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सुखना लेक चंडीगढ़ के बढ़ रहे जल स्तर से इंजीनियरिंग विभाग सतर्क हुआ, डैम की मरम्मत शुरू
Wed, 15 Jul 2020 01:24 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jul 2020 01:24 PM IST
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सुखना लेक का बढ़ता जलस्तर
- फोटो : अमर उजाला
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मानसून की बारिश से सुखना लेक का जलस्तर बढ़ने से इंजीनियरिंग विभाग सतर्क हो गया है। एहतियातन लेक पर बने डैम की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। आपातकाल में प्रयोग किए जाने वाले जेनरेटर सेट, फ्लड लाइट्स पैनल और सायरन लेक के रेग्युलेटरी इंड पर पहुंचा दिया गया है। साथ ही कर्मचारियों को हर सजग रहने की हिदायत दे दी गई है।
बता दें कि चंडीगढ़ में जून के अंतिम सप्ताह में मानसून ने दस्तक दी थी। इसके बाद जून में 170.3 एमएम और जुलाई में 151.9 एमएम बारिश हो चुकी है। इससे लेक का जलस्तर लगभग दो फुट बढ़कर 1157.65 फुट तक पहुंच गया है।
हालांकि अभी लेक का जल स्तर खतरे के निशान से काफी कम है, लेकिन एहतियातन विभाग सतर्क हो गया है। लेक की देखरेख का जिम्मा संभाल रहे इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने एग्जिट डैम की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही जल स्तर बढ़ने पर आपातकाल के समय प्रयोग होने वाले यंत्रों को भी रेग्युलेटरी इंड पर पहुंचा दिया गया है।
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2018 में खोलने पड़े थे डैम के चैनल
वर्ष 2018 में मानसून के दौरान सुखना का जल स्तर खतरे के निशान पर पहुंचने के कारण डैम के चैनलों को खोलना पड़ा था। इससे लेक के पीछे बसे गांव किशनगढ़ में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे। वर्ष 2019 में भी हालत कुछ ऐसे ही हो गए थे, लेकिन चैनल खोलने की नौबत नहीं आ पाई थी।
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बता दें कि चंडीगढ़ में जून के अंतिम सप्ताह में मानसून ने दस्तक दी थी। इसके बाद जून में 170.3 एमएम और जुलाई में 151.9 एमएम बारिश हो चुकी है। इससे लेक का जलस्तर लगभग दो फुट बढ़कर 1157.65 फुट तक पहुंच गया है।
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हालांकि अभी लेक का जल स्तर खतरे के निशान से काफी कम है, लेकिन एहतियातन विभाग सतर्क हो गया है। लेक की देखरेख का जिम्मा संभाल रहे इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने एग्जिट डैम की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही जल स्तर बढ़ने पर आपातकाल के समय प्रयोग होने वाले यंत्रों को भी रेग्युलेटरी इंड पर पहुंचा दिया गया है।
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2018 में खोलने पड़े थे डैम के चैनल
वर्ष 2018 में मानसून के दौरान सुखना का जल स्तर खतरे के निशान पर पहुंचने के कारण डैम के चैनलों को खोलना पड़ा था। इससे लेक के पीछे बसे गांव किशनगढ़ में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे। वर्ष 2019 में भी हालत कुछ ऐसे ही हो गए थे, लेकिन चैनल खोलने की नौबत नहीं आ पाई थी।