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पंजाब के चुनाव में दम दिखाएंगे नाराज मुलाजिम

Tue, 15 Apr 2014 02:27 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 15 Apr 2014 02:27 PM IST
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Employees Power Will Show in Punjab Elections
सरकार का सबसे महत्वपूर्ण मुलाजिम वर्ग इस बार काफी गुस्से में है। मुलाजिमों के कई मुद्दे पहले से लटकते आ रहे थे। कई मांग मानी ही नहीं गईं तो कई मानने के बाद भी पूरी नहीं हुई। वेतन नहीं मिलने ने आग में घी का काम किया। वेतन की समस्या तो नवंबर से ही शुरू हो गई थी।
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यह पहला मौका है कि जब 31 मार्च को मुलाजिमों को वेतन नहीं मिला है। इससे मुलाजिम रोष में हैं और उनके पास मौका भी है लोकसभा चुनाव का। इस बार राज्य के करीब साढ़े छह लाख सरकारी मुलाजिम चुनाव में अपना दम दिखाएंगे। इस वक्त 5 लाख नियमित कर्मचारी और 1.5 लाख कांट्रेक्ट कर्मचारी हैं।
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टीचर

Employees Power Will Show in Punjab Elections
समाज को दिशा देने वाले टीचरों के घर में चूल्हा जलने के लाले पड़ गए हैं। पहले कई स्कूलों में नवंबर, दिसंबर, जनवरी का वेतन रुका हुआ था। तीन महीने बाद वह रिलीज हुआ तो फरवरी व मार्च का रुक गया है।

गवर्नमेंट टीचर यूनियन के प्रेस सचिव हरनेक मावी के मुताबिक सरकार ने 12 अप्रैल-14 को नई डीडीओ पॉवर अलॉट कर दी हैं। पर उसमें फरवरी का बजट नहीं है। सरकारी गर्ल्स स्कूल कुराली, अकालगढ़ मॉडल स्कूल जैसे तमाम स्कूल, जिनका फरवरी का वेतन रुका है, उन्हें नहीं मिल सकेगा।

इस साल रिटायर होने वालों को लीव इनकैश, ग्रेच्युटी, जीपीएफ एडवांस जैसे लाभ नहीं मिले हैं। मौजूदा मुलाजिम भी बेटी की शादी या मकान बनाने के लिए अपने पीएफ से पैसे नहीं निकाल सकते। करोड़ों के मेडिकल बिल पेंडिंग पड़े हैं। लंबे संघर्ष के बाद अब टीचर चुनाव में सरकार को सबक सिखाने के  मूड में हैं।

मुलाजिम

Employees Power Will Show in Punjab Elections
सभी विभागों के मुलाजिमों सांझे मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। पीडब्ल्यूडी फील्ड एंड वर्कशॉप यूनियन के प्रधान वेद प्रकाश कहते हैं कि दिहाड़ी और ठेके पर तैनात मुलाजिमों का शोषण हो रहा है। रेगुलर करना तो दूर सीधी भरती भी नहीं कर रहे। डीए की किस्त बकाया है, पेंशन कम्यूटेशन पर समझौते के बाद भी कुछ नहीं किया।

छठे पे-कमीशन की स्थापना लंबित है। बोर्ड व निगमों के मुलाजिमों की पेंशन के मसले पर कुछ नहीं हुआ। 4-9-14 ग्रेड पे दिया, पर उससे नुकसान ही हो गया। दर्जा चार मुलाजिमों की वर्दी बंद कर दी गई है। उनका जीपीएफ निचले स्तर पर लाने का मसला भी लंबित है।

आशा वर्करों का मान भत्ता केंद्र ने एक हजार कर दिया है, यहां अभी तक कोई कवायद नहीं की गई। आंगनबाड़ी वर्करों को हरियाणा में 7500 रुपये मिल रहे हैं, यहां सिर्फ 4905 रुपये हैं। मिड डे मील वर्करों को हरियाणा सरकार ढाई हजार दे रही है, पंजाब में दस महीनों के बारह सौ रुपये दिए जाते हैं।
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रूरल हेल्थ फार्मासिस्ट

Employees Power Will Show in Punjab Elections
रूरल हेल्थ फार्मासिस्ट लंबे समय से रेगुलराइजेशन और वेतन बढ़ाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। एसोसिएशन पंजाब के पूर्व प्रधान सुखबीर सिंह के मुताबिक उनकी भरती 2006 में हुई थी। तब रूरल मेडिकल अफसर उन्हें ठेके पर ढाई हजार वेतन देते थे। संघर्ष के बाद सरकार ने 2007 में न्यूनतम वेतन पांच हजार किया। 2010 में 6250 रुपये कर दिया गया। मार्च-11 में रूरल मेडिकल अफसरों को रेगुलर कर दिया गया, फार्मासिस्ट अब भी धक्के खा रहे हैं। अगर उनका रेगुलर वेतन जोड़ा जाए तो 32 हजार रुपये बनता है।

पर सरकार अक्तूबर-11 से सिर्फ सात हजार रुपये दे रही है। जुलाई-13 में संघर्ष के बाद मीटिंग हुई तो अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर अड़ंगा डाल दिया। फार्मासिस्ट की मांग है कि अगर रेगुलर नहीं कर सकते तो वेतन तो बढ़ा सकते हैं। फार्मासिस्ट इस इंतजार में हैं कि आचार संहिता हटने के बाद अगर सरकार फैसला नहीं लेती है तो उपचुनाव में वे अपनी ताकत दिखाएंगे।

एसएसए-रमसा मुलाजिम

Employees Power Will Show in Punjab Elections
एसएसए-रमसा नॉन टीचिंग यूनियन ने बीते साल अपनी मांगों को लेकर 44 दिन कलमबंद हड़ताल की। आश्वासन देकर हड़ताल खत्म कराई गई, बाद में हड़ताल के दिनों का वेतन भी काट लिया गया। यूनियन के महासचिव आशीष जुलाहा ने कहा कि वे रेगुलर स्केल और बराबर के वेतन की मांग कर रहे हैं।

सरकार वेतन बढ़ाए और यह बताए कि कितनी सर्विस के बाद उन्हें रेगुलर किया जाएगा। टीचर 15 हजार हैं और मुलाजिम 1400, इसलिए टीचरों को रेगुलर स्केल दे दिया गया, मुलाजिमों को नहीं। चुनाव के दौरान जिलास्तर पर रोष प्रदर्शन जारी हैं। सभी एमपी कैंडिडेट से भी मुलाकात की जा रही है।

वेटरनरी फार्मासिस्ट

Employees Power Will Show in Punjab Elections
रूरल वेटरनरी फार्मासिस्ट भी वेतन बढ़ाने और रेगुलर करने की मांग को लेकर कई साल से आंदोलन कर रहे हैं, पर कुछ नहीं हुआ। फार्मासिस्ट यूनियन के उपप्रधान भगत सिंह ने बताया कि जुलाई-13 में बठिंडा में एक फार्मासिस्ट ने सुसाइड कर लिया था।

नइयांवाल निवासी जसविंदर सिंह तलवंडी साबो अस्पताल में तैनात था। उसने अस्पताल में ही पंखे से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। जिसके बाद मुख्यमंत्री के साथ दो बार मीटिंग हुई। उन्होंने जल्द रेगुलर करने का भरोसा दिया, पर वह ठंडे बस्ते में चला गया।

पैरा मेडिकल स्टाफ

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रूरल डिस्पेंसरियों का पैरा मेडिकल स्टाफ भी संघर्ष की राह पर है। एएनएम, मल्टीपरपस वर्कर आदि आठ साल से रेगुलर किए जाने की मांग कर रहे हैं। इन्हें भी सिर्फ सात हजार रुपये वेतन मिल रहा। रूरल हेल्थ पैरा मेडिकल यूनियन के सचिव वरिंदर कंबोज ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने वादा किया था कि उनका वेतन 18 हजार रुपये कर दिया जाएगा। पर बाद में मुकर गई। इसलिए इस चुनाव में तो अकाल-भाजपा गठबंधन को वोट नहीं डालेंगे। जो भी नेता हलके में आ रहा है, उससे सवाल भी किए जा रहे हैं।

मुलाजिमों के प्रमुख मुद्दे और मांगें

Employees Power Will Show in Punjab Elections
- मार्च का वेतन नहीं मिला, कई जगह फरवरी का भी नहीं मिला
- पिछले साल की डीए की बकाया किस्त नहीं मिली
- दिहाड़ी व ठेके पर तैनात मुलाजिमों को रेगुलर करना या ठेकेदार
हटा कर सीधी भरती करना
- रेगुलर भरती न हो सके तो रेगुलर स्केल देना
- पेंशन कम्यूटेशन के लिए सरकार बीस फीसदी कटौती कर रही थी,
मुलाजिम चालीस फीसदी की मांग कर रहे थे, तीस फीसदी पर समझौता हुआ,
वह भी लागू नहीं हुआ।
- अब तक छठे पे-कमीशन की स्थापना नहीं हुई
- दर्जा चार मुलाजिमों को जीपीएफ के लिए मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते
हैं। इसे निचले स्तर पर लाने की कोई कवायद नहीं हुई
- दर्जा चार मुलाजिमों के दी जाने वाली वर्दी भी बंद कर दी गई
- बोर्ड-निगमों के मुलाजिमों को पेंशन का लाभ आश्वासन के बाद भी नहीं
मिला। उनकी रिटायरमेंट की उम्र सीमा भी 58 साल ही है।
- आशा, मिड-डे मील और आंगनबाड़ी वर्करों का मानभत्ता नहीं बढ़ाया
गया।
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