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चंडीगढ़ : मांगों के लिए ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों का प्रदर्शन, उपायुक्त कार्यालय के बाहर नारेबाजी
Tue, 06 Apr 2021 03:37 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 06 Apr 2021 03:37 PM IST
सार
- प्रदर्शन में 25 संगठनों के प्रतिनिधि हुए शामिल
- प्रदर्शनकारियों ने गृहमंत्री को भेजा ज्ञापन
- काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन करने पहुंचे कर्मचारी
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चंडीगढ़ में प्रदर्शन करते कर्मचारी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
चंडीगढ़ में ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों ने सुरक्षित पॉलिसी बनाने, मजदूर विरोधी श्रम कानून बनाने और डीसी रेट में कम बढ़ोतरी पर मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन को आर्डिनेशन कमेटी ऑफ गवर्नमेंट एंड एमसी इंपलाइज एंड वर्कर्स के बैनर तले हुआ। प्रदर्शन के दौरान कई कर्मचारी काले कपड़े पहनकर शामिल हुए।
प्रदर्शन में पानी, बिजली, सड़क, जन स्वास्थ्य, सीवर और सफाई कर्मचारी यूनियन सहित 25 संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन भी भेजा गया। कोआर्डिनेशन कमेटी के प्रधान सतिंदर सिंह और महासचिव राकेश कुमार ने कहा कि प्रशासन ने वादे के अनुसार डीसी रेट नहीं बढ़ाया।
वादे के अनुसार 10 प्रतिशत डीसी रेट बढ़ाया जाना चाहिए था लेकिन सात प्रतिशत ही बढ़ाया गया। यह ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों के साथ धोखा है। श्रम कानून में मजदूर विरोधी बदलवा किए जा रहे हैं। समान काम के लिए समान वेतन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए सुरक्षित पॉलिसी बनाई जानी चाहिए ताकि उनका आर्थिक नुकसान न हो। साथ ही ठेकेदार के बदल जाने पर उनकी नौकरी भी सुरक्षित रहे। उन्होंने मांग की कि लाभ देने वाले बिजली विभाग को निजीकरण रोका जाए। नगर निगम से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को पेंशन व अन्य लाभ दिए जाएं। इस दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी की।
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प्रदर्शन में पानी, बिजली, सड़क, जन स्वास्थ्य, सीवर और सफाई कर्मचारी यूनियन सहित 25 संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन भी भेजा गया। कोआर्डिनेशन कमेटी के प्रधान सतिंदर सिंह और महासचिव राकेश कुमार ने कहा कि प्रशासन ने वादे के अनुसार डीसी रेट नहीं बढ़ाया।
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वादे के अनुसार 10 प्रतिशत डीसी रेट बढ़ाया जाना चाहिए था लेकिन सात प्रतिशत ही बढ़ाया गया। यह ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों के साथ धोखा है। श्रम कानून में मजदूर विरोधी बदलवा किए जा रहे हैं। समान काम के लिए समान वेतन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए सुरक्षित पॉलिसी बनाई जानी चाहिए ताकि उनका आर्थिक नुकसान न हो। साथ ही ठेकेदार के बदल जाने पर उनकी नौकरी भी सुरक्षित रहे। उन्होंने मांग की कि लाभ देने वाले बिजली विभाग को निजीकरण रोका जाए। नगर निगम से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को पेंशन व अन्य लाभ दिए जाएं। इस दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी की।
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