रेगुलेटरी कमीशन का फरमान: लॉकडाउन में बंद इंडस्ट्री से वसूले जाएंगे बिजली के फिक्स चार्ज
- उद्यमियों ने जताया विरोध, उद्योग मंत्री ने 15 दिन पहले ही की थी माफी की घोषणा
- किस्तों में जमा करवाना होगा, प्रति फर्नेस इकाई 25 लाख से एक करोड़ का बोझ
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पहले मंदी फिर कोरोना के चलते बंदी से आर्थिक तंगी की मार झेल रहे मंडी गोबिंदगढ़ की लोहा इंडस्ट्री में पंजाब इलेक्ट्रिक रेगुलेटरी कमीशन के नए फरमान से हड़कंप मच गया है। कमीशन ने कोरोना संकट में दो माह से बंद पड़ीं मिलों के बिजली के फिक्स चार्ज मांग लिए हैं। ये बिजली के फिक्स चार्ज प्रति फर्नेस इकाई के 25 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक हैं।
यह तब है, जब 15 दिन पहले ही सूबे के उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने बिजली के फिक्स चार्ज माफ करने की घोषणा की थी। इसके पहले राज्य सरकार और पॉवरकाम ने भी लॉकडाउन के दौरान बंद इंडस्ट्री के दो माह के बिजली के फिक्स चार्ज न लेने के संबंध में सर्कुलर जारी किया था। स्टील सिटी फर्नेस एसोसिएशन ने कमीशन के इस कदम का विरोध किया है।
इस बारे में स्टील सिटी फर्नेंस एसोसिएशन ने तत्काल बैठक कर रेगुलेटरी कमीशन की इस कार्रवाई का विरोध किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण टोनी, संरक्षक सुभाष सिंगला व कार्यकारी सदस्य जैली गोयल ने बताया कि गत 7 मार्च को सर्कुलर जारी कर कोरोना संकट में लॉकडाउन के तहत प्रदेश की बंद इंडस्ट्री के दो माह के बिजली के फिक्स चार्ज माफ करने के आदेश जारी किए गए थे। इसी तर्ज पर पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन (पॉवरकाम) ने भी अलग से सर्कुलर जारी कर कहा था कि बिजली के फिक्स चार्ज नहीं लिए जाएंगे।
यही नहीं, दो जुलाई को प्रदेश के उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने भी मंडी गोबिंदगढ़ के जीसीएल क्लब में बैठक के दौरान बिजली के दो महीने के फिक्स चार्ज माफ करने की घोषणा की थी। टोनी ने कहा कि उद्योग मंत्री के बयान के 15 दिन बाद रेगुलेटरी कमीशन ने शनिवार को फरमान जारी कर कहा है कि इंडस्ट्री को बिजली के फिक्स चार्ज हर हाल में देने पड़ेंगे। उन्होंने बताया कि पत्र में कहा गया है कि उद्यमी फिक्स चार्ज छह महीने में किश्तों में अदा करने के लिए पाबंद होंगे।
उद्यमी सड़कों पर उतरेंगे
भारत भूषण टोनी जिंदल ने कहा कि इससे प्रति फर्नेस इकाई के मालिक को 25 लाख से एक करोड़ रुपये तक के चार्ज जमा करने पड़ेंगे, जिससे इंडस्ट्री में बड़ा आर्थिक संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उद्यमी इस नाइंसाफी के खिलाफ आने वाले दिनों में सड़कों पर उतरेंगे और भूख हड़ताल कर फैसले का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि वह इंडस्ट्री के लिए सरकार से बिजली के फिक्स चार्ज वसूलने का फैसला वापस लेने की मांग करते हैं। रेगुलेटरी कमीशन सरकार से बड़ा नहीं है। जरूरत पड़ने पर वह अदालत जाएंगे। क्योंकि कोरोना संकट में घाटे में चल रही इंडस्ट्री फिक्स चार्ज देने में सक्षम नहीं हैं।
एमएसएमई सेक्टर के फिक्स चार्ज रहेंगे माफ: उद्योग मंत्री
इस बारे पंजाब के उद्योगमंत्री सुंदर श्याम अरोड़ा से बात की तो उन्होंने कहा कि एमएसएमई (लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम) के फिक्स चार्ज सरकार ने माफ किए हैं। इस बारे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रेगुलेटरी कमीशन को सख्ती से आदेश जारी किए हैं। रेगुलेटरी कमीशन ने क्या नया सर्कुलर जारी किया है, उसे अभी देखा नहीं है।