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Hindi News ›   Chandigarh ›   Eight measures suggested in budget 2024 to boost MSMEs entrepreneurs did not like

Budget 2024: एमएसएमई को बूस्ट करने के आठ उपाय, उद्यमियों को रास नहीं आए, कहा-कागजों में कैसे होगा विकास

Wed, 24 Jul 2024 11:38 AM IST
निवेदिता वर्मा राजीव शर्मा, संवाद, लुधियाना (पंजाब)
राजीव शर्मा, संवाद, लुधियाना (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 24 Jul 2024 11:38 AM IST
सार

उद्यमियों के अनुसार देश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का अहम योगदान है। निर्यात में 45 फीसदी, जीडीपी में चालीस फीसदी हिस्सेदारी इसी सेक्टर की है। इस सेक्टर की आठ करोड़ इकाइयों ने 13 करोड़ लोगों को रोजगार दे रखा है। पंजाब भी एमएसएमई का गढ़ माना जाता है। यहां भी साढ़े पांच लाख एमएसएमई यूनिट हैं, जोकि आगे बढ़ने के सरकारी सहायता की राह देख रहे हैं।

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Eight measures suggested in budget 2024 to boost MSMEs entrepreneurs did not like
Budget 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बजट में देश की माइक्रो स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) को प्रोत्साहन देने पर फोकस रखा गया है। इसके लिए वित्त मंत्री ने आठ उपायों का एलान किया, जिनमें मुद्रा लोन की सीमा दोगुना करना, पूंजी निवेश बढ़ाने को 100 करोड़ तक के कवर के साथ ऋण गारंटी योजना, संकट की अवधि में ऋण सहायता प्रस्ताव इत्यादि शामिल हैं, लेकिन ये उपाय उद्यमियों को रास नहीं आए। उद्यमियों का कहना है कि कागजों में एमएसएमई का विकास नहीं हो सकता, इसके लिए जमीन पर ठोस उपाय करने होंगे।
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दावे बहुत, किया कुछ नहीं

फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस ऑफ स्माल स्केल इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया के चेयरमैन बदीश जिंदल कहते हैं कि सरकार ने एमएसएमई के लिए दावे तो बहुत किए, लेकिन किया कुछ नहीं, उल्टा मंत्रालय का बजट कम कर दिया गया। उद्यमी मंत्रालय का बजट पचास हजार करोड़ करने की मांग कर रहे थे। सरकार ने पिछले साल के 23,177 करोड़ के मुकाबले कम करके 21,549 करोड़ कर दिया। इसी तरह मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने वाली सरकार ने इसका बजट भी 2180 करोड़ से कम करके 1963 करोड़ कर दिया। 
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बजट में स्किल डेवलपमेंट की जम कर बात की गई, उस मंत्रालय का बजट भी महज 4520 करोड़ है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का बजट भी 8200 करोड़ से कम करके 6455 करोड़ किया गया। इसके अलावा एमएसएमई को दी जा रही प्रधानमंत्री एंप्लायमेंट गारंटी प्रोग्राम स्कीम में भी बजट 21233 करोड़ से कम करके 12,112 करोड़ किया गया है। इसी तरह गारंटी एमरजेंसी क्रेडिट लाइन स्कीम में भी बजट को 14,100 करोड़ से कम करके 9612 करोड़ किया गया। इसके अलावा अब फर्म में पार्टनर के वेतन पर भी अब टीडीएस लगेगा।
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छोटे उद्योगों को निराशा मिली

फास्टर मेन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रधान नरेंद्र भमरा का कहना है कि बजट से छोटे उद्योगों को निराशा हाथ लगी है। बजट में छोटे उद्योगों के लिए कुछ नहीं है। बजट में स्टील रेगुलेटर के गठन, सीएलसीएसएस योजना का सहारा लेने, विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए मशीनरी पर आयात शुल्क में कमी की उम्मीद थी। एमएसएमई के लिए बजट में कोई नई सब्सिडी या सहायता नहीं है, खासकर, आयकर अधिनियम की धारा 43 बी को वापस नहीं लिया गया है, जो वास्तव में एमएसएमई इकाइयों को नुकसान पहुंचा रहा है। हालांकि कुछ योजनाएं जैसे मुद्रा ऋण को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख किया गया, तनाव की अवधि के दौरान एमएसएमई को ऋण सहायता, विनिर्माण क्षेत्र में एमएसएमईआर के लिए ऋण गारंटी योजना, लेकिन ये योजनाएं केवल कागजों पर ही साबित हुई हैं और बैंकों द्वारा कभी लागू नहीं की गई हैं। साफ है कि इनका लाभ भी एमएसएमई को नहीं मिल रहा।
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