पंजाब में लड़ रहे दिल्ली के 'जरनैल' से मिलिए, जूता फेंकने से आए चर्चा में
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पेशे से पत्रकार रहे जरनैल सिंह का नाम पहचान का मोहताज नहीं है। सात अप्रैल 2009 को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम पर जूता फेंक कर सुर्खियों में आए। उनके बाद से तो देश भर में नेताओं पर जूता फेंकने का चलन ही शुरू हो गया।
किसी भी बात का गुस्सा नेताओं पर निकालने के लिए चुनावों और रैलियों में अक्सर जूते उछालने की प्रथा सी शुरू हो गई है। 1973 को दिल्ली में जन्मे जनरैल सिंह आप के राजनीतिक जगत में पर्दापण के साथ ही आम आदमी पार्टी का हिस्सा बन गए थे।
राजनीति में हालांकि उनका सफर लंबा नहीं है, लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव में सीएम प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ लंबी हलके से ताल ठोंकने की घोषणा के बाद एकाएक उनका कद बढ़ा है।
सीएम प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ मैदान में उतरे
राजनीति में उनकी असली अग्निपरीक्षा भी अब ही होगी,क्योंकि वे राजनीति के धुरंधर प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ लड़ने जा रहे हैं। जो दस बार विधानसभा पहुंच चुके हैं और पाचवीं बार पंजाब के सीएम पद पर काबिज हैं।
लंबी उनके लिए घर की तरह है तो जरनैल पर दिल्ली का होने के चलते बाहरी होने का ठप्पा भी है। बेशक, सिख दंगा पीडि़तों की आवाज बुलंद करते हुए ही उन्होंने पी चिदंबरम पर जूता उछाला था, जिसकी सहानुभूति पाने की भी वे कहीं न कहीं कोशिश करेंगे।
लेकिन, उनके लिए लंबी का चक्रव्यूह भेदना आसान नजर नहीं आ रहा है। दिल्ली की राजनीति में पहले चुनाव में ही 2014 में जरनैल को मुंह की खानी पड़ी थी और पूर्व जाट नेता साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा ने उन्हें 2 लाख 68 हजार 586 मतों के भारी अंतर से मात दी थी।
वेस्ट दिल्ली से हारने के बाद 2015 में उप चुनाव में जरनैल को राजौरी गार्डन से टिकट दिया गया, जहां से वे जीतने में सफल रहे। उन्होंने मनजिंदर सिंह सिरसा को हराया था।
पत्रकारिता से लंबे समय तक रहा नाता
6 जनवरी 2017 को उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया, चूंकि आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल उन्हें लंबी से विधानसभा चुनाव में उतरने का इशारा कर चुके थे। केजरीवाल ने लंबी में उनकी लांचिंग के लिए चुनावी रैली की और वहीं प्रत्याशी घोषित किया।
जनरैल के लिए बादल को टक्कर देना ही इस चुनाव में बड़ी बात होगी। इसके लिए भी उन्हें लंबी हलके की एक-एक गली की खाक छाननी होगी। पार्टी ने उन्हें 1984 सिख दंगा पीडि़तों के हक में आवाज बुलंद करने की पृष्ठभूमि को देखते हुए टिकट थमाया है।
इसे वे कितना भुना पाते हैं, अब ये चुनाव परिणाम ही बता पाएगा। जरनैल सिंह वाईएमसीए इंस्टीट्यूट फार मीडिया स्टडीज एंड इनफार्मेशन टेक्रोलॉजी से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वे अमर उजाला में भी रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं।
इसके बाद उन्होंने एक अन्य हिंदी दैनिक में एक दशक से अधिक समय तक काम किया और रक्षा मंत्रालय की रिपोर्टिंग में खोजी पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाई। 2009 में चिदंबरम पर जूता उछालने के साथ ही उनके पत्रकारिता करियर का अंत हुआ और वे राजनीतिज्ञ बन गए।