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दर्द में डूबी और लगन से भरी है आदिवासी हस्तशिल्प, देखने के लिए पहुंचे यहां
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 17 Jun 2017 09:21 AM IST
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चंडीगढ़ के लाजपत राय भवन में लगी प्रदर्शनी
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बेशक उनके दिल में दर्द है पर अपने हुनर से आपके ड्राइंग रूम शोभा बढ़ाते हैं। यह हैं छत्तीसगढ़ के आर्टिस्ट। चंडीगढ़ सेक्टर-15 के लाजपत राय भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प प्रदर्शनी में ऐसे ही आर्टिस्ट हैं जिन्होंने खुद अपने प्रोडक्ट तैयार किए हैं। यहां बेलमेटल, वाट आयरन, गोदना आर्ट और बंबू से तैयार किए गए सजावटी आइटम हैं। इन आइटम की कीमत भी पचास रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक है। इस प्रदर्शनी का आयोजन किया है छत्तीसगढ़ हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट बोर्ड ने।
रायगढ़ के रहने वाले मीनकेतन बघेल यहां पर ढोगरा आर्ट लेकर आए हैं। उनके प्रोडक्ट मेडल के हैं। उन्होंने बताया कि हाथी, लैंप, हिरण के पीतल के डेकोरेटिव पीस तैयार करने के लिए वह पहले लकड़ी की मोल्डिंग तैयार करते हैं। उसके भीतर वह पिघलाकर मोम डाल देते हैं। फिर जब मोम एक शेप ले लेता है तो उसको जला देते हैं और उस सांचे में पीतल को पिघलाकर डाल देते हैं। यह काम करने में चार दिन का समय लगता है। मीनकेतन ने कहा कि उनके प्रोडक्ट अब विदेश तक में प्रसिद्ध हो चुके हैं। उन्होंने गणेश म्यूजिक सेट और दीपदान जैसे बेहतरीन आइटम तैयार किए हैं।
जमुना बाईगीता बताती हैं कि उन्होंने पेन होल्डर, पेपर रखने का बाक्स और लैंप आदि तैयार किए हैं। माधुरी ने बताया कि वह बुंबू बाक्स और बंबू के कई प्रोडक्ट लेकर आई हैं। इसमें डलिया और पेन होल्डर जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। इसी प्रदर्शनी में आईं समली बघेल ने बताया कि वह सेमल के पेड़ से लकड़ी निकालकर प्रोडक्ट तैयार करती हैं। इसके साथ ही यहां टेराकोटा के प्रोडक्ट भी हैं। प्रदर्शनी में गोदना आर्ट से तैयार साड़ी भी लोगो का दिल जीत रही है। जिसको आदिवासी महिलाएं सात दिन में तैयार करती हैं। इन साड़ियों की खूबी है कि उनके ऊपर चढ़ाने के लिए रंग भी वह खुद तैयार करती हैें और डिजाइन के लिए ब्रश का इस्तेमाल करती हैं।
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रायगढ़ के रहने वाले मीनकेतन बघेल यहां पर ढोगरा आर्ट लेकर आए हैं। उनके प्रोडक्ट मेडल के हैं। उन्होंने बताया कि हाथी, लैंप, हिरण के पीतल के डेकोरेटिव पीस तैयार करने के लिए वह पहले लकड़ी की मोल्डिंग तैयार करते हैं। उसके भीतर वह पिघलाकर मोम डाल देते हैं। फिर जब मोम एक शेप ले लेता है तो उसको जला देते हैं और उस सांचे में पीतल को पिघलाकर डाल देते हैं। यह काम करने में चार दिन का समय लगता है। मीनकेतन ने कहा कि उनके प्रोडक्ट अब विदेश तक में प्रसिद्ध हो चुके हैं। उन्होंने गणेश म्यूजिक सेट और दीपदान जैसे बेहतरीन आइटम तैयार किए हैं।
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जमुना बाईगीता बताती हैं कि उन्होंने पेन होल्डर, पेपर रखने का बाक्स और लैंप आदि तैयार किए हैं। माधुरी ने बताया कि वह बुंबू बाक्स और बंबू के कई प्रोडक्ट लेकर आई हैं। इसमें डलिया और पेन होल्डर जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। इसी प्रदर्शनी में आईं समली बघेल ने बताया कि वह सेमल के पेड़ से लकड़ी निकालकर प्रोडक्ट तैयार करती हैं। इसके साथ ही यहां टेराकोटा के प्रोडक्ट भी हैं। प्रदर्शनी में गोदना आर्ट से तैयार साड़ी भी लोगो का दिल जीत रही है। जिसको आदिवासी महिलाएं सात दिन में तैयार करती हैं। इन साड़ियों की खूबी है कि उनके ऊपर चढ़ाने के लिए रंग भी वह खुद तैयार करती हैें और डिजाइन के लिए ब्रश का इस्तेमाल करती हैं।
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नक्सलियों ने मार दिया बेटा और पति
चंडीगढ़ के लाजपत राय भवन में लगी प्रदर्शनी
नक्सलियों ने मार दिया बेटा और पति
नारायणपुर की रहने वाली सीता बाई ने बताया कि उनके बेटे अमर सिंह को 12 वर्ष पहले नक्सलियों ने मार दिया। उसके बाद कुच समय तक वह व्यथित रहीं। उसके बाद उनको इंद्रावास योजना के अंतर्गत शिफ्ट कर दिया गया। वह बताती हैं कि उनको अपने बेटे की याद आती थी तो सिसक उठतीं थी, लेकिन जब हस्तशिल्प का काम शुरू किया तो फिर गम दूर होने लगा। अब बंबू प्रोडक्ट और अन्य हस्तशिल्प प्रोडक्ट तैयार कर लेती हैं। रमोला ने बताया कि उनको पति बुधवार को नक्सली ने मार दिया था। उसके बाद उनको भी इंद्रावास योजना के अंतर्गत शिफ्ट कर दिया गया। रमोला अब ड्राइंग रूम के लिए डेकोरेटिव पीस और बंबू प्रोडक्ट तैयार कर लेती हैँ।
दो रुपये से शुरू काम, अब खूब नाम
दस साल पहले दो रुपये का सामान लेकर हस्तशिल्प की दिशा में कदम बढ़ने वाली रेनू विश्वकर्मा रायपुर की एक उद्यमी और ट्रेनर बन चुकी हैं। रेनू बताती हैं कि ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने अपना पार्लर शुरू किया। पार्लर में थोड़ा समय वक्त लगा लेकिन उसके बाद जब मन उचटने लगा तो उन्होंने अपने पार्लर को एक ट्रेनिंग सेंटर का रूप दे दिया। उन्होंने ग्यारहवीं और बारहवीं के स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। इससे उनकी थोड़ी आय हुई तो दो रुपये की पूंजी लगाकर फ्लावर पॉट का काम शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि सुराही, मटके के साथ सेरेमिक आर्ट की प्रेक्टिस करने लगीं। रेनू ने कहा कि एक दिन उनके पिता ने देखा तो बोले कि जो प्रोडक्ट आप तैयार कर रहे हैं उसको ज्यादा से ज्यादा बनाओ। उन्होंने प्रोडक्ट तैयार किए तो पिता ने एक राज्य स्तरीय एक्जिबिशन में उनको स्टाल दिला दिया। वहां उनको पांच हजार रुपये का फायदा हुआ तो वह अपने प्रोडक्ट को और तैयार करने लगीं। रेनू ने बताया कि अब रायपुर और आसपास के इलाके के लोग उनके द्वारा तैयार किए गए गमले आदि को काफी पसंद करते हैं। अब वह ऐसा प्रोडक्ट तैयार करने की ट्रेनिंग देने लगी हैं।
नारायणपुर की रहने वाली सीता बाई ने बताया कि उनके बेटे अमर सिंह को 12 वर्ष पहले नक्सलियों ने मार दिया। उसके बाद कुच समय तक वह व्यथित रहीं। उसके बाद उनको इंद्रावास योजना के अंतर्गत शिफ्ट कर दिया गया। वह बताती हैं कि उनको अपने बेटे की याद आती थी तो सिसक उठतीं थी, लेकिन जब हस्तशिल्प का काम शुरू किया तो फिर गम दूर होने लगा। अब बंबू प्रोडक्ट और अन्य हस्तशिल्प प्रोडक्ट तैयार कर लेती हैं। रमोला ने बताया कि उनको पति बुधवार को नक्सली ने मार दिया था। उसके बाद उनको भी इंद्रावास योजना के अंतर्गत शिफ्ट कर दिया गया। रमोला अब ड्राइंग रूम के लिए डेकोरेटिव पीस और बंबू प्रोडक्ट तैयार कर लेती हैँ।
दो रुपये से शुरू काम, अब खूब नाम
दस साल पहले दो रुपये का सामान लेकर हस्तशिल्प की दिशा में कदम बढ़ने वाली रेनू विश्वकर्मा रायपुर की एक उद्यमी और ट्रेनर बन चुकी हैं। रेनू बताती हैं कि ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने अपना पार्लर शुरू किया। पार्लर में थोड़ा समय वक्त लगा लेकिन उसके बाद जब मन उचटने लगा तो उन्होंने अपने पार्लर को एक ट्रेनिंग सेंटर का रूप दे दिया। उन्होंने ग्यारहवीं और बारहवीं के स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। इससे उनकी थोड़ी आय हुई तो दो रुपये की पूंजी लगाकर फ्लावर पॉट का काम शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि सुराही, मटके के साथ सेरेमिक आर्ट की प्रेक्टिस करने लगीं। रेनू ने कहा कि एक दिन उनके पिता ने देखा तो बोले कि जो प्रोडक्ट आप तैयार कर रहे हैं उसको ज्यादा से ज्यादा बनाओ। उन्होंने प्रोडक्ट तैयार किए तो पिता ने एक राज्य स्तरीय एक्जिबिशन में उनको स्टाल दिला दिया। वहां उनको पांच हजार रुपये का फायदा हुआ तो वह अपने प्रोडक्ट को और तैयार करने लगीं। रेनू ने बताया कि अब रायपुर और आसपास के इलाके के लोग उनके द्वारा तैयार किए गए गमले आदि को काफी पसंद करते हैं। अब वह ऐसा प्रोडक्ट तैयार करने की ट्रेनिंग देने लगी हैं।