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इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला ने दुष्यंत और दिग्विजय को पार्टी से निकाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 02 Nov 2018 08:48 PM IST
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फाइल फोटो
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इनेलो में लंबे समय से चली आ रही चाचा अभय चौटाला और भतीजों दुष्यंत व दिग्विजय की जंग में भतीजों को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने शुक्रवार को तुरंत प्रभाव से हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय सिंह को इनेलो की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। उन्होंने दुष्यंत को पार्लियामेंट में पार्टी की संसदीय समिति के नेतृत्व से भी हटा दिया है।
दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय सिंह दोनों पर ही 7 अक्तूबर, 2018 को गोहाना में आयोजित चौधरी देवी लाल के जन्म दिवस उत्सव के दौरान अनुशासनहीनता, हुड़दंगबाजी और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ असंतोष फैलाने वाली नारेबाजी के आरोप लगाए गए थे। ओमप्रकाश चौटाला ने पार्टी कार्यालय को सूचित किया है कि वास्तव में इस मामले में उन्हें किसी भी बाहरी प्रमाण की आवश्यकता नहीं थी।
वह स्वयं उस आयोजन में उपस्थित थे। उन्होंने अनुशासनहीनता और हुड़दंगबाजी की घटनाएं स्वयं देखी और यह भी देखा कि उनके भाषण में भी लगातार व्यवधान डाला गया था। फिर भी उन्होंने इस पूरे मामले को अनुशासन कार्रवाई समिति को सौंपा था। समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि दोनों उन आरोपों के दोषी हैं।
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उन्होंने यह भी कहा कि दुष्यंत और दिग्विजय सिंह उनके परिवार के ही सदस्य थे। इसलिए उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई करना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन वे जीवनपर्यंत जन नायक चौधरी देवीलाल के सिद्धांतों और आदर्शों का पालन करते रहे हैं।
वह भी यह मानते हैं कि पार्टी किसी भी व्यक्ति विशेष या परिवार के सदस्य से बड़ी होती है। वे इस मामले में अनुशासन कार्रवाई समिति की सिफारिशों से सहमत हैं। उन्होंने पार्टी कार्यालय को यह निर्देश दिया है कि उनके निष्कासन के फैसले को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।
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दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय सिंह दोनों पर ही 7 अक्तूबर, 2018 को गोहाना में आयोजित चौधरी देवी लाल के जन्म दिवस उत्सव के दौरान अनुशासनहीनता, हुड़दंगबाजी और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ असंतोष फैलाने वाली नारेबाजी के आरोप लगाए गए थे। ओमप्रकाश चौटाला ने पार्टी कार्यालय को सूचित किया है कि वास्तव में इस मामले में उन्हें किसी भी बाहरी प्रमाण की आवश्यकता नहीं थी।
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वह स्वयं उस आयोजन में उपस्थित थे। उन्होंने अनुशासनहीनता और हुड़दंगबाजी की घटनाएं स्वयं देखी और यह भी देखा कि उनके भाषण में भी लगातार व्यवधान डाला गया था। फिर भी उन्होंने इस पूरे मामले को अनुशासन कार्रवाई समिति को सौंपा था। समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि दोनों उन आरोपों के दोषी हैं।
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उन्होंने यह भी कहा कि दुष्यंत और दिग्विजय सिंह उनके परिवार के ही सदस्य थे। इसलिए उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई करना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन वे जीवनपर्यंत जन नायक चौधरी देवीलाल के सिद्धांतों और आदर्शों का पालन करते रहे हैं।
वह भी यह मानते हैं कि पार्टी किसी भी व्यक्ति विशेष या परिवार के सदस्य से बड़ी होती है। वे इस मामले में अनुशासन कार्रवाई समिति की सिफारिशों से सहमत हैं। उन्होंने पार्टी कार्यालय को यह निर्देश दिया है कि उनके निष्कासन के फैसले को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।