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रिसर्च पेपर में धोखाधड़ी मामले में पीजीआई में पहली बार कार्रवाई, पूर्व एचओडी पाए गए दोषी

Thu, 31 Oct 2019 12:22 PM IST
खुशबू गोयल आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 31 Oct 2019 12:22 PM IST
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ex hod of pharmacology departmeny of pgi chandigarh found guilty in research paper fraud
pgi chandigarh
रिसर्च पेपर में धोखाधड़ी के मामले में पीजीआई की गवर्ननिंग बॉडी (जीबी) ने फार्माकोलाजी विभाग के पूर्व एचओडी अमिताव चक्रवर्ती को दोषी मानकर उनकी निंदा की है। हालांकि प्रो. चक्रवर्ती पीजीआई से रिटायर हो चुके हैं। कार्रवाई के नाम पर अब फिलहाल ज्यादा कुछ नहीं हो सकता। पीजीआई में रहते यदि उन्हें दोषी माना जाता तो शायद उनके प्रमोशन व अन्य लाभ प्रभावित हो सकते थे।
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फिलहाल अब उनके रिकार्ड में यह दर्ज हो जाएगा। भविष्य में जब भी वे किसी इंस्टीट्यूट को ज्वाइन करते हैं तो और वह इंस्टीट्यूट पीजीआई से एनओसी मांगता है तो पीजीआई इस बात का उल्लेख जरूर करेगा। इससे उनकी नियुक्ति में अड़चन उत्पन्न हो सकती है। यह पहली बार है, जब रिसर्च में धोखाधड़ी के केस में किसी पीजीआई डॉक्टर को दोषी ठहराया गया हो।
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गवर्ननिंग बॉडी की मीटिंग की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन ने की। यह मामला साल 2014 का है। जब अमिताव चक्रवर्ती फार्माकोलाजी विभाग के विभागाध्यक्ष थे। उन्होंने एक समीक्षात्मक पत्रिका में एक शोध प्रकाशित किया था, जिसमें दावा किया गया था कि हेल्पलाइन में एक महीने के दौरान कुल 56 कॉल आए थे, जबकि रिकार्ड के मुताबिक हेल्पलाइन में तीन वर्षों में सिर्फ एक दो कॉल ही आईं थीं।
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इससे यह जाहिर होता है कि उन्होंने अपने शोध में जो डाटा प्रस्तुत किया था, उसमें उन्होंने अपने स्तर पर हेरफेर की थी।

जांच में डाटा में हेरफेर मिली

पीजीआई को जब यह जानकारी मिली तो इस मामले की जांच की गई। कई कमेटियों ने इसकी जांच की जिसमें पाया गया कि डाटा में हेरफेर हुई है। कमेटी की रिपोर्ट गवर्ननिंग बॉडी के सामने रखी गई। रिपोर्ट रखने के बाद गवर्ननिंग बॉडी के सदस्यों ने इस पर चर्चा की और उसके बाद यह फैसला लिया गया। उधर, इस बारे में डा. चक्रवर्ती का कहना है कि उन्हें यह मालूम नहीं कि जीबी की बैठक में क्या फैसला लिया गया है।

पीजीआई ने पहली बार प्लेजरिज्म (रिसर्च में हेराफेरी) पर किसी डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पिछले ही साल प्लेजरिजम की गाइडलाइंस फाइनल की गई हैं। इसके तहत दोषी पाए जाने पर रिसर्च व थीसिस करने पर प्रतिबंध व नौकरी से निकाले जाने का प्रावधान है। रिसर्च के क्षेत्र में प्लेजरिज्म एक गंभीर अपराध माना जाता है। यह धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।

प्रो. सहगल के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए
जीबी की बैठक में पैरासाइटोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. राकेश सहगल के केस पर भी चर्चा हुई। उन पर भी रिसर्च डाटा में हेरफेर का आरोप लगा था। यह मामला साल 2017 का है। जांच कमेटी की जांच में उन पर लगे आरोप साबित नहीं हो सके हैं। जीबी ने चर्चा के बाद कहा कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं बनती।

 
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