फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   ex soldier ramkishan untold truth, ramkishan background, ramkishan profile, ramkishan funeral

दिल्ली में जान देने वाले पूर्व फौजी का बैकग्राउंड देखिए, गर्व होगा उसपर

Fri, 04 Nov 2016 09:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 04 Nov 2016 09:53 AM IST
विज्ञापन
ex soldier ramkishan untold truth, ramkishan background, ramkishan profile, ramkishan funeral
खुदकुशी करने वाले रामकिशन ग्रेवाल (65) का जीवन।
फौज में 35 साल नौकरी, 1971 में पाकिस्तान युद्ध लड़ा, राष्ट्रपति सम्मान मिला, सरपंच बने। इसके अलावा भी बहुत कुछ थे पूर्व फौजी रामकिशन की जिंदगी में।
विज्ञापन


कुछ इस तरह के उतार-चढ़ावों से भरा रहा है दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे ओआरओपी आंदोलन के दौरान खुदकुशी करने वाले रामकिशन ग्रेवाल (65) का जीवन। मंगलवार रात रामकिशन ग्रेवाल की मौत की खबर के बाद परिजन व ग्रामीण स्तब्ध हैं।
बुधवार को दिनभर गांव में रामकिशन के जुझारूपन और जज्बे की चर्चा होती रही। शव गांव लाए जाने पर वीरवार को अंत्येष्टि की जाएगी। 

अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ हो

ex soldier ramkishan untold truth, ramkishan background, ramkishan profile, ramkishan funeral
पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग - फोटो : अमर उजाला
पति की मौत से गमजदा रामकिशन की पत्नी किताबो देवी ने कहा कि उसके पति ने ओआरओपी आंदोलन व सैनिकों के लिए जान दी है। अब हम केवल इतना चाहते हैं कि उन्हें शहीद का दर्जा मिले और उनकी अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ हो।

किताबो ने बताया कि वे 31 अक्तूबर को खुश मूड में दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद क्या हुआ, उसे पता नहीं। आज उनकी मौत की खबर आई। रामकिशन के बेटे कुलवंत ने बताया कि उनके पिता ने ओआरओपी आंदोलन व सैनिकों के लिए अपनी जान दी है। उनके पिता की मौत के बाद हो रही पॉलिटिक्स से कोई मतलब नहीं है। हम तो केवल यह चाहते हैं कि उनके पिता को शहीद का दर्जा मिले। गांव के ही रिटायर्ड सूबेदार उम्मेद सिंह ने भी रामकिशन की सक्रियता की तारीफ की।
विज्ञापन
विज्ञापन

रामकिशन के कर्जायत होने की भी चर्चा

ex soldier ramkishan untold truth, ramkishan background, ramkishan profile, ramkishan funeral
रामक‌िशन ग्रेवाल - फोटो : अमर उजाला
गांव में रामकिशन के बारे में कर्जायत होने की भी चर्चा है, हालांकि उनके परिवार ने इसकी पुष्टि नहीं की है। रामकिशन के चार बेटे बेरोजगार हैं और खेती के लिए भी जमीन नहीं है। बड़ा बेटा दिलावर हरियाणा पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं और फतेहाबाद में तैनात हैं।

एक बेटा जसवंत जेबीटी पास आउट है तो बलवंत एमए मैथ और बलविंद्र एमए इंग्लिश हैं। कुलवंत दसवीं पास है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार में एक ही व्यक्ति के रोजगारशुदा होने के अलावा पेंशन ही गुजर-बसर का साधन था। 
विज्ञापन

सूबेदार पद से रिटायर हुए थे

ex soldier ramkishan untold truth, ramkishan background, ramkishan profile, ramkishan funeral
बहुत कुछ थे पूर्व फौजी रामकिशन की जिंदगी में।
सेना की डिफेंस सिक्योरिटी कापर्स  (डीएससी) से 2004 में सूबेदार पद से रिटायर होने वाले रामकिशन 1971 की लड़ाई से कुछ समय पहले फौज में भर्ती हुए थे। पाकिस्तान के साथ युद्ध में हिस्सा लिया। रिटायरमेंट के बाद आते ही गांव वालों ने उन्हें सरपंच बना दिया।

बामला-सेकेंड पंचायत से वे करीब छह सौ मतों की जीत से सरपंच चुने गए। उनकी सरपंची के दौरान बामला को निर्मल ग्राम का पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार रामकिशन ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के हाथों लिया।

गांव में शोक, मीडिया का मजमा

ex soldier ramkishan untold truth, ramkishan background, ramkishan profile, ramkishan funeral
बामला गांव में मीडिया का मजमा
जंतर-मंतर पर रामकिशन की मौत की सूचना बुधवार सुबह न्यूज चैनल पर चली तो शहर से 12 किलोमीटर दूर स्थित बामला गांव में मीडिया का मजमा लग गया। दोपहर बाद एक न्यूज चैनल की ओबी वैन व पत्रकारों का आना-जाना शुरू हो गया।
रामकिशन के चार बेटे व एक बेटी दिल्ली में अपने पिता के शव के साथ हैं। एक बेटा कुलवंत व उसकी बहन सुमित्रा अपनी माता को ढांढस बंधा रहे हैं। 

बामला ने 11 साल पहले रामकिशन को सरपंच चुना

ex soldier ramkishan untold truth, ramkishan background, ramkishan profile, ramkishan funeral
बामला ने 11 साल पहले रामकिशन को सरपंच चुना
पहलवानों के लिए मशहूर गांव बामला ने 11 साल पहले रामकिशन को सरपंच चुना था। उनकी ईमानदारी की दाद मौजूदा सरपंच तस्वीर सिंह भी देते हैं। रामकिशन ने 6 साल तक इंफेंट्री बटालियन में नौकरी की। इसके बाद डिफेंस सिक्योरिटी फोर्स ज्वाइन कर ली। यहां करीब 31 साल रहे। 2004 में वे रिटायर हुए थे। नौकरी में रहते हुए ही वे गांव में ईमानदार व्यक्ति की पहचान बना चुके थे।

रिटायरमेंट के अगले साल लोगों के कहने पर सरपंची का फार्म भरा और रिकार्ड वोट से जीते। बतौर सरपंच बेहतरीन काम के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने सम्मानित भी किया था। रामकिशन के 5 बेटे और दो बेटियां हैं। रामकिशन ने बेटे जसवंत को फोन कर जहर खाने की जानकारी दी थी। पत्नी किताब कौर ने बताया कि ‘दिल्ली जाते समय कहा था सरकार कुर्बानी चाहती है। और अब हर कुर्बानी को तैयार हैं।’
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed