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मेयर चुनाव: 9 को फैसला, सूद और मौदगिल की लड़ाई में तीसरे की खुल सकती है लॉटरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 20 Dec 2017 09:32 AM IST
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- फोटो : File Photo
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9 जनवरी को नगर निगम के नए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए चुनाव होंगे। डीसी आफिस ने चुनाव की अधिसूचना जारी कर नगर निगम को भेज दी है। पिछली बार 12 जनवरी को चुनाव हुए थे, जबकि इस बार पहले ही चुनाव हो रहे हैं। इसके साथ ही अब नगर निगम जल्द ही चुनाव अधिकारी तय कर नामांकन का शेडयूल जारी कर देगा। चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही दावेदारों ने लाबिंग तेज कर दी है।
पिछली बार नगर निगम ने पूर्व मेयर कमला शर्मा को चुनाव अधिकारी बनाया था। पूरे शहर की नजर इस चुनाव पर रहती है। एक जनवरी से नामांकन भरने की प्रकिया शुरू हो सकती है, जिसका शेडयूल दो से तीन दिन में जारी कर दिया जाएगा। नामांकन भरने के अलावा वापस लेने के लिए दो दिन का समय दिया जाएगा। चुनाव की तारीख सामने आने पर इसकी सूचना भाजपा पार्टी से पार्टी प्रभारी प्रभात झा को दे दी है।
झा दो जनवरी को सभी पार्षदों की राय जानने के लिए चंडीगढ़ में आ रहे हैं। सभी पार्षदों की राय जानने के बाद ही मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के उम्मीदवार की घोषणा की जाएगी। चुनाव के समय डीसी अजीत बाला जी जोशी भी सदन में उपस्थिति रहेंगे। कुल 26 पार्षद और सांसद किरण खेर मतदान करेंगे, जबकि यह पहली बार होगा, जब नगर निगम के 9 मनोनीत पार्षद वोट नहीं डालेंगे क्योंकि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके वोट के अधिकार को खारिज कर दिया है।
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पिछली बार नगर निगम ने पूर्व मेयर कमला शर्मा को चुनाव अधिकारी बनाया था। पूरे शहर की नजर इस चुनाव पर रहती है। एक जनवरी से नामांकन भरने की प्रकिया शुरू हो सकती है, जिसका शेडयूल दो से तीन दिन में जारी कर दिया जाएगा। नामांकन भरने के अलावा वापस लेने के लिए दो दिन का समय दिया जाएगा। चुनाव की तारीख सामने आने पर इसकी सूचना भाजपा पार्टी से पार्टी प्रभारी प्रभात झा को दे दी है।
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झा दो जनवरी को सभी पार्षदों की राय जानने के लिए चंडीगढ़ में आ रहे हैं। सभी पार्षदों की राय जानने के बाद ही मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के उम्मीदवार की घोषणा की जाएगी। चुनाव के समय डीसी अजीत बाला जी जोशी भी सदन में उपस्थिति रहेंगे। कुल 26 पार्षद और सांसद किरण खेर मतदान करेंगे, जबकि यह पहली बार होगा, जब नगर निगम के 9 मनोनीत पार्षद वोट नहीं डालेंगे क्योंकि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके वोट के अधिकार को खारिज कर दिया है।
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सूद और मौदगिल की लड़ाई में तीसरे की खुल सकती है लाटरी
अरुण सूद
- फोटो : File Photo
सूद और मौदगिल की लड़ाई में तीसरे की खुल सकती है लाटरी
भाजपा में इस समय अरुण सूद और देवेश मौदगिल दो प्रमुख दावेदार हैं। इन दोनों दावेदारों के लिए भाजपा पार्टी बंटी हुई है। मौदगिल के लिए सांसद किरण खेर और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन का गुट लॉबिंग कर रहा है, जबकि अरुण सूद के लिए भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन गुट लॉबिंग कर रहे हैं।
किसी एक का उम्मीदवार तय होने पर गुटबाजी उभरनी तय है। ऐसी स्थिति में किसी तीसरे की लाटरी खुल सकती है। ऐसी स्थिति में पार्टी शक्ति देव शाली, सीनियर डिप्टी मेयर राजेश गुप्ता और महेश इंद्र सिद्धू के नाम पर भी विचार कर सकती है। इस समय नगर निगम में भाजपा के कुल 20 पार्षद हैं, जिनमे सीनियर डिप्टी मेयर राजेश गुप्ता अकेले ऐसे हैं, जो कि तीसरी बार चुनाव जीतकर आए हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी के पास सिर्फ 4 ही पार्षद है।
कांग्रेस को उम्मीद है कि भाजपा में एक उम्मीदवार का नाम तय होने पर दूसरा गुट नाराज होगा, जिससे कोई बगावत करके चुनाव में खड़ा होगा, जिसका फायदा उन्हें मिलेगा। अगर कांग्रेस को भाजपा से नाराज पार्षदों का यह इशारा हुआ कि वह कोई बागी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेंगे, लेकिन कांग्रेस की ओर से उतारे गए उम्मीदवार को क्रास वोटिंग कर देंगे। ऐसी स्थिति में देवेंद्र सिंह बबला मेयर चुनाव के लिए नामांकन भर सकते हैं। बबला से कई भाजपा पार्षदों के साथ संबंध भी अच्छे हैं।
भाजपा में इस समय अरुण सूद और देवेश मौदगिल दो प्रमुख दावेदार हैं। इन दोनों दावेदारों के लिए भाजपा पार्टी बंटी हुई है। मौदगिल के लिए सांसद किरण खेर और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन का गुट लॉबिंग कर रहा है, जबकि अरुण सूद के लिए भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन गुट लॉबिंग कर रहे हैं।
किसी एक का उम्मीदवार तय होने पर गुटबाजी उभरनी तय है। ऐसी स्थिति में किसी तीसरे की लाटरी खुल सकती है। ऐसी स्थिति में पार्टी शक्ति देव शाली, सीनियर डिप्टी मेयर राजेश गुप्ता और महेश इंद्र सिद्धू के नाम पर भी विचार कर सकती है। इस समय नगर निगम में भाजपा के कुल 20 पार्षद हैं, जिनमे सीनियर डिप्टी मेयर राजेश गुप्ता अकेले ऐसे हैं, जो कि तीसरी बार चुनाव जीतकर आए हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी के पास सिर्फ 4 ही पार्षद है।
कांग्रेस को उम्मीद है कि भाजपा में एक उम्मीदवार का नाम तय होने पर दूसरा गुट नाराज होगा, जिससे कोई बगावत करके चुनाव में खड़ा होगा, जिसका फायदा उन्हें मिलेगा। अगर कांग्रेस को भाजपा से नाराज पार्षदों का यह इशारा हुआ कि वह कोई बागी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेंगे, लेकिन कांग्रेस की ओर से उतारे गए उम्मीदवार को क्रास वोटिंग कर देंगे। ऐसी स्थिति में देवेंद्र सिंह बबला मेयर चुनाव के लिए नामांकन भर सकते हैं। बबला से कई भाजपा पार्षदों के साथ संबंध भी अच्छे हैं।