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600 करोड़ के पोंजी स्कैम में ईडी ने दाखिल की चार्जशीट
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 28 Sep 2017 01:13 AM IST
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600 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को छह आरोपियों के खिलाफ करीब 2 हजार पेज की चार्जशीट दाखिल किया है। ईडी ने चंडीगढ़ बेस मलयेशिया की कंपनी यूनीपेय टूयू मार्केटिंग प्राइवेंट लिमिटेड और यूनीगेटवे ट्रेडिंग कंपनी के छह डायरेक्टरों के खिलाफ मनी लांन्ड्रिग अधिनियम 45 के तहत आरोपी बनाया है। जिला एवं सत्र न्यायालय की कोर्ट में दायर चार्जशीट दायर में ईडी ने सौ के करीब गवाह बनाए हैं।
कंपनी के जिन छह डायरेक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी, उनमें से केवल एक ही गिरफ्तार है। चार्जशीट में कंपनी के डायरेक्टर मुगुनधन गंगम, सेलाथुराई भास्कर, चेला धुरी, अमाल राज, राम कृष्णामूर्ति और कमल कुमार बक्शी के नाम शामिल हैं। इनमें से केवल कमल बक्शी ही गिरफ्तार हैं। उनकी जमानत याचिका जिला अदालत से खारिज हो चुकी है।
ईडी ने आरोपियों के खिलाफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट 2002 के अधिनियम 3, 4 के तहत भी आरोप पत्र दायर किया है। ईडी ने 29 जुलाई 2017 को पोंजी घोटाले की जांच के लिए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में रेड की थी। इस दौरान कंपनी का एजेंट और चंडीगढ़ निवासी कमल बक्शी जो सेक्टर-36 थाना पुलिस में दर्ज एक मामले में भगौड़ा है उसे गुरुग्राम से पकड़ा था। वह इस घोटाले में भी आरोपी है। उसके खिलाफ पानीपत और गुरदासुपर में भी केस दर्ज हैं। ईडी ने रेड के बाद आरोपी की 4.18 करोड़ रुपये की संपत्ति भी सीज की थी। वहीं ईडी के अनुसार इस घोटाले का मास्टरमाइंड मलेशिया निवासी मुगुनधन गंगम है और वह वहीं छिपा हुआ है।
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कंपनी के जिन छह डायरेक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी, उनमें से केवल एक ही गिरफ्तार है। चार्जशीट में कंपनी के डायरेक्टर मुगुनधन गंगम, सेलाथुराई भास्कर, चेला धुरी, अमाल राज, राम कृष्णामूर्ति और कमल कुमार बक्शी के नाम शामिल हैं। इनमें से केवल कमल बक्शी ही गिरफ्तार हैं। उनकी जमानत याचिका जिला अदालत से खारिज हो चुकी है।
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ईडी ने आरोपियों के खिलाफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट 2002 के अधिनियम 3, 4 के तहत भी आरोप पत्र दायर किया है। ईडी ने 29 जुलाई 2017 को पोंजी घोटाले की जांच के लिए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में रेड की थी। इस दौरान कंपनी का एजेंट और चंडीगढ़ निवासी कमल बक्शी जो सेक्टर-36 थाना पुलिस में दर्ज एक मामले में भगौड़ा है उसे गुरुग्राम से पकड़ा था। वह इस घोटाले में भी आरोपी है। उसके खिलाफ पानीपत और गुरदासुपर में भी केस दर्ज हैं। ईडी ने रेड के बाद आरोपी की 4.18 करोड़ रुपये की संपत्ति भी सीज की थी। वहीं ईडी के अनुसार इस घोटाले का मास्टरमाइंड मलेशिया निवासी मुगुनधन गंगम है और वह वहीं छिपा हुआ है।
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यह है मामला
अदालत
- फोटो : file
यह है मामला
कंपनी एक तय फीस के बाद ऑनलाइन सदस्य बनाती थी। कंपनी उन्हें डिजिटल वॉलेट की सुविधा उपलब्ध करवाती थी। कंपनी में देशभर से हजारों लोगों ने करोड़ों रुपया लगाया था। शुरुआत में कंपनी ने लोगों को बहुत मोटा रिटर्न दिया। इससे लोगों का विश्वास कंपनी में बढ़ा तो उन्होंने और पैसा लगाया। कंपनी ने अक्तूबर 2010 में निवेशकों को महीने के महीने मिलने वाले रिटर्न को देना बंद कर दिया था। इससे निवेशकों से 600 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।
शुरुआत में यूटी पुलिस के साइबर सेल ने की थी जांच
2012 में मामला सामने आने के बाद यूटी पुलिस के साइबर सेल ने इसकी जांच की थी। शुरुआत में ट्राइसिटी के चार लोगों ने इसकी शिकायत दी थी। ऑनलाइन फ्राड के तहत दी शिकायत में उन्होंने 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी की बात कही थी। जांच में यह घोटाला बढ़ते-बढ़ते 600 करोड़ से अधिक का पहुंच गया। बाद में शिकायतकर्ताओं ने केस की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बाद में केस की जांच प्रर्वतन निदेशालय को सौंप दी गई थी। साइबर सेल में दर्ज मामले में सेक्टर-36 थाना पुलिस में केस दर्ज किया गया था। इसी केस में कमल बक्शी भगौड़ा था।
कंपनी एक तय फीस के बाद ऑनलाइन सदस्य बनाती थी। कंपनी उन्हें डिजिटल वॉलेट की सुविधा उपलब्ध करवाती थी। कंपनी में देशभर से हजारों लोगों ने करोड़ों रुपया लगाया था। शुरुआत में कंपनी ने लोगों को बहुत मोटा रिटर्न दिया। इससे लोगों का विश्वास कंपनी में बढ़ा तो उन्होंने और पैसा लगाया। कंपनी ने अक्तूबर 2010 में निवेशकों को महीने के महीने मिलने वाले रिटर्न को देना बंद कर दिया था। इससे निवेशकों से 600 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।
शुरुआत में यूटी पुलिस के साइबर सेल ने की थी जांच
2012 में मामला सामने आने के बाद यूटी पुलिस के साइबर सेल ने इसकी जांच की थी। शुरुआत में ट्राइसिटी के चार लोगों ने इसकी शिकायत दी थी। ऑनलाइन फ्राड के तहत दी शिकायत में उन्होंने 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी की बात कही थी। जांच में यह घोटाला बढ़ते-बढ़ते 600 करोड़ से अधिक का पहुंच गया। बाद में शिकायतकर्ताओं ने केस की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बाद में केस की जांच प्रर्वतन निदेशालय को सौंप दी गई थी। साइबर सेल में दर्ज मामले में सेक्टर-36 थाना पुलिस में केस दर्ज किया गया था। इसी केस में कमल बक्शी भगौड़ा था।