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ब्रह्मपुरा-ढींढसा में लगी पंथक नेता बनने की होड़, शिअद टकसाली भंग करने का प्रस्ताव खारिज
Sat, 04 Jul 2020 12:51 PM IST
खुशबू गोयल
अशोक नीर, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमृतसर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 04 Jul 2020 12:51 PM IST
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रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, सुखदेव ढींढसा
- फोटो : अमर उजाला
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शिअद (टकसाली) के अध्यक्ष रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा और सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा के बीच पंथक नेता बनने की होड़ लग गई है। कुछ दिन पहले मंत्री सेवा सिंह सेखवां, रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा और ढींढसा के बीच एक बैठक हुई है। इस बैठक में ब्रह्मपुरा ने ढींढसा से नई पार्टी के गठन के बारे में बात की थी और ढींढसा ने ब्रह्मपुरा को शिअद (ट) भंग करने के लिए कहा।
वहीं ब्रह्मपुरा ने ढींढसा को शिअद (ट) का अध्यक्ष पद संभालने का आग्रह किया। इसे ढींढसा ने स्वीकार करने से इंकार कर दिया। वहीं ब्रह्मपुरा ने भी स्पष्ट कर दिया कि शिअद (ट) को भंग करने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पार्टी का गठन श्री अकाल तख्त साहिब में अरदास के बाद किया गया है। इसको तोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
ब्रह्मपुरा ने कहा कि ढींढसा दिल्ली दरबार के इशारे पर बोल रहे हैं। उनकी मित्रता दिल्ली दरबार के सत्ताधारियों के साथ है। आगामी विधानसभा चुनाव में ढींढसा की नजर हिंदू वोट बैंक पर है। इसलिए उन्हें शिअद (टकसाली) नाम पर आपत्ति है। ढींढसा यदि बादल परिवार व कांग्रेस को पंजाब की सत्ता से बहार निकालना चाहते है तो वह एकजुट होकर काम करे।
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वहीं ब्रह्मपुरा ने ढींढसा को शिअद (ट) का अध्यक्ष पद संभालने का आग्रह किया। इसे ढींढसा ने स्वीकार करने से इंकार कर दिया। वहीं ब्रह्मपुरा ने भी स्पष्ट कर दिया कि शिअद (ट) को भंग करने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पार्टी का गठन श्री अकाल तख्त साहिब में अरदास के बाद किया गया है। इसको तोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
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ब्रह्मपुरा ने कहा कि ढींढसा दिल्ली दरबार के इशारे पर बोल रहे हैं। उनकी मित्रता दिल्ली दरबार के सत्ताधारियों के साथ है। आगामी विधानसभा चुनाव में ढींढसा की नजर हिंदू वोट बैंक पर है। इसलिए उन्हें शिअद (टकसाली) नाम पर आपत्ति है। ढींढसा यदि बादल परिवार व कांग्रेस को पंजाब की सत्ता से बहार निकालना चाहते है तो वह एकजुट होकर काम करे।
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नए समीकरण की संभावनाओं की तलाश जारी
वहीं अब ढींढसा व ब्रह्मपुरा के बीच पैदा हुए मतभेदों के बाद इस बात की संभावना है कि अकाली दल (टकसाली) द्वारा प्रदेश में तीसरे मोर्चे के लिए की जा रही कोशिशों को धक्का लगे। सुखदेव सिंह ढींढसा अपने बेटे परमिंदर सिंह ढींढसा के राजनीतिक वजूद को एक नई दिशा देने के लिए एक नई पार्टी का गठन करने वाले हैं।
ढींढसा यह नहीं चाहते कि परमिंदर अपनी नई पारी में शिअद (टकसाली) के नेताओं के प्रभाव में काम करें। बादल परिवार के प्रभाव से मुक्त हुए ढींढसा प्रदेश की राजनीति में एक नए समीकरण की संभावनाओं को तलाश रहे जिसमें परमिंदर ढींढसा की एक महत्वपूर्ण भूमिका हो। टकसाली अकाली दल के नेताओं की छवि कट्टर पंथक सोच पर आधारित है।
ढींढसा बादल परिवार की राजनीति में सेंध लगाने के लिए मॉडरेट सिख विचारधारा के साथ प्रदेश की राजनीति को एक नई दिशा देना चाहते हैं, जिसके बैनर के नीचे पंजाब के सभी वर्गों को साथ लेकर चला जाए। 2022 के विधान सभा चुनाव से पहले प्रदेश में तीसरे मोर्चा के गठन की कवायद में जुटे ब्रह्मपुरा और ढींढसा के बीच पैदा हुए विवाद ने सिख राजनीति में नए समीकरण की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
जानकारी के अनुसार सेवा सिंह सेखवां दोनों पंथक नेताओं के बीच जल्द ही एक और बैठक करने की कोशिशों में जुट गए हैं।
ढींढसा यह नहीं चाहते कि परमिंदर अपनी नई पारी में शिअद (टकसाली) के नेताओं के प्रभाव में काम करें। बादल परिवार के प्रभाव से मुक्त हुए ढींढसा प्रदेश की राजनीति में एक नए समीकरण की संभावनाओं को तलाश रहे जिसमें परमिंदर ढींढसा की एक महत्वपूर्ण भूमिका हो। टकसाली अकाली दल के नेताओं की छवि कट्टर पंथक सोच पर आधारित है।
ढींढसा बादल परिवार की राजनीति में सेंध लगाने के लिए मॉडरेट सिख विचारधारा के साथ प्रदेश की राजनीति को एक नई दिशा देना चाहते हैं, जिसके बैनर के नीचे पंजाब के सभी वर्गों को साथ लेकर चला जाए। 2022 के विधान सभा चुनाव से पहले प्रदेश में तीसरे मोर्चा के गठन की कवायद में जुटे ब्रह्मपुरा और ढींढसा के बीच पैदा हुए विवाद ने सिख राजनीति में नए समीकरण की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
जानकारी के अनुसार सेवा सिंह सेखवां दोनों पंथक नेताओं के बीच जल्द ही एक और बैठक करने की कोशिशों में जुट गए हैं।