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Chandigarh News: तीन गांवों का गोबर बनेगा बायोगैस, नगर निगम ने शुरू की नई पहल

Thu, 23 Jul 2026 02:43 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 02:43 AM IST
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Dung from three villages to be converted into biogas; Municipal Corporation launches new initiative.
चंडीगढ़। शहर के धनास, मलोया और रायपुर कलां में अब गोबर सिर्फ पशु शेल्टरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद तैयार की जाएगी। नगर निगम ने इंटीग्रेटेड काऊ डंग बायो-रिफाइनरी प्रोजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) आमंत्रित किए हैं। परियोजना के तहत निजी कंपनी गांवों से गोबर एकत्र कर उसका प्रसंस्करण करेगी और बायोगैस समेत अन्य जैव उत्पाद तैयार करेगी। इससे गोबर के खुले में निस्तारण से होने वाले प्रदूषण पर भी रोक लगेगी।
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नगर निगम पहली बार गांवों में निकलने वाले गोबर को वैज्ञानिक तरीके से ऊर्जा में बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। परियोजना समय पर लागू होने पर धनास, मलोया और रायपुर कलां न केवल स्वच्छ गांवों के रूप में विकसित होंगे, बल्कि चंडीगढ़ के ग्रीन एनर्जी मॉडल का भी अहम हिस्सा बनेंगे।
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योजना के तहत इन तीनों गांवों से निकलने वाले गोबर को नियमित रूप से एकत्र किया जाएगा। चयनित निजी एजेंसी आसपास के गांवों से भी गोबर जुटाकर बायोगैस उत्पादन की पूरी व्यवस्था विकसित करेगी। इसके साथ ही बायोगैस उत्पादन के बाद निकलने वाली स्लरी का उपयोग जैविक (ऑर्गेनिक) खाद के रूप में किया जाएगा।
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गोबर के कारण सीवर जाम होने की समस्या भी काफी हद तक समाप्त होगी
इस परियोजना से गांवों में जगह-जगह लगे गोबर के ढेर खत्म होंगे, दुर्गंध और गंदगी से राहत मिलेगी तथा स्वच्छता में सुधार होगा। इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन घटाने में भी मदद मिलेगी। नगर निगम का मानना है कि इससे गोबर के कारण सीवर जाम होने की समस्या भी काफी हद तक समाप्त होगी। नगर निगम के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट इंचार्ज एवं अधीक्षण अभियंता अजय गर्ग ने बताया कि तीनों गांवों में बायोगैस और जैविक खाद बनाने के लिए निजी कंपनियों से प्लांट लगाने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्तुत करने हेतु ईओआई आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना लागू होने से गांवों में गोबर के ढेर समाप्त होंगे। निगम को इससे कितनी आय होगी, इसका आकलन कंपनियों की रिपोर्ट मिलने के बाद ही हो सकेगा।


डड्डूमाजरा में भी बन रहा सीबीजी प्लांट
नगर निगम पहले ही डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में कचरे के पहाड़ से खाली हुई जमीन पर इंडियन ऑयल के सहयोग से कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम शुरू कर चुका है। इस परियोजना में प्रतिदिन 200 टन गीले कचरे के साथ शहर की पांच गोशालाओं से आने वाले करीब 30 टन गोबर का उपयोग किया जाएगा। इससे शहर में कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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