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दो महीने जीएसटीआर 3बी न भरने पर जनरेट नहीं होगा ई-वे बिल, 5000 हो सकता है फाइन
Sun, 29 Dec 2019 05:19 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 29 Dec 2019 05:19 PM IST
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फाइल फोटो
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जीएसटी रिटर्न पर लगातार कड़े निर्णय लिए जा रहे हैं। जीएसटी काउंसिल ने हाल ही में निर्णय लिया है कि जो कंपनियां लगातार दो महीने 3-बी रिटर्न फाइल नहीं करेंगी, उनका ई-वे बिल जनरेट होना बंद हो जाएगा। इससे डीलर स्थानीय के साथ ही बाहर भी बिक्री के लिए सामान नहीं भेज पाएंगे।
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बीते सप्ताह दिल्ली में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई थी। इसमें जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं भरने को लेकर कुछ कड़े निर्णय भी लिए गए, जो चंडीगढ़ में भी लागू किए जाएंगे। इनमें जीएसटीआर-3बी नहीं भरने वाले डीलर यदि दो महीने तक लगातार रिटर्न फाइल नहीं करेंगे तो उनका ई-वे बिल जनरेट होना बंद हो जाएगा। इसके बाद डीलर स्थानीय स्तर पर और बिक्री के लिए बाहर भेजने वाले सामान को नहीं भेज पाएगा।
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देनी होगी लेट फीस
जीएसटीआर-1 को लेकर भी एक कड़ा निर्णय लिया गया है। काउंसिल की बैठक में तय किया गया कि यदि समय पर जीएसटीआर-1 नहीं जमा किया गया तो डीलर से लेट फीस ली जाएगी। यदि डीलर पहली बार गलती से रिटर्न फाइल नहीं कर पाया तो विभाग लेट फीस माफ कर देगा। डीलर की ओर से लगातार दो बार रिटर्न फाइल नहीं करने पर पेनाल्टी के रूप में लेट फीस के साथ ही डीलर का ई-वे बिल एकाउंट ब्लॉक हो जाएगा। काउंसिल का यह फैसला चंडीगढ़ में भी लागू किया जाएगा।
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क्या होता है जीएसटीआर-1
जीएसटीआर-1 में डीलर को हर महीने की सेलिंग रिपोर्ट फाइल करनी होती है। यह रिपोर्ट वे सभी व्यापारी फाइल करते हैं, जो टैक्स पे करते हैं या जीएसटी में पंजीकृत हैं। इसमें जिस महीने में सेल की गई है, उसके अगले महीने की 10 तारीख को जीएसटीआर-1 फाइल करना होता है।
5000 रुपये तक हो सकता है फाइन
लेट फीस के साथ ही जीएसटीआर-1 में फाइन का प्रावधान किया गया है। यह फाइन विभाग की ओर से 5000 रुपये तक लगाया जा सकता है।