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Chandigarh News: 46 करोड़ की पेनल्टी भी बेअसर, चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का काम अधूरा
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दिसंबर की डेडलाइन सामने, एफओबी की सीढ़ियों से प्लेटफार्म की टाइल्स तक कई काम बाकी
पांच बार बढ़ चुकी है समयसीमा, 462 करोड़ रुपये की परियोजना में अब 31 दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की डेडलाइन दिसंबर में है, लेकिन जमीनी हालात देखकर काम की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं। परियोजना में देरी के चलते ठेकेदार पर करीब 46 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाए जाने के बावजूद कई अहम काम अधूरे हैं। 462 करोड़ रुपये की इस परियोजना को पूरा करने की समयसीमा कई बार बढ़ाई जा चुकी है। अब 31 दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा से जुड़े काम अभी लंबित हैं।
कहीं सीढ़ियां नहीं, कहीं एस्केलेटर का इंतजार
यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए तैयार किए जा रहे फुट ओवरब्रिज (एफओबी) तक पहुंचने के रास्ते दोनों ओर से पूरी तरह तैयार नहीं हैं। पंचकूला की तरफ सीढ़ियां बन चुकी हैं, लेकिन एस्केलेटर लगाने का काम बाकी है। चंडीगढ़ की तरफ एफओबी तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां भी अब तक नहीं लगाई गई हैं। इनके तैयार होने के बाद यात्रियों को प्लेटफार्म तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी।
प्लेटफार्म पर टाइल्स, पाथवे भी अधूरे
चंडीगढ़ की ओर पाथवे का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। प्लेटफार्म पर टाइल्स लगाने का काम भी लंबित है। इसके अलावा पार्किंग, आंतरिक सड़कों, पार्सल और माल ढुलाई क्षेत्र तथा पुराने स्टेशन भवन के नवीनीकरण से जुड़े कुछ काम भी बाकी हैं। फिलहाल यात्रियों को स्टेशन के भीतर से ही प्लेटफार्म तक जाना पड़ रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार चंडीगढ़ की ओर पाथवे का काम नवंबर तक पूरा हो जाएगा। एस्केलेटर और लिफ्ट भी लगा दी जाएंगी। एफओबी और एस्केलेटर तैयार होने के बाद डिपार्चर करने वाले यात्रियों की आवाजाही आसान होगी।
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पांच बार बढ़ चुकी है समयसीमा
परियोजना की पहली डेडलाइन 10 अप्रैल 2024 थी। इसके बाद समयसीमा 31 दिसंबर 2024, 31 अक्तूबर 2025, 18 मार्च 2026 और 31 जुलाई 2026 तक बढ़ाई गई, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। अब 31 दिसंबर 2026 मौजूदा डेडलाइन है। परियोजना की रिपोर्टेड लागत 462 करोड़ रुपये है। ठेकेदार पर करीब 46 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई है, जो परियोजना लागत का लगभग 10 प्रतिशत है। पुनर्विकास का कुल क्षेत्रफल 1,92,248 वर्ग मीटर है। प्रस्तावित स्टेशन भवन चंडीगढ़ और पंचकूला, दोनों ओर विकसित किए जाने हैं।
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पांच बार बढ़ चुकी है समयसीमा, 462 करोड़ रुपये की परियोजना में अब 31 दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की डेडलाइन दिसंबर में है, लेकिन जमीनी हालात देखकर काम की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं। परियोजना में देरी के चलते ठेकेदार पर करीब 46 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाए जाने के बावजूद कई अहम काम अधूरे हैं। 462 करोड़ रुपये की इस परियोजना को पूरा करने की समयसीमा कई बार बढ़ाई जा चुकी है। अब 31 दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा से जुड़े काम अभी लंबित हैं।
कहीं सीढ़ियां नहीं, कहीं एस्केलेटर का इंतजार
यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए तैयार किए जा रहे फुट ओवरब्रिज (एफओबी) तक पहुंचने के रास्ते दोनों ओर से पूरी तरह तैयार नहीं हैं। पंचकूला की तरफ सीढ़ियां बन चुकी हैं, लेकिन एस्केलेटर लगाने का काम बाकी है। चंडीगढ़ की तरफ एफओबी तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां भी अब तक नहीं लगाई गई हैं। इनके तैयार होने के बाद यात्रियों को प्लेटफार्म तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी।
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प्लेटफार्म पर टाइल्स, पाथवे भी अधूरे
चंडीगढ़ की ओर पाथवे का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। प्लेटफार्म पर टाइल्स लगाने का काम भी लंबित है। इसके अलावा पार्किंग, आंतरिक सड़कों, पार्सल और माल ढुलाई क्षेत्र तथा पुराने स्टेशन भवन के नवीनीकरण से जुड़े कुछ काम भी बाकी हैं। फिलहाल यात्रियों को स्टेशन के भीतर से ही प्लेटफार्म तक जाना पड़ रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार चंडीगढ़ की ओर पाथवे का काम नवंबर तक पूरा हो जाएगा। एस्केलेटर और लिफ्ट भी लगा दी जाएंगी। एफओबी और एस्केलेटर तैयार होने के बाद डिपार्चर करने वाले यात्रियों की आवाजाही आसान होगी।
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पांच बार बढ़ चुकी है समयसीमा
परियोजना की पहली डेडलाइन 10 अप्रैल 2024 थी। इसके बाद समयसीमा 31 दिसंबर 2024, 31 अक्तूबर 2025, 18 मार्च 2026 और 31 जुलाई 2026 तक बढ़ाई गई, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। अब 31 दिसंबर 2026 मौजूदा डेडलाइन है। परियोजना की रिपोर्टेड लागत 462 करोड़ रुपये है। ठेकेदार पर करीब 46 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई है, जो परियोजना लागत का लगभग 10 प्रतिशत है। पुनर्विकास का कुल क्षेत्रफल 1,92,248 वर्ग मीटर है। प्रस्तावित स्टेशन भवन चंडीगढ़ और पंचकूला, दोनों ओर विकसित किए जाने हैं।