{"_id":"626d9bcc371e890a8e6b5f06","slug":"employer-cannot-be-forced-to-continue-service-if-employee-loses-faith-says-punjab-haryana-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला : कर्मचारी ने विश्वास खोया तो नियोक्ता को सेवा जारी रखने के लिए बाध्य नहीं कर सकते","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला : कर्मचारी ने विश्वास खोया तो नियोक्ता को सेवा जारी रखने के लिए बाध्य नहीं कर सकते
Sun, 01 May 2022 04:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा
विवेक शर्मा, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 01 May 2022 04:47 AM IST
सार
हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल चयनित याचिकाकर्ता ने छुपाई थी गिरफ्तार होने की बात। इसी आधार पर हरियाणा सरकार के नियुक्ति न देने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज।
विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि कर्मचारी नियोक्ता का विश्वास खो देता है तो उसकी सेवा जारी रखने के लिए नियोक्ता को बाध्य नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
हिसार निवासी अभिषेक गोयल ने हाईकोर्ट को बताया कि उसने कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया था। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसका चयन हो गया तथा बटालियन निर्धारित करने के लिए वेरिफिकेशन हेतू पत्र हिसार के एसपी को भेजा गया।
विज्ञापन
एसपी ने पाया कि 2018 की एफआईआर में याचिकाकर्ता गिरफ्तार हो चुका है। एफआईआर जिन धाराओं में दर्ज है उनमें तीन साल की सजा का प्रावधान है। इस आधार पर उसे नियुक्ति देने से इनकार कर दिया गया। साथ ही यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने इस आपराधिक मामले में गिरफ्तारी की जानकारी छुपाई।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी की जानकारी छुपाई है और ऐसे में नियोक्ता का विश्वास खो दिया है। वेरिफिकेशन फॉर्म में विशेष रूप से पूछा गया था कि क्या कभी गिरफ्तारी हुई है तो उसमें याची ने नहीं का विकल्प भरा था।
जब नियुक्ति के प्रारंभिक दौर में ही कर्मचारी ने नियोक्ता का भरोसा खो दिया तो ऐसे कर्मचारी पर भविष्य में भी विश्वास नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याची को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया।