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हरियाणा में डीम्ड यूनिवर्सिटी के डिग्री धारकों को नौकरी देने में चल रही मनमर्जी, जानिए मामला

Mon, 13 Jan 2020 11:25 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 13 Jan 2020 11:25 AM IST
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Education Department Using Pick and Choose Policy Regarding Job to Deemed University Degree Holders
फाइल फोटो
हरियाणा में पांच डीम्ड यूनिवर्सिटी के डिग्री धारकों को नौकरी देने में 'पिक एंड चूज' चल रहा है। शिक्षा महकमा मनमाने तरीके से नियुक्तियां देने में लगा हुआ है। 2013 में चयनित 300 पीजीटी में से 240 की नियुक्ति अभी तक रोकी हुई है, जबकि 20 को ज्वाइन कराया जा चुका है। समान डीम्ड यूनिवर्सिटी के ही 18 डिग्री धारकों को भी जनवरी 2019 में पीजीटी चयनित होने पर बीते अगस्त में नियुक्ति दे दी गई हैं। इससे 2013 में चयनित पीजीटी के सब्र का बांध टूटने लगा है।
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सीएम विंडो पर सुनवाई के लिए उन्होंने 17 बार आवेदन किया, लेकिन बिना सुने ही शिकायत निपटा दी गई। शिक्षा महकमा इनके चयन को तो सही ठहराता है, मगर नियुक्ति नहीं दे रहा। इन पीजीटी की डीम्ड यूनिवर्सिटी की डिग्रियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में चल रहे मामलों में भी इनके पक्ष में निर्णय आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने एकेडमिक डिग्री को सही ठहराया है और कहा जा चुका है कि करतार सिंह केस तकनीकी व प्रोफेशनल डिग्री से जुड़ा था, उसका एकेडमिक डिग्री से कोई लेना देना नहीं है।
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इसके अलावा हाईकोर्ट भी गुरमेल कौर एवं अन्य के मामले में अपना निर्णय इन डिग्री धारकों के पक्ष में सुना चुका है। उसके बाद सरकार हाईकोर्ट में एलपीए में गई थी, जिसे भी 19 अगस्त 2019 को वापस ले लिया गया। उस समय सरकार ने कहा था कि जरूरत हुई तो रिव्यू में जाएंगे, लेकिन अभी तक रिव्यू पिटीशन नहीं डाली है। बावजूद इसके 2013 में चयनित हुए 240 डिग्री धारक नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। इनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम यह भी हुआ और हो रहा है कि समान यूनिवर्सिटी से साथ में और बाद में डिग्री लेने वालों को नियुक्ति मिली हैं।
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इन डीम्ड यूनिवर्सिटी की डिग्री को लेकर दोहरा रवैया

प्रदेश सरकार ने जनवरी 2014 में 2013 में चयनित पीजीटी के दस्तावेजों के सत्यापन के समय आईएएसई सरदार शहर राजस्थान, जेआरएन विद्यापीठ उदयपुर राजस्थन, विनायक मिशन सेलम तमिलनाडु, बेंगलोर यूनिवर्सिटी व इलाहाबाद कृषि संस्थान से हिंदी, अंग्रेजी, राजनीतिक विज्ञान, इतिहास, गणित, फिजिक्स, समाज शास्त्र विषय में डिग्री धारकों को कोर्ट केस का हवाला देते हुए नियुक्ति देने से मना कर दिया था।

यह भी कहा गया कि डिग्रियां अवैध हो सकती हैं, लेकिन किसी भी जांच में यह साबित नहीं हुआ और न्यायालयों के निर्णय भी इनके पक्ष में आ गए। उसके बाद 2015 में निकाली पीजीटी भर्ती का परिणाम जनवरी 2019 में आया और डीम्ड यूनिवर्सिटी इलाहाबाद कृषि संस्थान के गणित, अंग्रेजी व इतिहास में डिग्री धारकों को ज्वाइनिंग भी मिल गई। जिससे शिक्षा महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। 

2013 में चयनित पीजीटी से जुड़े अहम तथ्य

. चार पीजीटी की मृत्यु हो गई
. सभी ओवरऐज हो चुके हैं, किसी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकते
. सभी चार, पांच बार एचटेट पास कर चुके हैं
. सौ बार से अधिक अधिकारियों से मिलकर नियुक्ति की गुहार लगाई

शिक्षा मंत्री, निदेशक से मिला मामला चेक कराने का आश्वासन
नियुक्ति का इंतजार कर रहे चयनित पीजीटी ने शिक्षा मंत्री कंवर पाल और सेकेंडरी शिक्षा निदेशक पी अमनीत कुमार से बीते सप्ताह मुलाकात कर अपना दुखड़ा रोया है। शिक्षा मंत्री व निदेशक ने मामले को चेक कराने की बात कही है। प्रधान सचिव महावीर सिंह भी उचित कार्रवाई का आश्वासन दे चुके हैं।
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