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डाक्टरों की लापरवाही से महिला ने ट्रामा सेंटर के बाहर जन्मा बच्चा
अमर उजाला ब्यूरो, पठानकोट
Updated Wed, 27 Jul 2016 09:43 AM IST
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अस्वस्थ बच्चे को जन्म देने के बाद महिला को अस्पताल के अंदर ले जाता हुआ स्टाफ।
- फोटो : amar ujala
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सिविल अस्पताल में मंगलवार को पहुंची सात माह की गर्भवती ने ट्रामा वार्ड के बाहर अस्पताल प्रांगण में ही बच्चे को जन्म दे दिया। महिला के पति ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि महिला की हालत सामान्य है। बच्चे को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
महिला के पति सुरेंदर निवासी खानपुर ने बताया कि उनकी पत्नी लक्ष्मी सात माह की गर्भवती थी। मंगलवार तड़के प्रसव पीड़ा होने पर वह उसे लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। वहां मरीज को लेकर पीपी यूनिट जाकर अल्ट्रासाउंड करवाने को कहा गया। अल्ट्रासाउंड लैब में डॉक्टर मौजूद न होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया।
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महिला के पति सुरेंदर निवासी खानपुर ने बताया कि उनकी पत्नी लक्ष्मी सात माह की गर्भवती थी। मंगलवार तड़के प्रसव पीड़ा होने पर वह उसे लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। वहां मरीज को लेकर पीपी यूनिट जाकर अल्ट्रासाउंड करवाने को कहा गया। अल्ट्रासाउंड लैब में डॉक्टर मौजूद न होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया।
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ट्रामा वार्ड के बाहर ही बच्चे को जन्म दे दिया।
Civil Hospital Jalandhar
- फोटो : amar ujala
इसी दौरान उनकी पत्नी ने ट्रामा वार्ड के बाहर ही बच्चे को जन्म दे दिया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ रोष जताते हुए कहा कि उनकी पत्नी को उपचार दिए जाने के बजाय स्टाफ ने सिर्फ इधर-उधर भटकाकर उन्हें गुमराह किया है।
उन्होंनेे कहा कि अस्पताल की लापरवाही से उनकी पत्नी एवं बच्चे के स्वास्थ्य को खतरा भी हो सकता था लेकिन लापरवाह अस्पताल को इसकी जरा भी चिंता नहीं है। अस्पताल के सीनियर मेडिकल अधिकारी डॉ. भूपिंदर सिंह ने बताया कि प्री-मेच्योर डिलीवरी होने के कारण मरीज का अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा गया था लेकिन अल्ट्रासाउंड लैब में डॉक्टर अपनी ड्यूटी खत्म कर जा चुके थे।
इसके बाद निजी लैब से अल्ट्रासाउंड करवाने को कहा गया था। अल्ट्रासाउंड न होने से ही मरीज को उपचार नहीं दिया जा सका। उन्होंने कहा कि बच्चे के इलाज में किसी भी प्रकार की कमी अस्पताल में नहीं आने दी जाएगी।
उन्होंनेे कहा कि अस्पताल की लापरवाही से उनकी पत्नी एवं बच्चे के स्वास्थ्य को खतरा भी हो सकता था लेकिन लापरवाह अस्पताल को इसकी जरा भी चिंता नहीं है। अस्पताल के सीनियर मेडिकल अधिकारी डॉ. भूपिंदर सिंह ने बताया कि प्री-मेच्योर डिलीवरी होने के कारण मरीज का अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा गया था लेकिन अल्ट्रासाउंड लैब में डॉक्टर अपनी ड्यूटी खत्म कर जा चुके थे।
इसके बाद निजी लैब से अल्ट्रासाउंड करवाने को कहा गया था। अल्ट्रासाउंड न होने से ही मरीज को उपचार नहीं दिया जा सका। उन्होंने कहा कि बच्चे के इलाज में किसी भी प्रकार की कमी अस्पताल में नहीं आने दी जाएगी।