चंडीगढ़ पीजीआई के अजब हाल : दिव्यांग नर्सिंग अफसर ने शादी के लिए मांगी छुट्टी, झूठी शिकायत पर ड्यूटी ही बदल दी
- चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में कार्यरत दिव्यांग नर्सिंग ऑफिसर का तबादला
- शादी की छुट्टी लेकर गए नर्सिंग ऑफिसर को झूठी शिकायत के बाद बदला
- विकलांग जन आयुक्त ने समन जारी कर 30 दिन में पीजीआई प्रशासन से मांगा जवाब
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चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में कार्यरत एक दिव्यांग नर्सिंग ऑफिसर को शादी के लिए छुट्टी देने में आनाकानी करना प्रबंधन को भारी पड़ गया। इस मामले में विकलांग जन आयुक्त ने समन जारी कर 30 दिन में पीजीआई प्रशासन से जवाब मांगा है। जबकि झूठी शिकायत के आधार पर इस दिव्यांग नर्सिंग ऑफिसर का विभाग बदलने के मामले ने भी तूल पकड़ लिया है।
यह है पूरा मामला
पीजीआई के एडवांस आई सेंटर की पांचवीं मंजिल पर तैनात दिव्यांग नर्सिंग ऑफिसर की नवंबर 2020 में शादी थी। उन्होंने 16 नवंबर को अपने असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट और डिप्टी नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट को छुट्टी का आवेदन किया, लेकिन उन्होंने इसे 22 नवंबर तक आगे नहीं बढ़ाया। इस पर नर्सिंग ऑफिसर ने सीधे उच्चाधिकारियों से अनुरोध किया और शादी के लिए छुट्टी मंजूर करवा ली।
इससे दोनों अधिकारी चिढ़ गए और उन्होंने दिव्यांग नर्सिंग ऑफिसर के शादी से लौटने से पहले ही उनके स्मार्ट, एक्टिव और तेजतर्रार न होने की झूठी शिकायत तैयार कर पीजीआई प्रशासन से उनका तबादला दूसरे विभाग में करवा दिया। इन 15 दिन में उनकी ड्यूटी भी बदल दी गई।
आई सेंटर में कार्यरत एक दूसरे दिव्यांग नर्सिंग ऑफिसर के साथ भी ऐसा ही सलूक किया गया। उन पर भी इसी तरह का झूठा आरोप लगाते हुए उसकी ड्यूटी बदलवा दी गई। इसे लेकर दोनों नर्सिंग ऑफिसर तनाव में हैं। उन्होंने इस मामले की दिव्यांग जन कर्मचारी संघ में लिखित शिकायत दी, जिसे संघ ने पीजीआई निदेशक के पास कार्रवाई के लिए भेजा। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने विकलांग जन आयुक्त नई दिल्ली को लिखित शिकायत दी, जिसने समन जारी कर 30 दिन में पीजीआई प्रशासन से जवाब मांगा है।
नियम की परवाह नहीं
31 मार्च 2014 को जारी निर्देशानुसार दिव्यांग कर्मचारी की ड्यूटी वहां लगाए जाने की स्पष्ट हिदायत दी गई है, जहां वह खुद को साबित कर सकें। इतना ही नहीं, उन्हें ट्रांसफर पॉलिसी से भी दूर रखा गया है, लेकिन पीजीआई प्रशासन ने इन दो नर्सिंग ऑफिसर पर कार्रवाई के दौरान इस नियम को दरकिनार कर दिया। जबकि डिसएबिलिटी एक्ट के सेक्शन 92 के अंतर्गत दिव्यांग को प्रताड़ित करने पर 5 साल की सजा का प्रावधान है।
सरकार दिव्यांगों के हित में तमाम योजनाएं बना रही है, लेकिन स्थिति अब भी अफसोसजनक है। संघ ने इस मामले में पीजीआई निदेशक के पास दो बार लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में दिव्यांगों को अपने हितों की रक्षा के लिए विकलांग जन आयुक्त से संपर्क करने को मजबूर होना पड़ रहा है। -सत्यवीर डागर, दिव्यांग जन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष
पीजीआई प्रशासन दिव्यांग जनों के हित को ध्यान में रख कर कार्य करता रहा है। उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के तौर पर दूर करने का प्रयास होता है। इस मामले में जारी समन देखने के बाद ही वे कुछ बता सकते हैं। -डॉ अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता