सपा के बाद बसपा ने छोड़ा इस पार्टी का साथ, मायावती का एलान-अकेले लड़ेंगे चुनाव
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हरियाणा में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले बड़ा राजनीतिक धमाका हुआ है। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने जजपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है। एक ट्वीट कर उन्होंने इसकी जानकारी दी। अब हरियाणा में मायावती का हाथी नए साथी की तलाश में है।
बसपा प्रदेश में किसी की स्थायी साथी नहीं है, यह इस गठबंधन के टूटने से साफ हो गया है। चूंकि, हरियाणा की राजनीति में बसपा का जिससे भी गठबंधन हुआ, वह हर चुनाव के बाद टूटा ही है। इस बार बसपा ने जजपा के साथ 11 अगस्त को हुए गठबंधन को चुनाव में बिना परखे ही तोड़ दिया।
सूत्रों के अनुसार मायावती की इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय चौटाला से भी मुलाकात हुई है। इसलिए संशय बरकरार है कि हाथी का हरियाणा में नया साथी कौन होगा। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा व नई प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा के साथ मायावती के अच्छे राजनीतिक संबंध हैं। इस लिहाज से मायावती का गठबंधन कांग्रेस के साथ होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
इनेलो से बिखराव के बाद तोड़ा था गठबंधन
हरियाणा में जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन का एलान किया था। 11 अगस्त को दिल्ली में जजपा नेता दुष्यंत चौटाला और बसपा नेता सतीश मिश्रा ने गठबंधन की नींव रखी थी। चौधरी देवी लाल के जन्मदिवस पर 25 सितंबर को दोनों पार्टियों को संयुक्त रैली करनी थी। समझौते के तहत प्रदेश की कुल 90 विधानसभा सीटों में से जजपा 50 सीटों पर और बसपा को 40 सीटों पर चुनाव लड़ना था।
बसपा व लोसुपा से रहा गठबंधन
इससे पहले बसपा का इंडियन नेशनल लोकदल(इनेलो) और फिर भाजपा से अलग होकर राजकुमार सैनी द्वारा बनाई गई लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी (लोसुपा) के साथ गठबंधन रहा। लोकसभा चुनाव लोसुपा और बसपा ने मिलकर लड़ा लेकिन कुछ हाथ नहीं आया।
पारिवारिक फूट के बाद बनी थी जजपा
7 अक्तूबर 2018 को गोहाना के चौ. देवी लाल स्टेडियम में आयोजित सम्मान दिवस समारोह में तत्कालीन इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला के समर्थकों ने उनके चाचा अभय के खिलाफ हूटिंग कर दी थी। इसके बाद पार्टी प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने अपने पोते दुष्यंत और उनके छोटे भाई दिग्विजय को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया। दुष्यंत ने परदादा चौ. देवी लाल को मिली उपाधि जननायक का इस्तेमाल करते हुए जननायक जनता पार्टी का गठन किया था।
हरियाणा की राजनीति में बसपा के समीकरण
हरियाणा में बसपा ने 1998 में इनेलो के साथ गठबंधन किया था। 2009 में कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस के साथ गठबंधन किया। मई 2018 में फिर से इनेलो के साथ मिलकर चलने का फैसला किया गया लेकिन यह गठबंधन 9 महीने बाद ही टूट गया।
जींद उपचुनाव में करारी हार के बाद बसपा का इनेलो का अस्तित्व खतरे में नजर आने लग गया। इनेलो के साथ गठबंधन तोड़कर फरवरी 2019 में राजकुमार सैनी की लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का साथ लेने का मन बनाया है। हालांकि यह गठबंधन भी ज्यादा दिन नहीं चल पाया।
तीसरे नंबर रहा लोसुपा-बसपा गठबंधन इस कारण टूटा
राज्य में लोकसभा चुनाव में 10 सीटों से 7 सीटों पर बसपा-लोसपा गठबंधन तीसरे नंबर पर रहा। गठबंधन के तहत हरियाणा की 10 सीटों में से 8 पर बसपा ने अपने प्रत्याशी उतारे थे। वहीं, लोसुपा प्रत्याशी ने 2 सीटों पर चुनाव लड़ा। बसपा के हारे हुए नेताओं ने प्रदेश प्रभारी को बताया कि जहां से गठबंधन में बसपा के उम्मीदवार खड़े थे, वहां लोसुपा कार्यकर्ताओं ने प्रचार तक नहीं किया।
इसके बाद फरीदाबाद में प्रेस वार्ता में बसपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. मेघराज ने कहा था कि बहुजन समाज पार्टी के नेताओं द्वारा बार-बार समझाने के बाद भी राजकुमार सैनी विवादित बयान देते रहे। इसकी वजह से पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा।