिसमें यह जानकारी होगी कि उन्होंने वोट किसे दिया है।

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वोटरों की बनी रहेगी गोपनीयता

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कई बार वोटरों की भी शिकायत होती है कि तकनीकी खराबी की वजह से ईवीएम में वोटिंग के दौरान कुछ समस्याएं आती हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए वीवीपीटी का इस्तेमाल किया जाएगा। वीवीपीटी में एक प्रिंटर लगा होगा, जो वोट करने के बाद स्लिप जेनरेट करेगा। बाद में इन पर्चियों को नष्ट कर दिया जाएगा। वोटरों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इसमें केवल पार्टी या प्रत्याशी का ही ब्योरा होगा। देश में बेल और ईसीआईएल दो कंपनियां हैं जो ईवीएम के निर्माण और मेंटीनेंस से जुड़ी हैं।

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ऐसे होगा वीवीपीटी का इस्तेमाल

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- वोट करने के बाद प्रत्याशी का नाम और चुनाव चिह्न के साथ पर्ची प्रिंटर से निकलेगी
- अगर वोटर को लगता है कि मशीन में किसी तरह की खामी है तो इस बारे में संबंधित अधिकारी को शिकायत कर सकते हैं
- बीप की आवाज के बावजूद वोट डाला गया या नहीं, यह भी पर्ची से साफ हो जाएगा

वोटिंग प्रणाली और भी पारदर्शी

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हरियाणा के सीईओ श्रीकांत वाल्गड ने बताया कि देश में कुछ जगहों पर नई तकनीक से युक्त ईवीएम का प्रयोग किया जा रहा है। इससे वोटिंग प्रणाली को और भी पारदर्शी बनाया जा सकेगा। ताकि वोटरों के बीच संशय की स्थिति न रहे। अगर, वोटर मतदान के दौरान किसी तरह की गलत शिकायत देते हैं और इसकी पुष्टि होती है तो उन पर भी कार्रवाई का प्रावधान होगा।

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