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5 घंटों में भूकंप के दो झटकों से थर्राया हरियाणा, रोहतक में था केंद्र
amarujala.com- Presented by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 02 Jun 2017 12:35 PM IST
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भूकंप के दो झटकों से थर्राया हरियाणा
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5 घंटों में भूकंप के दो झटकों ने हरियाणा को दहला दिया। झटके इतने तेज थे कि कई स्थानों पर लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर को दौड़ पड़े। राजधानी दिल्ली और एनसीआर समेत उत्तर भारत में कई जगहों पर झटके महसूस किए गए।
शुक्रवार तड़के सुबह करीब 4:26 बजे रिक्टर स्केल पर 5 की तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र हरियाणा के रोहतक के गोहाना में खरखौदा नामक स्थान पर 22 किलोमीटर गहराई में था। फिलहाल भूकंप से नुकसान की कोई खबर नहीं है। यूपी के शामली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी झटके महसूस किए गए।
मिली जानकारी के मुताबिक, लोग गहरी नींद में थे कि सुबह साढ़े बजे के करीब भूकंप के झटकों से दहल गए। झटके इतने तेज थे कि पंखे, खिड़की-दरवाजे और सब चीजें हिलने लगीं। यह देखकर लोग घबरा गए और दहशत के मारे लोग घरों से बाहर निकल आए। इस दहशत से निकले ही थे कि सवेरे सवा 8 बजे के करीब फिर से भूकंप आया।
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रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.2 रही। दरअसल, पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूम रही हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
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शुक्रवार तड़के सुबह करीब 4:26 बजे रिक्टर स्केल पर 5 की तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र हरियाणा के रोहतक के गोहाना में खरखौदा नामक स्थान पर 22 किलोमीटर गहराई में था। फिलहाल भूकंप से नुकसान की कोई खबर नहीं है। यूपी के शामली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी झटके महसूस किए गए।
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मिली जानकारी के मुताबिक, लोग गहरी नींद में थे कि सुबह साढ़े बजे के करीब भूकंप के झटकों से दहल गए। झटके इतने तेज थे कि पंखे, खिड़की-दरवाजे और सब चीजें हिलने लगीं। यह देखकर लोग घबरा गए और दहशत के मारे लोग घरों से बाहर निकल आए। इस दहशत से निकले ही थे कि सवेरे सवा 8 बजे के करीब फिर से भूकंप आया।
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रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.2 रही। दरअसल, पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूम रही हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।