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स्मार्ट सिटी चंडीगढ़ का हाल देखिए, दो साल में तीन गुना बढ़ गए वेंडर, कहां गई इंफोर्समेंट विंग
Mon, 08 Jul 2019 02:06 PM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 08 Jul 2019 02:06 PM IST
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फाइल फोटो
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स्मार्ट सिटी चंडीगढ़ का यह हाल है कि पिछले दो साल में वेंडरों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। हालात यह है कि अब तो पार्षद भी सदन में खुलकर कहने लगे हैं कि इंक्रोचमेंट से शहर की सुंदरता दिनोंदिन खराब होती जा रही है। वर्ष 2014 में जब निगम ने सर्वे कराया था तो शहर में मात्र 7 हजार वेंडर थे। वहीं, वर्ष 2016 में हुए सर्वे कराया तो 21622 वेंडर सामने आए। इन सभी ने नगर निगम में स्ट्रीट वेंडिंग के लिए आवेदन किया था। नगर निगम रिकॉर्ड की मानें तो वर्तमान में शहर में 2200 वेंडिंग जोन हैं।
इसके अलावा 9356 रजिस्टर्ड वेंडर हैं। अधिकारियों का कहना है कि निगम इंस्पेक्टर समय-समय पर निरीक्षण कर कार्रवाई करते हैं, लेकिन पार्षदों का आरोप है कि इंक्रोचमेंट से शहर की सुंदरता खत्म होती जा रही है। प्रमुख मार्केट में पैर रखने तक को जगह नहीं है। जिस तरह से शहर में इंक्रोचमेंट हो रहा, उससे लगता है कि इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट को खत्म ही कर देना चाहिए। बता दें कि वर्ष 2009 में तत्कालीन एसडीएम इंद्रजीत संधू सेक्टर-38 वेस्ट में इंक्रोचमेंट हटाने गए थे। उस दौरान लोगों ने उन पर अटैक कर दिया था।
उसके बाद कोई भी बड़ा अफसर फील्ड में कार्रवाई करने नहीं गया। इंस्पेक्टर भी सही से मॉनिटरिंग नहीं करते। उसी का नतीजा है कि लगातार इंक्रोचमेंट बढ़ रहा है। उसी दौरान इंडस्ट्रियल एरिया में इंक्रोचमेंट हटाने की वीडियो बनाई गई थी जो आज भी निगम के पास है। वर्तमान में पहले से भी ज्यादा लोगों ने भूमि पर कब्जा कर रखा है। वर्ष 1996 से नियम है कि जहां इंक्रोचमेंट होगा वहां का इंस्पेक्टर जिम्मेदार होगा, लेकिन किसी पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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इसके अलावा 9356 रजिस्टर्ड वेंडर हैं। अधिकारियों का कहना है कि निगम इंस्पेक्टर समय-समय पर निरीक्षण कर कार्रवाई करते हैं, लेकिन पार्षदों का आरोप है कि इंक्रोचमेंट से शहर की सुंदरता खत्म होती जा रही है। प्रमुख मार्केट में पैर रखने तक को जगह नहीं है। जिस तरह से शहर में इंक्रोचमेंट हो रहा, उससे लगता है कि इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट को खत्म ही कर देना चाहिए। बता दें कि वर्ष 2009 में तत्कालीन एसडीएम इंद्रजीत संधू सेक्टर-38 वेस्ट में इंक्रोचमेंट हटाने गए थे। उस दौरान लोगों ने उन पर अटैक कर दिया था।
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उसके बाद कोई भी बड़ा अफसर फील्ड में कार्रवाई करने नहीं गया। इंस्पेक्टर भी सही से मॉनिटरिंग नहीं करते। उसी का नतीजा है कि लगातार इंक्रोचमेंट बढ़ रहा है। उसी दौरान इंडस्ट्रियल एरिया में इंक्रोचमेंट हटाने की वीडियो बनाई गई थी जो आज भी निगम के पास है। वर्तमान में पहले से भी ज्यादा लोगों ने भूमि पर कब्जा कर रखा है। वर्ष 1996 से नियम है कि जहां इंक्रोचमेंट होगा वहां का इंस्पेक्टर जिम्मेदार होगा, लेकिन किसी पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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एक नजर में इंफोर्समेंट विंग
खुल खर्च : लगभग 10 करोड़
चालान से मिलते हैं : 2 करोड़
सब इंस्पेक्टर : 17
सैलरी पर खर्च : लगभग सालाना 2.16 करोड़
विंग के पास गाड़ियां : 20
चालक की सैलरी व अन्य खर्चे : 1.92 करोड़ सालाना
लेबर : लगभग 100
सैलरी पर खर्च : लगभग 2.40 करोड़ सालाना
ऑफिस के खर्चे लगभग 60 लाख सालाना
सूत्रों की मानें तो साल में नगर निगम इंफोर्समेंट पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च करता है। इसके अलावा चालान से निगम को मात्र 2 करोड़ रुपये ही मिलते हैं। वहीं महीने में 2 से 3 चालान ही होते हैं।
चालान से मिलते हैं : 2 करोड़
सब इंस्पेक्टर : 17
सैलरी पर खर्च : लगभग सालाना 2.16 करोड़
विंग के पास गाड़ियां : 20
चालक की सैलरी व अन्य खर्चे : 1.92 करोड़ सालाना
लेबर : लगभग 100
सैलरी पर खर्च : लगभग 2.40 करोड़ सालाना
ऑफिस के खर्चे लगभग 60 लाख सालाना
सूत्रों की मानें तो साल में नगर निगम इंफोर्समेंट पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च करता है। इसके अलावा चालान से निगम को मात्र 2 करोड़ रुपये ही मिलते हैं। वहीं महीने में 2 से 3 चालान ही होते हैं।
लोगों में इंस्पेक्टरों का डर नहीं
भाजपा पार्षद रविकांत शर्मा का कहना है कि सेक्टर-22 के हॉस्पिटल के सामने महज 650 लोगों को दुकान लगाने के लिए लाइसेंस दिया गया है। वर्तमान में ढाई हजार से ज्यादा लोगों ने हॉस्पिटल की दीवार के पास कब्जा कर रखा है। निगम ने दो सब इंस्पेक्टरों की ड्यूटी लगाई है, लेकिन उन्हीं के सामने फड़ी वाले बिना किसी डर के बैठक रहते हैं। हालात यह हैं कि वहां से निकलने के लिए जगह तक नहीं मिलती। निगम की बैठक में कई बार मुद्दा उठाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती।
निगम की जमीन पर कब्जा, टाल रहे अधिकारी
वार्ड-23 के पार्षद भरत कुमार का कहना है कि हल्लोमाजरा में नगर निगम की जमीन पर ही लोगों ने इंक्रोचमेंट कर रखा है। हर दिन नई दुकानें वहां लग जाती हैं। एक साल से नगर निगम को इंक्रोचमेंट हटाने के लिए कह रहे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। डिपार्टमेंट जब एडीशनल कमिश्नर-1 के पास था तो कई बार चेकिंग के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि एसडीएम, एसएसपी को पत्र लिख दिया है। जल्द मिलकर निरीक्षण करेंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
निगम को नहीं पता कि कहां से होता है पानी सप्लाई
भरत कुमार ने बताया कि निगम की जमीन पर गाड़ियों की धुलाई का काम चल रहा है। अवैध रूप से पानी के टैंकर भरे जा रहे हैं, लेकिन नगर निगम को नहीं पता कि पानी आता कहां से है। कई बार लोगों ने शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इन्फोर्समेंट में जितने भी इंस्पेक्टर हैं उन्हें जानकारी है, लेकिन मिलीभगत से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
कमिश्नर ने बनाई टीम, अचानक करेगी निरीक्षण
सदन की बैठक में पार्षदों की आपत्ति के बाद कमिश्नर केके यादव ने नाराजगी जताते हुए एक टीम बनाई थी। इसमें दो इंजीनियरिंग विंग, दो एमओएच और दो इंफोर्समेंट विंग से अफसरों को चुना गया है। यह टीम कमिश्नर के निर्देश पर औचक निरीक्षण करेगी और सीधे कमिश्नर को रिपोर्ट देगी, जिससे कि फील्ड अफसरों की असलियत सामने आ सके। वहीं हर अफसर को वीरवार को फील्ड में जाने के निर्देश दिए हैं।
निगम की जमीन पर कब्जा, टाल रहे अधिकारी
वार्ड-23 के पार्षद भरत कुमार का कहना है कि हल्लोमाजरा में नगर निगम की जमीन पर ही लोगों ने इंक्रोचमेंट कर रखा है। हर दिन नई दुकानें वहां लग जाती हैं। एक साल से नगर निगम को इंक्रोचमेंट हटाने के लिए कह रहे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। डिपार्टमेंट जब एडीशनल कमिश्नर-1 के पास था तो कई बार चेकिंग के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि एसडीएम, एसएसपी को पत्र लिख दिया है। जल्द मिलकर निरीक्षण करेंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
निगम को नहीं पता कि कहां से होता है पानी सप्लाई
भरत कुमार ने बताया कि निगम की जमीन पर गाड़ियों की धुलाई का काम चल रहा है। अवैध रूप से पानी के टैंकर भरे जा रहे हैं, लेकिन नगर निगम को नहीं पता कि पानी आता कहां से है। कई बार लोगों ने शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इन्फोर्समेंट में जितने भी इंस्पेक्टर हैं उन्हें जानकारी है, लेकिन मिलीभगत से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
कमिश्नर ने बनाई टीम, अचानक करेगी निरीक्षण
सदन की बैठक में पार्षदों की आपत्ति के बाद कमिश्नर केके यादव ने नाराजगी जताते हुए एक टीम बनाई थी। इसमें दो इंजीनियरिंग विंग, दो एमओएच और दो इंफोर्समेंट विंग से अफसरों को चुना गया है। यह टीम कमिश्नर के निर्देश पर औचक निरीक्षण करेगी और सीधे कमिश्नर को रिपोर्ट देगी, जिससे कि फील्ड अफसरों की असलियत सामने आ सके। वहीं हर अफसर को वीरवार को फील्ड में जाने के निर्देश दिए हैं।
घरों को बनाया स्टोर रूम, नियम भी फॉलो नहीं
पूर्व मेयर व पार्षद आशा जसवाल का कहना है कि सेक्टर-19 की पार्किंग में लोगों ने पूरी तरह कब्जा कर रखा है। नियम है कि रेजिडेंशियल व कॉमर्शियल एरिया अलग अलग होना चाहिए, लेकिन सेक्टर 19 में ऐसा नहीं है। इससे लोगों को काफी परेशानी होती है। वहीं हाउसिंग बोर्ड के घरों में लोगों ने स्टोर बना रखा है। कभी भी आग लगने जैसा कोई हादसा हुआ तो काबू पाना आसान नहीं होगा।
शास्त्री मार्केट में फंस गई थी फायर ब्रिगेड
शहर में इंक्रोचमेंट का आलम यह है कि कभी कोई हादसा हो तो फायर ब्रिगेड को राहत कार्य करने में भी काफी मशक्कत करनी पड़े। प्लांड सिटी होने के बावजूद यहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां फंस जाती हैं। कुछ दिन पूर्व मॉक ड्रिल करने पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम शास्त्री मार्केट पहुंची तो देखा कि निकलने को जगह ही नहीं है। वहीं लोगों ने सड़कों पर धूप से बचने केलिए तिरपाल लगा रखी थी। उसकी रस्सियों में गाड़ी फंस गई। लोगों की मदद से गाड़ी को निकाला। उसके बाद सामान हटवाकर मॉक ड्रिल की।
पार्षदों ने निगम की बैठक में मुद्दा उठाया था। अधिकारियों को कहा गया है कि इंस्पेक्टर को ध्यान देने के लिए कहें। साथ ही जहां अवैध वेंडर हैं उन्हें हटाएं। साथ ही चालान करने वाले आउटसोर्स के लोगों का भी निगम की ओर से आईडी बनाने को कहा गया है। जिससे फर्जीवाड़ा न हो सके।
- राजेश कालिया, मेयर
हर क्षेत्र को अलग अलग अफसरों से मॉनिटरिंग कराई जाएगी। कहीं भी कमी मिली या इंक्रोचमेंट मिला तो संबंधित इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- केके यादव, नगर निगम कमिश्नर
पूर्व मेयर व पार्षद आशा जसवाल का कहना है कि सेक्टर-19 की पार्किंग में लोगों ने पूरी तरह कब्जा कर रखा है। नियम है कि रेजिडेंशियल व कॉमर्शियल एरिया अलग अलग होना चाहिए, लेकिन सेक्टर 19 में ऐसा नहीं है। इससे लोगों को काफी परेशानी होती है। वहीं हाउसिंग बोर्ड के घरों में लोगों ने स्टोर बना रखा है। कभी भी आग लगने जैसा कोई हादसा हुआ तो काबू पाना आसान नहीं होगा।
शास्त्री मार्केट में फंस गई थी फायर ब्रिगेड
शहर में इंक्रोचमेंट का आलम यह है कि कभी कोई हादसा हो तो फायर ब्रिगेड को राहत कार्य करने में भी काफी मशक्कत करनी पड़े। प्लांड सिटी होने के बावजूद यहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां फंस जाती हैं। कुछ दिन पूर्व मॉक ड्रिल करने पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम शास्त्री मार्केट पहुंची तो देखा कि निकलने को जगह ही नहीं है। वहीं लोगों ने सड़कों पर धूप से बचने केलिए तिरपाल लगा रखी थी। उसकी रस्सियों में गाड़ी फंस गई। लोगों की मदद से गाड़ी को निकाला। उसके बाद सामान हटवाकर मॉक ड्रिल की।
पार्षदों ने निगम की बैठक में मुद्दा उठाया था। अधिकारियों को कहा गया है कि इंस्पेक्टर को ध्यान देने के लिए कहें। साथ ही जहां अवैध वेंडर हैं उन्हें हटाएं। साथ ही चालान करने वाले आउटसोर्स के लोगों का भी निगम की ओर से आईडी बनाने को कहा गया है। जिससे फर्जीवाड़ा न हो सके।
- राजेश कालिया, मेयर
हर क्षेत्र को अलग अलग अफसरों से मॉनिटरिंग कराई जाएगी। कहीं भी कमी मिली या इंक्रोचमेंट मिला तो संबंधित इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- केके यादव, नगर निगम कमिश्नर