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Chandigarh News: कैब बुक करने वाले हर यात्री की हो केवाईसी
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चंडीगढ़। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) की तरफ से मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम-2024 तैयार किया जा रहा है। कुछ दिन पहले एसटीए ने ड्राफ्ट जारी कर लोगों से सुझाव मांगे थे और 15 दिन का समय दिया था। शुक्रवार को सुझाव देने का आखिरी दिन था। अब तक विभाग के पास कई सुझाव पहुंचे हैं। इसमें ट्राइसिटी कैब ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन, ट्राइसिटी राइडर्स वेलफेयर सोसाइटी समेत अन्य ने भी कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
ट्राइसिटी कैब ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान विक्रम पुंडीर ने कहा है कि सरकार यात्रियों के साथ-साथ ड्राइवरों की सुरक्षा पर भी ध्यान दे, जिसके लिए हर यात्री का केवाईसी होना बहुत जरूरी है क्योंकि कई बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिसमें ड्राइवर्स के साथ मारपीट हुई है और उसकी जान भी गई है। यदि कोई निजी वाहन व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त पकड़ा जाता है, तो उसे तुरंत जब्त किया जाना चाहिए। अगर इलेक्ट्रिक वाहन या बाइक टैक्सी को बढ़ावा दिया जा रहा है तो उन्हें भी पीली प्लेट अनिवार्य की जानी चाहिए। पॉलिसी में कहा गया है कि अगर चंडीगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों के वाहन चंडीगढ़ में चलते हैं तो उन्हें फीस देनी होगी, जो वाहन मालिक द्वारा भरी जाएगी। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई है। कहा है कि एग्रीगेटर कंपनी को पहले से ही 5 फीसदी जीएसटी के अलावा 20-35 फीसदी कमीशन दिया जाता है। ईंधन पर भी अलग से टैक्स देना पड़ता है। कॉमर्शियल इंश्योरेंस जो पहले से ही काफी महंगा है, उसका भी भुगतान चालक को करना पड़ता है। ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट के अलावा पासिंग फीस भी दी जाती है इसलिए यह फीस पहले की तरह सिर्फ कंपनियों से ही ली जाए। इसके साथ पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के अलावा बाकी राज्यों की टैक्सी को अटैच न किया जाए। इसके अलावा उन्होंने बेस किराया 100 रुपये तय करने, 3 किमी के बाद न्यूनतम किराया 20 से ज्यादा रुपये प्रति किमी, सभी कंपनियों का चंडीगढ़ में ऑफिस, राइड बुक करने के बाद स्थान न बदलने की अनुमति समेत अन्य मुद्दे भी उठाए।
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ट्राइसिटी कैब ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान विक्रम पुंडीर ने कहा है कि सरकार यात्रियों के साथ-साथ ड्राइवरों की सुरक्षा पर भी ध्यान दे, जिसके लिए हर यात्री का केवाईसी होना बहुत जरूरी है क्योंकि कई बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिसमें ड्राइवर्स के साथ मारपीट हुई है और उसकी जान भी गई है। यदि कोई निजी वाहन व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त पकड़ा जाता है, तो उसे तुरंत जब्त किया जाना चाहिए। अगर इलेक्ट्रिक वाहन या बाइक टैक्सी को बढ़ावा दिया जा रहा है तो उन्हें भी पीली प्लेट अनिवार्य की जानी चाहिए। पॉलिसी में कहा गया है कि अगर चंडीगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों के वाहन चंडीगढ़ में चलते हैं तो उन्हें फीस देनी होगी, जो वाहन मालिक द्वारा भरी जाएगी। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई है। कहा है कि एग्रीगेटर कंपनी को पहले से ही 5 फीसदी जीएसटी के अलावा 20-35 फीसदी कमीशन दिया जाता है। ईंधन पर भी अलग से टैक्स देना पड़ता है। कॉमर्शियल इंश्योरेंस जो पहले से ही काफी महंगा है, उसका भी भुगतान चालक को करना पड़ता है। ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट के अलावा पासिंग फीस भी दी जाती है इसलिए यह फीस पहले की तरह सिर्फ कंपनियों से ही ली जाए। इसके साथ पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के अलावा बाकी राज्यों की टैक्सी को अटैच न किया जाए। इसके अलावा उन्होंने बेस किराया 100 रुपये तय करने, 3 किमी के बाद न्यूनतम किराया 20 से ज्यादा रुपये प्रति किमी, सभी कंपनियों का चंडीगढ़ में ऑफिस, राइड बुक करने के बाद स्थान न बदलने की अनुमति समेत अन्य मुद्दे भी उठाए।
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